गौरतलब है मामला तब का हैं जब डीआईजी भोपाल मयंक अवस्थी एसपी दतिया हुआ करते थे। हाईकोर्ट ने माना कि यहां पदस्थ रहते हुए उन्होंने ट्रायल कोर्ट को झूठी जानकारी दी कि हत्या के मामले से जुडा कॉल डिटेल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है, जबकि पुलिस ने कहा था कि वह डेटा सहेजना ही भूल गई थी।
DGP से जवाब तलब करते हुए कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक से कहा कि क्या ऐसे अधिकारी, जो सबूत छिपाने और झूठी जानकारी देने में लिप्त हों पुलिस विभाग में बने रहने के योग्य हैं?
भोपाल/ग्वालियर/मप्र।
हत्या के एक मामले में कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन छुपाने पर भोपाल DIG मंयक अवस्थी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने डीआईजी भोपाल के खिलाफ विभागीय जांच और अवमानना केस चलाने के आदेश देते हुए कड़ी फटकार लगाई और कहा कि ‘क्या ऐसे अफसर विभाग मे रहने योग्य हैं?’
इसके अलावा यह आदेश मयंक अवस्थी की सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा।
दतिया के तत्कालीन एसपी व वर्तमान में डीआइजी पीएचक्यू मयंक अवस्थी की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी कर कहा कि एक पक्ष को लाभ पहुंचाने दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से काम कर रहे थे। वास्तव में इनका रवैया चौंकाने वाला है। एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, दूसरा पक्ष आजीवन कारावास व मृत्युदंड जैसे केस का सामना कर रहा है। उन्होंने स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। मयंक अवस्थी को एक महीने के भीतर प्रिसिंपल रजिस्ट्रार के यहां 5 लाख रुपए जमा करने होंगे। जो पक्ष केस जीतेगा, राशि उसे दी जाएगी।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,दतिया के दीपार थाने में 24 सितंबर 2017 को हत्या का केस दर्ज हुआ था। आरोपी मानवेंद्र गुर्जर ने आरोप लगाया कि घटना तीन-चार दिन पहले की है। घटना दिनांक को मृतक घायल, गवाह की लोकेशन भिंड जिले के अमायन में थी, लेकिन घटना को दतिया में दिखाया गया। फरियादी व गवाह की लोकेशन मोबाइल में देखी जा सकती है।
सेंवढ़ा न्यायालय ने पुलिस को टावर लोकेशन सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने लोकेशन सुरक्षित करने का पत्र भी कोर्ट में पेश किया। जब केस अंतिम तर्क पर आया तब लोकेशन पेश करने की मांग की गई। पुलिस ने कहा कि लोकेशन सुरक्षित नहीं की गई है। पुलिस का पक्ष सुनने के बाद मानवेंद्र का आवेदन खारिज कर दिया गया। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने वर्तमान दीपार थाना प्रभारी को तलब किया। थाना प्रभारी भी जवाब नहीं दे पाए। तत्कालीन एसपी अवस्थी व तत्कालीन थाना प्रभारी यतेंद्र सिंह भदौरिया से जवाब मांगा।
4 अप्रेल को बहस के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। इसके बाद 16 अप्रैल को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया दिया। कोर्ट ने डीआईजी को आदेश का एक महीने के भीतर पालन करने का निर्देश दिया है।
जांच में हुआ खुलासा
रिपोर्ट के मुताबिक मर्डर केस की जांच में तथ्य सामने आया कि गत 17 सितंबर 2018 को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने संबंधी जानकारी एसपी को भेज दी गई थी, फिर भी कोर्ट को गलत जानकारी दी गई।कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि क्या ऐसे अधिकारी विभाग में बने रहने योग्य हैं और उन्हें फील्ड पोस्टिंग दी जा सकती है?
DIG को हाईकोर्ट ने 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति जमा करने के भी दिए हैं आदेश,फील्ड में पोस्टिंग भी खतरे में

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जानी आदेश में डीआईडी भोपाल मंयक अवस्थी को 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति के लिए जमा करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी मुसीबतें बढ़ गयी हैं, क्योंकि उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच करने के साथ कोर्ट की अवमानना का केस चलाने के आदेश दिए हैं। अब उनकी फील्ड पोस्टिंग भी खतरे में आ गई हैं।
