बता दें कि इससे पहले 2013 में भी इसी पटवारी को 2500 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। पटवारी धीरज पांडे को 30 दिसंबर 2013 को नामांतरण ऋण पुस्तिका बनाने की एवज में रिश्वत की राशि की मांग करने पर गिरफ्तार किया गया था।
रीवा/मध्यप्रदेश।
एक पुरानी कहावत है कि जब शेर के मुंह में खून लग जाता है तो वह आदमखोर हो जाता है।
इसी प्रकार जब कोई अधिकारी और कर्मचारी के हाथ में रिश्वत की नोट आ जाते हैं तो फिर वह हर छोटे बड़े काम के लिए रिश्वत की मांग करने लगता है। कुछ ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के रीवा जिले में देखने को मिला जहां पर लोकायुक्त टीम ने एक पटवारी को दो–दो बार रिश्वत लेते पकड़ा है। मामला रीवा जिले का है जहां, पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है।
दरअसल पटवारी निर्माण कार्य में आपत्ति लगाकर रिश्वत की मांग कर रहा था। इसके पहले भी वर्ष 2013 में आरोपित पटवारी 25 सौ की रिश्वत लेते पकड़ा जा चुका है। वहीं अब एक बार फिर 10 हज़ार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है।
यह कार्रवाई बुधवार को रतहरा स्थित पटवारी के कार्यालय में की गई है।
इस दौरान इंस्पेक्टर जियाउल हक निरीक्षक लोकायुक्त, उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह, मुकेश मिश्रा, शैलेंद्र, शिवेंद्र, धर्मेंद्र, सुजीतपंच साक्षी सहित 12 सदस्यीय टीम ने कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,अनुराग मिश्रा प्रॉपर्टी डीलर ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी कि रतहरा हल्का पटवारी धीरज पांडे निर्माण कार्य में आपत्ति लगाकर रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
वह अपनी निजी भूमि पर बाउंड्री वॉल का निर्माण करा रहा था, जिस पर आपत्ति कर पटवारी द्वारा 5 हजार रूपए लिए गए और फिर तहसीलदार के नाम पर 10 हजार रूपए की मांग की। ना देने पर धमकी देते हुए कहा कि निर्माण कार्य पर कोई न कोई कमी निकाल कर काम रुकवा दिया जायेगा। शिकायतकर्ता ने बताया इससे पहले भी करीब डेढ़ लाख रूपए पटवारी ने जमीन के नामांतरण सहित अधिकारियों को देने के नाम पर ले चुका है। पटवारी द्वारा लगातार रिश्वत के लिए परेशान किए जाने पर उसने लोकयुक्त में शिकायत की। शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने जांच की। बारीकी से जांच करने के बाद बुधवार को योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया। दोपहर करीब 12 बजे पटवारी धीरज पांडे को लोकायुक्त टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया है।
दूसरी बार रिश्वत लेते गिरफ्तार

जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए धीरज पांडे ने 30 दिसंबर 2013 में नामांतरण और ऋण पुस्तिका बनाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त टीम रीवा ने उस समय भी धीरज को रंगे हाथों 2,500 रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था।
इनका कहना
पटवारी की शिकायत मिली थी शिकायत के आधार पर जांच की गई। दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। इसके पहले भी 25 सौ रुपये रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
–गोपाल धाकड़,अधीक्षक लोकायुक्त।
