बता दें कि पुलिस जवान शिक्षा विभाग में पदस्थ बाबू (क्लर्क) जौरा, मुरैना में पदस्थ विकास जाटव निवासी मालनपुर को फर्जी केस में फंसाने की धमकी दे रहे थे। केस से बचाने के लिए 20 हजार की रिश्वत मांग रहे थे। बाबू ने लोकायुक्त में शिकायत की थी।
भिंड/मध्यप्रदेश।
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी और कर्मचारियों पर लोकायुक्त की दनादन कार्रवाई जारी हैं बावजूद इसके रिश्वतखोरी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
दरअसल,भिंड के मालनपुर थाने में 20 हज़ार की रिश्वत ले रहे प्रधान आरक्षक को ग्वालियर की लोकायुक्त टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। धारा 307 के एक मामले में यह रिश्वत ली जा रही थी। प्रधान आरक्षक का नाम मनीष पचौरी बताया गया है।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,भिंड के मालनपुर इलाके में हनुमान चौराहे पर रहने वाले विकास जाटव ने लोकायुक्त ग्वालियर में इस बात की शिकायत की थी कि मालनपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक मनीष पचौरी द्वारा उससे 20 हज़ार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त ने तुरंत इस पर एक्शन लिया और प्रधान आरक्षक मनीष पचौरी को पकड़ने की योजना बना ली।
लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर फरियादी विकास जाटव को 20 हज़ार दिए। विकास जाटव योजना के तहत मालनपुर थाने पहुंचा और रिश्वत के रुपए प्रधान आरक्षक मनीष पचौरी को देने लगा। मनीष पचौरी ने जैसे ही रुपए लिए तो वहां मौजूद लोकायुक्त की टीम ने तुरंत मनीष पचौरी को अपनी हिरासत में ले लिया और कार्रवाई शुरू कर दी।
विकास जाटव ने जानकारी देते हुए बताया कि धारा 307 के मामले में बचाने के एवज में प्रधान आरक्षक मनीष पचौरी ने उससे रिश्वत की मांग की थी। मेमो से नाम हटाने के बदले यह रिश्वत ली जा रही थी।
