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डेंगू का डंक:उपचार के दौरान महिला आरक्षक की मौत,कई पुलिस जवान इसकी चपेट में

गौरतलब है कि पुलिस विभाग में करीब 80 जवान डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। रांझी, घमापुर, हनुमानताल व गोहलपुर क्षेत्र में सर्वाधिक पुलिस जवानों को डेंगू ने बीमार किया है। कई जवान अब भी अस्पतालों में भर्ती होकर उपचार करवा रहे हैं।

जबलपुर/मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश के जबलपुर में डेंगू बीमारी ने महामारी का रुप ले लिया है, शहर के लगभग सभी इलाके इसकी चपेट में है, जिससे कई लोग निजी व सरकारी अस्पतालों में भरती होकर अपना इलाज करा रहे है। अब मौत के मामले भी सामने आ रहे है, ऐसा ही एक घटनाक्रम देर रात नेपियर टाउन स्थित निजी अस्पताल में हुआ है, जहां
डेंगू से पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ कॉन्स्टेबल ऊषा तिवारी (55) की मौत हो गई। वह निजी अस्पताल में भर्ती थीं। बेटा व बेटी भी डेंगू की चपेट में हैं। रांझी थाने सहित रांझी पुलिस आवास, छठवीं बटालियन में 100 से अधिक लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। जबलपुर पुलिस के 80 के लगभग जवान डेंगू से पीड़ित हो चुके हैं।

क्या है पूरा मामला,पति के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिली थी

महिला पुलिस आरक्षक उषा तिवारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार,पुलिस विभाग में पदस्थ महिला आरक्षक ऊषा तिवारी 55 वर्ष की डेंगू से मौत हो गई। उन्हें शनिवार दोपहर शहर स्थित निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान शनिवार की रात उनकी मौत हो गई। इधर, डेंगू से जान गंवाने वाली महिला आरक्षक का बेटा लकी और बेटी स्नेहिल तिवारी भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। लकी घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहा है, जबकि स्नेहिल का अन्य निजी अस्पताल में उपचार जारी है।

महिला आरक्षक की मौत के बाद पुलिस अधीक्षक ने घर पहुंचकर शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी

महिला आरक्षक की मौत की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा ने रक्षित निरीक्षक सौरभ तिवारी समेत अन्य अधिकारियों को अस्पताल भेजा जिसके बाद शव को घर पहुंचाया गया। जानकारी के मुताबिक ऊषा तिवारी को पति की मौत के बाद पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। उन्हें आलंबन शाखा में पदस्थ किया गया था। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा ने घर पर पहुंचकर स्‍वजन को सांत्‍वना दी और कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा पुलिस परिवार आपके साथ है। एसपी ने अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं मुहैया कराने के कहा,इसके अलावा परोपकार निधि से 1 लाख रुपए प्रदान करने के लिए रक्षित निरीक्षक सौरभ तिवारी को निर्देशित किया।

शोक संवेदना व्यक्त करते पुलिस अधीक्षक

तबीयत अचानक खराब हुई इलाज के दौरान दम तोड़ा

बताया जाता है कि त्रिमूर्ति नगर दमोह नाका निवासी ऊषा तिवारी की तबीयत नौ सितंबर को खराब हुई थी। उन्होंने 10 सितंबर को खून की जांच कराई तो प्लेटलेट्स की संख्या एक लाख 20 हजार बताई गई। उनका बेटा व बेटी पहले ही डेंगू की चपेट में आ चुके थे। इसलिए स्वयं के रक्त में प्लेटलेट्स की संतोषजनक संख्या मिलने के बाद वे बच्चों की देखभाल में जुट गईं। बेटी स्नेहिल को निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया जबकि घर पर रहकर दवा सेवन से लकी की तबीयत में काफी सुधार आया।
रक्त में एक लाख 20 हजार प्लेटलेट्स मिलने के बाद राहत की सांस लेने वाली ऊषा तिवारी की तबीयत शनिवार दोपहर अचानक खराब होने लगी। जिसके बाद उन्हें हास्पिटल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती कर उपचार प्रारंभ किया परंतु देर रात उनकी सांसें हमेशा के लिए थम गईं।

रेड जोन बना रांझी,अस्पतालों में बेड फुल

रांझी जल भराव वाल क्षेत्र है। फैक्ट्री होने की वजह से खाली जमीन और वहां जल भराव के चलते मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। नगर निगम के स्तर से फाॅगिंग और मच्छर विनिष्टीकरण के लिए दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया। महीने भर पहले रांझी से शुरू हुआ डेंगू अब पूरे शहर में पांव पसार चुका है। यही नहीं, अब चिकुनगुनिया भी फैलने लगा है। हेल्थ विभाग अब तक 2 लाख घरों से लार्वा का सर्वे कर चुका है। इसमें 2705 घरों में डेंगू के लार्वा मिल चुके हैं। वहीं, 399 में डेंगू पॉजिटिव होने की पुष्टि एलायजा टेस्ट से हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या 5 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहा।

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