बता दें कि पशुपालन विभाग में आटा सप्लाई के नाम पर इंदौर के कारोबारी मंजीत सिंह भटिया से ठगों ने 10 करोड़ रुपये हड़प लिए थे। कारोबारी ने सीएम से शिकायत की जिसके बाद एसटीएफ को जांच सौंपी गई।
लखनऊ/उत्तरप्रदेश।
उत्तरप्रदेश में आईपीएस (IPS) अधिकारियों के भ्रष्टाचार व वसूली के मामले थमने का नाम नही ले रहें हैं। बड़े-बड़े कदावर अधिकारियों के नाम इनमें शामिल हैं। शासन ने भी इनपर अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ताज़ा मामला लखनऊ से है। दरअसल,पशुपालन विभाग में ठेके के नाम पर इंदौर के कारोबारी मंजीत सिंह भाटिया से 10 करोड़ रुपये ठगने वाले शातिरों का साथ देने के आरोपी आईपीएस अरविंद सेन पर कानून का शिकंजा कस गया है। लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तारी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट लेने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है।
आईपीएस अरविंद सेन के खिलाफ पर्याप्त सबूत

प्राप्त जानकारी के अनुसार,आईपीएस अरविंद सेन के खिलाफ एसटीएफ को शुरुआती जांच में ही पर्याप्त साक्ष्य मिल गए थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एसटीएफ की जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे हजरतगंज कोतवाली में दर्ज ठगी की एफआईआर में शामिल करके आईपीएस अफसर का नाम विवेचना में खोल दिया गया है।
जांच पूरी होने के बाद 13 जून को कारोबारी की तरफ से हजरतगंज कोतवाली में पशुधन राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव ललित देव, कथित पत्रकार एके राजीव, अनिल राय, आशीष राय समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस व एसटीएफ 12 लोगों को गिरफ्तार करके 10 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। मुख्य आरक्षी दिलबहार सिंह, संतोष मिश्रा और मोंटी गुर्जर समेत 4 अन्य आरोपियों के खिलाफ अनुपूरक आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
कुर्क होगी हेड कांस्टेबल की संपत्ति
मुख्य आरक्षी दिलबहार सिंह तमाम दबाव के बावजूद पुलिस या कोर्ट के समक्ष हाजिर नहीं हो रहा है। एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव का कहना है कि उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट लिया जा चुका है। दिलबहार पर इनाम घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। पुलिस ने उसकी संपत्तियों का ब्योरा जुटा लिया है। गैर जमानती वारंट को रिकॉल कराकर उसकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।
