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खुद के बुने जाल में फंसे दोनों टीआइ,कानून हाथ में लेना भारी पड़ा,एक लाइन अटैच दूसरा सस्पेंड

बता दें कि टीआई दतिया रत्नेश को नियम अनुसार कंपू थाने में शिकायत दर्ज करा आरोपी को कंपू पुलिस सौपना चाहिए था। लेकिन बिना बताये हेडक्वार्टर छोड़ने की अपनी गलती को छिपाने के लिए टीआई रत्नेश ने नियमों का उल्लंघन किया। यदि वह ग्वालियर में एफआईआर कराते तो उन्हें जवाब देना पड़ता की बिना बताये वह ग्वालियर क्यों गए थे। अपनी इस गलती को छिपाने के लिए वह आरोपी को दतिया ले गए और अलग जुर्म में आरोपी बना दिया।


ग्वालियर/दतिया/मप्र।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के कंपू थाना प्रभारी को कानून को नजरअंदाज कर दतिया कोतवाली थाना प्रभारी की मदद करना भारी पड़ गया। इसके बाद कंपू थाना प्रभारी को जहां लाइन अटैच कर दिया गया। वहीं दतिया कोतवाली प्रभारी सस्पेंड हो गए। दरअसल,पुलिस का काम लोगों में सुरक्षा का भाव जगाना और कानून तोड़ने वालों को सख्त सजा दिलवाना है लेकिन यदि कानून की रक्षा करने वाले ही कानून का मखौल उड़ाने लग जाएं तो इसे विडंबना ही कहेंगे। सोमवार को ऐसी ही एक घटना दिनभर चर्चा में रही जिसमें दो टीआई (TI) स्तर के अधिकारियों ने कानून की परवाह किये बिना दबंगई दिखाई। लेकिन उन्हें ये दबंगई भारी पड़ गई, दोनों के ही खिलाफ दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) ने एक्शन लिया है। एक को लाइन अटैच किया तो दूसरे को सस्पेंड कर लाइन अटैच किया गया है।
दतिया के टीआई रत्नेश यादव द्वारा ग्वालियर के युवक को बिना कारण दतिया ले जाकर आर्म्स एक्ट का फेक मामला दर्ज करने पर आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी ने शिकायत की है। व्यापमं मामले का खुलासा करने वाले आशीष ने ग्वालियर एसपी को आवेदन देकर रत्नेश यादव पर मामला दर्ज करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,घटना 15–16 जनवरी की रात की है जब दतिया कोतवाली के टीआई रत्नेश यादव ग्वालियर आये थे। किसी बदमाश ने कंपू थाना क्षेत्र में उनका मोबाइल लूट लिया। टीआई ने कंपू थाने में शिकायत की। लेकिन लूट का मामला दर्ज नहीं कराया। मामला महकमे के अधिकारी का था तो टीआई कंपू अनीता मिश्रा ने तत्परता दिखाते हुए दबिश देकर आरोपी सोम भार्गव को पकड़ लिया और थाने ले आये। यहाँ कंपू थाना टीआई अनीता मिश्रा ने आरोपी को लॉकअप में ना डालकर टीआई कोतवाली रत्नेश यादव को सौंप दिया और रोजनामचे में सुपुर्दगी दर्ज कर ली। टीआई कोतवाली दतिया रत्नेश यादव आरोपी सोम भार्गव को अपने साथ गाड़ी से लेकर दतिया आ गए और दतिया कोतवाली में उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज कर लिया। दतिया में आरोपी को ले जाकर मामला दर्ज कर बंद करने की जानकारी जब सोम भार्गव के परिजनों को मिली तो उन्होंने एसपी अमित सांघी से शिकायत की।

कंपू टीआई अनीता मिश्रा लाइन अटैच

पूरे मामले को ग्वालियर एसपी अमित सांघी ने गंभीरता से लिया और टीआई कंपू अनीता मिश्रा को प्राथमिक तौर पर दोषी मानते हुए लाइन अटैच कर दिया। एसपी ने जारी आदेश में कहा कि कंपू टीआई अनीता मिश्रा ने पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया और ना ही कानून के अनुरूप कार्यवाही की। एसपी ने पूरे मामले की जांच सीएसपी इंदरगंज को सौंपकर 7 दिन में जांच पूरी करने के निर्देश दिये हैं।

ग्वालियर एसपी की शिकायत पर एसपी दतिया ने टीआई को किया निलंबित

उधर टीआई कंपू अनीता मिश्रा को लाइन अटैच करने के बाद पुलिस अधीक्षक अमित सांघी ने दतिया एसपी अमन सिंह राठौड़ को विभागीय पत्र लिखकर टीआई कोतवाली दतिया रत्नेश यादव की शिकायत की। पत्र को पढ़ने के बाद एसपी दतिया अमन सिंह राठौड़ ने टीआई कोतवाली रत्नेश यादव को बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने और ग्वालियर में लूट की घटना करने वाले आरोपी सोम भार्गव को अवैधानिक तरीके से दतिया लेकर कोतवाली में आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज करने को गंभीरता से लिया और रत्नेश यादव को निलंबित कर दिया। एसपी ने अपने आदेश में लिखा कि टीआई रत्नेश यादव ने पदीय दायित्वों का दुरुपयोग कर गंभीर कदाचरण का प्रदर्शन किया है। एसपी अमन सिंह राठौड़ मे मामले की जांच एडिशनल एसपी को सौंपकर सात दिन में पूरी करने के निर्देश दिये हैं।

इस मामले में आशीष चतुर्वेदी पत्र एसपी ग्वालियर को

ग्वालियर के आरटीआइ एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी ने डीजीपी को ट्वीट किया था। वहीं आरोपित ने भी एसपी को शिकायत भेजी थी। ग्वालियर एसपी ने भी कंपू थाना टीआइ को लाइन अटैच कर दिया है।
दतिया के थाना कोतवाली टीआइ रत्नेश यादव 15-16 जनवरी की दरम्यानी रात ग्वालियर गए थे। वहां कंपू थाना क्षेत्र में विवाद के दौरान उनसे एक युवक ने मोबाइल छीन लिया। उन्होंने ग्वालियर थाने पर सूचना दी। जब आरोपित को पकड़ लिया गया तो यादव उसे अपनी सुपुर्दगी में दतिया ले आए और उसके खिलाफ 25 आर्म्स एक्ट का प्रकरण बनाकर जेल भेज दिया।
इस मामले में आरटीआइ एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी ने ट्वीट किया व आवेदन कर वरिष्ट अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाए कि आरोपित शुभम भार्गव निवासी गुड़ा गुड़ी का नाका ग्वालियर पर दतिया में गलत तरीके से मुकदमा कर जेल भेजा गया है। कंपू थाने में भी आरोपित की सुपुर्दगी कोतवाली टीआई रत्नेश यादव के नाम पर डाली गई थी। वहां कोई प्रकरण दर्ज नहीं था।
ऐसी स्थिति में एक ही आरोपित पर दो केस कैसे दर्ज हो सकते हैं? दूसरा मामला यह था कि टीआइ यादव ने बिना बताए दतिया मुख्यालय छोड़ा था। पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ का कहना है कि यादव ने जो कृत्य किया, वह गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। एक आरोपित दो अलग-अलग केस में कैसे वांछित हो सकता है। फिर टीआइ ने बिना बताए मुख्यालय भी छोड़ा था। इस कारण उन्हें निलंबित किया गया है। ग्वालियर एसपी अमित सांघी ने भी इस मामले में कम्पू थाना प्रभारी अनीता मिश्रा को लाइन अटैच कर दिया।

दतिया पहुंचकर आरोपी के पास पिस्टल व कारतूस कहां से आ गए??

आरटीआइ कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायत कर बताया कि निरीक्षक रत्नेश यादव से विवाद होने के बाद शुभम को कंपू थाने लाया गया था। उस पर टीआइ ने मोबाइल लूटने का आरोप लगाया था, लेकिन युवक के खिलाफ कंपू थाने में कोई प्रकरण दर्ज नहीं कराया। कंपू थाना प्रभारी अनीता मिश्रा ने संदेही शुभम को निरीक्षक रत्नेश यादव के सुपुर्द कर दिया। आशीष का दावा है कि टीआई कंपू ने शुभम को मोबाइल व मोटरसाइकिल के साथ निरीक्षक रत्नेश यादव के सुपुर्द करने की रोजनामचे रिपोर्ट डाली है। लेकिन इसकी सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नहीं दी।
आशीष चतुर्वेदी ने सवाल उठाया है कि शुभम भार्गव के पास निरीक्षक रत्नेश यादव के सुपुर्द करते समय केवल मोबाइल व बाइक थी, फिर उसके पास दतिया पहुंचकर पिस्टल व कारतूस कहां से आ गए? इस सवाल का जवाब जानने के लिए निलंबित निरीक्षक रत्नेश यादव के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर पूछताछ होनी चाहिए, ताकि जिस पिस्टल के साथ शुभम को पकड़ना दिखाया है, वह वास्तिवकता किस की है। पुलिस अधिकारी इस सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं। पूरे मामले की विभागीय जांच कराए जाने की बात अवश्य कह रहे हैं।

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