भोपाल/गुना/मप्र…………
आजादी के बाद से अब तक जो नहीं हुआ था वो हो गया। आत्ममुग्ध ज्योतिरादित्य ने सिंधिया राजवंश के इतिहास में एक ऐसा दाग लगा दिया जो सदियों तक याद किया जाएगा। सिंधिया के आलोचक 1857 के बाद अब 2019 का भी जिक्र किया करेंगे। सिंधिया राजवंश के 'महाराजा' ना केवल लोकसभा चुनाव हार गए बल्कि अपने ही 'प्यादे' से हार गए और हार का अंतर भी कम नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को चित करने वाले भाजपा प्रत्याशी वही डॉ. केपी यादव हैं, जिन्होंने 2018 में 21000 दिवारों पर 'अबकी बार सिंधिया सरकार' लिखवाया था।
वर्षों से गुना और ग्वालियर संसदीय क्षेत्र सिंधिया परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को मात देने वाले के पी यादव की गिनती कभी सिंधिया के ख़ास सिपहसलार में की जाती थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जब के पी यादव को टिकट नहीं दी तो वह भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा। पार्टी ने लोकसभा में उनको सिंधिया के सामने खड़ा किया और उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के अजय गढ़ में सेंध लगाते हुए 1,25,549 मतों से करारी शिकस्त दी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और केपी यादव के बचपन का फोटो……

माधवराव ने अटल बिहारी को हराया था………….
ग्वालियर, शिवपुरी और गुना में सिंधिया राजवंश की लोकप्रियता का पैमाना यह है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता ने 1984 के चुनाव में भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था। जबकि अटलजी ग्वालियर के लिए बाहरी नहीं थे। तब से लगातार यह माना जाता रहा है कि इस क्षेत्र में सिंधिया के सामने कोई भी आ जाए, जीत नहीं सकता।
ये है सिंधिया राजवंश का चुनावी इतिहास………....
गुना-शिवपुरी और ग्वालियर इन दो लोकसभा क्षेत्रों की राजनीति सिंधिया राजवंश के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राजमाता विजियाराजे सिंधिया उनके पुत्र माधवराव सिंधिया और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया इसके केंद्र है रहे हैं। यहां कहा जाता है कि पार्टी कोई भी हो जितेगा वही जिसके नाम के पीछे सिंधिया लिखा होगा। सिंधिया घराने की राजनीतिक मैदान में उतर चुनाव लड़ने की शुरुआत भी गुना से ही हुई। राजमाता विजियाराजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन का पहला चुनाव यहीं से लड़ा।
मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर तीन पीढ़ियों से सिंधिया घराने का कब्जा रहा है। ग्वालियर के बाद गुना ही वह लोकसभा सीट है, जहां से सिंधिया परिवार चुनाव लड़ना पसंद करता है। इस सीट से सांसद ज्योतिरादित्य की दादी विजयराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया ने निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भी गुना सीट से ज्योतिरादित्य ने भाजपा नेता और प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को एक लाख 20 हजार 792 वोटों से शिकस्त दी थी।
सिंधिया घराने के गढ़ में भाजपा ने कई बार सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन विजयाराजे सिंधिया के बाद से भाजपा को यहां पर कोई ऐसा उम्मीदवार नहीं मिला, जो माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा सके। सिंधिया परिवार की तीन पीढ़ियों को गुना लोकसभा सीट से 14 बार सांसद के तौर जनता ने चुनकर भेजा है। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया छह बार गुना से सांसद रहीं, तो उनके पिता माधवराव चार बार चुने गए थे। ज्योतिरादित्य ने भी चार बार गुना लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
