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56 इंच के सीने वाले,56 साल के बहादुर कॉन्स्टेबल नरेश कुमार ने,कुख्यात गैंगस्टर को तीन गोलियों में ढेर किया

बता दें कि गैंगवॉर में मारे गए बदमाश की पहचान मंजीत महल गैंग के राइट हैंड प्रवीण गहलोत के रूप में हुई है, जो इस गैंग में फ़ाइनैंस का काम देखता था। वहीं पुलिस की गोली से मारा गया विकास दलाल पिछले साल अक्टूबर में फ़रीदाबाद पुलिस की कस्टडी से भागा था, जो पहले मंजीत महल गैंग से ही जुड़ा था। बाद में इस गैंग से उसकी दुश्मनी हो गई थी।



नई दिल्ली………..


राजधानी दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले इलाके द्वारका में रविवार को दो अपराधी गुटों के बीच दिनदहाड़े दोपहर करीब 3 बजे हुए गैंगवार में दो लोगों की मौत हो गई। एक अपराधी को दूसरे गैंग के शख्स ने बीच सड़क पर गोली मार दी जबकि गोली मारने वाले नामी अपराधी को एक बहादुर कांस्टेबल नरेश कुमार ने ललकारते हुए ढेर कर दिया। इस बहादुरी के लिए 56 साल के नरेश रातोंरात हीरो बन गए। हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। नौकरी के आखिरी पड़ाव में दिल्ली पुलिस उन्हें इस बहादुरी के लिए आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन देने जा रही है।


क्या है मामला………….


प्राप्त जानकारी के अनुसार द्वारका मेट्रो स्टेशन के पास अचानक दोपहर में गोलीबारी की आवाज शुरू हुई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि, 'अगर पुलिस समय पर नहीं आती तो ये लोग कुछ भी कर सकते थे। मैंने अपनी जिंदगी में इससे पहले ऐसा कुछ नहीं देखा। जिस कार पर गोलियां चलीं उस कार की पूरी विंडस्क्रीन गोलियों से भून दी गई थी, मैंने गिनने पर पाया कि कार पर 14 गोलियां चलाईं गई थीं। गोलियों की आवाज सुनकर पास में खड़ी पीसीआर मौके पर आई। बदमाशों को रोकने के लिए पीसीआर में तैनात कांस्टेबल नरेश ने फायरिंग कर रहे लोगों को ललकारा। कांस्टेबल नरेश एक पिलर के पीछे छिप गए और वहां से अपराधियों पर गोली चलाने लगे। नरेश कुमार ने 3 गोलियां दागी जो आपराधिक गैंग के सदस्य विकास दलाल की गर्दन, चेहरे और हाथ में जा लगी। पुलिस को देखकर इन लोगों ने पुलिस पर भी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों गाड़ियों में बदमाशों की संख्या करीब 6 से 7 थी। दोनों एक दूसरे पर फायरिंग कर रहे थे। द्वारका गैंगवॉर में मारे गए गैंगस्टर में एक मंजीत महाल गैंग का दायां हाथ प्रवीण गहलोत और दूसरा बदमाश विकास दलाल था। विकास दलाल पहले मंजीत महाल गैंग के लिए ही काम करता था, लेकिन बाद में वह किसी वजह से इस गैंग से अलग हो गया। तभी से दोनों के बीच दुश्मनी थी। रविवार को विकास को यह पता चला कि प्रवीण द्वारका आने वाला है तभी उसने प्रवीण को मारने का प्लान बनाया। वह अपने साथ तीन-चार बदमाशों को लाया था। पहले उसने प्रवीण की गाड़ी पर एक दर्जन से अधिक गोलियां चलाईं फिर बाद में गाड़ी से उतरकर प्रवीण की गाड़ी पर फायरिंग की थी। पुलिस को आता देख विकास ने भागने की कोशिश की लेकिन कॉन्स्टेबल नरेश की गोली उसे लग गई और वो वहीं ढेर हो गया।


कौन है बहादुर कॉस्टेबल नरेश कुमार…………



वर्तमान में दिल्ली पुलिस की PCR सेवा में तैनात नरेश कुमार साल 1991 में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए थे। नरेश के परिवार के अधिकतर लोग पुलिस में ही कार्यरत हैं। नरेश के बेटे ने भी हाल ही में कॉन्स्टेबल के तौर पर दिल्ली पुलिस जॉइन की है। नरेश ने कहा कि ‘मैंने इससे पहले कई ख़तरनाक जगहों पर रेड मारी, लेकिन ये घटना सबसे अलग थी। इस दौरान मैंने अकेले मोर्चा संभाला। पुलिस को सूचित करने के लिए मेरे पास बैक-अप भी नहीं था। वक़्त कम था इसलिए मैंने सिर्फ़ 5 मिनट के अंदर 3 गोलियां चलाकर गैंगस्टर विकास दलाल को मार गिराया।

नरेश ने आगे कहा, जब दोनों तरफ़ से गोलियां चल रही थीं तो इसी बीच री-लोडिंग करते वक़्त मेरी गन गिर गयी थी। एक वक़्त तो लगा बदमाशों की गोली न जाने कब मेरा सीना छलनी कर के निकल जाएगी, लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी। मैंने जल्दी से गन उठाकर उसे फिर से री-लोड किया और आख़िर तक बदमाशों से लड़ता रहा। नरेश ने आगे कहा, ‘मैं अपनी इस कामयाबी से ख़ुश हूं मेरी इस उपलब्धि से मेरा पूरा परिवार भी ख़ुश है। पिछले दो पीढ़ियों में मेरे परिवार का कोई भी शख़्स ऐसा नहीं कर पाया। दिल्ली पुलिस में तैनात मेरे बेटे को भी मुझ पर गर्व है।


गैंगवार का वीडियो देखें………..



 

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