बता दें कि याचिककार्ता शुभम की बहन ने अपने भाई को गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया। उसका आरोप है कि पुलिस ने दबाव में साजिश के तहत उसके बेगुनाह भाई को गांजा तस्करी का आरोपित बना लिया। जबकि उसका गांजा तस्करी से कोई भी लेना देना नहीं है लिहाजा, बेलबाग थाना प्रभारी अरविंद चौबे, एसआई मोहम्मद समीर, पीएसआई राम सुहावन, आरक्षक सतेंद्र यादव, प्रेमशंकर श्रीवास्तव, अरुण व्यास, पंकज शोले, सुनील सिंह, दीपक मिश्रा सहित अन्य की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
जबलपुर/मध्यप्रदेश।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के एक युवक को गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार करने के बाद नियमानुसार 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश न किए जाने के रवैये को आड़े हाथों लिया। इसी के साथ जबलपुर की बेलबाग थाना प्रभारी अरविंद चौबे सहित अन्य के खिलाफ सीबीआइ जांच के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की एकलपीठ द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत पहले चरण में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल जिनेंद्र कुमार जैन को सीबीआइ की प्राथमिक जांच (पीई) सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अर्थात प्रारंभिक जाँच कराकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जिसकी रिपोर्ट बेलबाग पुलिस के खिलाफ जाने पर सीबीआइ संबंधित दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बाकायदे एफआइआर दर्ज करके अदालत में चालान पेश करेगी।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,याचिकाकर्ता खटीक मोहल्ला, जबलपुर निवासी शुभम सोनकर की ओर से अधिवक्ता अकबर हुसैन उस्मानी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि यह मामला बेलबाग पुलिस की मनमानी से संबंधित है। जिस तरह याचिकाकर्ता शुभम को 27 जुलाई, 2020 को घर से उठाया गया और फिर 24 घंटे तक अदालत में पेश नहीं किया गया, यह रवैया संविधान के अनुच्छेद-21 में वर्णित व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला हुआ जैसा है।
हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए इस मामले में सीबीआई जांच की आवश्यकता को माना
दिलचस्प बात तो यह रही कि याचिकाकर्ता व उसके अधिवक्ता ने सीबीआइ जांच की मांग पर बल नहीं दिया। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर इस मामले में सीबीआइ जांच की आवश्यकता को रेखांकित किया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्ट्या यह प्रकरण नागरिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन से संबंधित पाया गया है। इस तरह के मामले में स्थानीय पुलिस के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने निष्पक्ष जांच की अपेक्षा बेमानी साबित होगी। लिहाजा, सीबीआइ जांच के निर्देश जारी किए जाते हैं।
