ग्वालियर/मध्यप्रदेश………
मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में बीते 15 दिनों से पीईबी की नीतियों का विरोध कर रहे छात्रों ने बुधवार को उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि पुलिस ने लाठीचार्ज करना शुरु कर दिया। पुलिस ने विरोध कर रहे 12 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया और करीब 164 छात्रों पर उपद्रव, जबरन रास्ता रोकना और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कर लिया।
इस मामले में बुधवार को छात्रों को कोर्ट मे भी पेश किया गया हालांकि बाद मे उन्हें जमानत दे दी गई।
इस घटना पर थाटीपुर और विश्वविद्यालय थानों की पुलिस ने कार्रवाई की।
क्या है मामला………
दरअसल, पिछले 15 दिनों से शहर में कॉलेजों के छात्र थाटीपुर दशहरा मैदान में बैठकर प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं का परिणाम नार्मलाइजेशन पद्धति पर घोषित करने के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
बुधवार को इसी कड़ी में उन्होंने सड़कों पर उतरकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया
छात्रों की मांग थी कि परिक्षाओं में पारदर्शिता और हर साल भर्ती की जाए। प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया और पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज करना शुरु कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 12 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया और करीब 64 छात्रों पर उपद्रव, जबरन रास्ता रोकना और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कर लिया।
सभी 12 लोगों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जमानत मिल गई है।
इसके बाद ठाटीपुर और विश्वविद्यालय पुलिस ने छात्रो पर एक के बाद लगाई गई धाराओं का छात्रों ने विरोध किया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सब कांग्रेस का ड्रामा है………
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के भूमिका पर सवाल उठाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि जब मैं ग्वालियर में हूं ही नही तो मेरे बंगले पर आकर प्रदर्शन करने का क्या फायदा।
क्या ये लोग मेरी पीठ पीछे मेरे परिवार को घेरने पहुंचे थे
ये कांग्रेस का स्तरहीन ड्रामा है। अगर ज्ञापन देना ही था तो किसी जनप्रतिनिधि को दे सकते थे, इतना ड्रामा और हंगामा करने की क्या जरुरत थी।
लेकिन सिंधिया कांग्रेस के लोगों को सिर्फ मेरा घर दिखता है।
छात्रों के समर्थन में आई कांग्रेसियों को जेल भेजा………
छात्रों के समर्थन में आए 13 कांग्रेसियों को भी गोला का मंदिर पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जहां आरोपियों ने जमानत पेश नहीं की तो उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल से बाहर आते ही छात्रों ने दोनों थानों की पुलिस और शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का आरोप था कि पुलिस उन्हें बेवजह फंसाने की कोशिश कर रही थी। जबरन कई धाराएं लगाई गई और हमे जेल भेजा गया।
