बता दें कि पुलिसकर्मी कहते हैं कि महकमे में नए अफसरों के साथ उनका प्लान चलता है। पुराने अफसरों ने क्या किया। उनकी प्लानिंग को ज्यादा अहमियत नहीं दी जाती है। ऐसी तमाम योजनाएं हैं जिन्हें चालू करने वाले अफसरों के तबादले के बाद महकमा बेमतलब की बात मान कर भूल जाता है। क्योंकि अफसर के बदलने पर नया अधिकारी अपने प्लान को संचालित और लागू कराता है। विभाग पुरानी प्लानिंग को भूलकर नए की बात को अमल में लाता है। यही थानों और चौकियों के अलावा शहर में तमाम जगहों पर लटकाई गईं बेटियों की पेटियों के साथ हुआ।
ग्वालियर/मध्यप्रदेश।
अधिकारी बदलते ही पुराने अधिकारियों द्वारा लागू की गई योजनाएं गर्त में समा जाती हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण हैं बेटी की पेटी योजना। योजना के साथ अब तालों पर भी जंग लग गयी है।
अफसर बदलते ही पुलिस की योजनाएं कैसे धूल चाटती हैं। यह योजना उसका जीता जागता उदाहरण है। महीनों से शहर के स्कूल, कॉलेज व कोचिंग सेंटर के आसपास लगी 41 बेटी की पेटी को खोला तक नहीं गया है। इन पर लापरवाही का धूल भी चढ़ गई है।
दरअसल,महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस अलर्ट और तमाम इंतजाम बताती है, लेकिन युवतियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खुद के बनाए प्लान को भूल भी रही है। कुछ महीनों पहले पुलिस अफसरों ने शहर में पुलिस चौकियों, गर्ल्स कॉलेज, स्कूल और कई जगहों पर पेटियां लटकवाई थीं। उन्हें बेटी की पेटी का नाम दिया था। यह दावा किया गया था कि इस पेटी का मकसद युवतियों और महिलाओं के जरिए उन लोगों के बारे में जानकारी हासिल करना है जो उनके साथ छेडख़ानी या मजनुगिरी हरकतें करते हैं। पीड़ित होने वाली युवतियां और महिलाएं इन बदमाशों के खिलाफ सामने आकर शिकायत नहीं कर पाती। यह युवतियां और महिलाएं अपनी शिकायत को इस पेटी में डाल सकती हैं। पुलिस उसे पढ़कर उन्हें तंग करने वाले को शंट करेगी।

क्या था पूरा मामला,अफसर बदलतें ही,योजना के साथ तालों पर भी जंग लगी

प्राप्त जानकारी के अनुसार,ग्वालियर शहर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेटी की पेटी योजना की शुरुआत तत्कालीन IG ग्वालियर रेंज राजाबाबू सिंह और तत्कालीन SP नवनीत भसीन ने 19 दिसंबर 2019 को शहर के अलग-अलग पॉइंट पर 41 बेटी की पेटी लगाई गई थीं। उस दौरान पुलिस ने थानास्तर पर पेटी को तबज्जो भी दिया था। इस पेटी में कितनी शिकायत आई थीं। थाना प्रभारी उस समय पर पेटी को खोल कर देखते थे और कार्रवाई भी करते थे, लेकिन इन अफसरों के तबादले के बाद इस बेटी की पेटी से पुलिस ने नजर फेर लीं। ज्यादातर जगहों से यह पेटियां ही गायब हो गई हैं। जहां यह पेटी लटकी रह गई हैं उन्हें खोला नहीं जाता। इन पेटियों पर लटक रहे तालों पर जंग भी लग चुकी है।

शहर में यहां पर लगाई गई थीं बेटी की पेटी
प्रेस्टीज कॉलेज-1, गर्ल्स कॉलेज मुरार-1, गर्ल्स स्कूल मुरार-1, एमिटी यूनिवर्सिटी-1, आईएचएम, महाराजपुरा-1, रायसिंह का बाग कोचिंग एरिया में-3 पड़ाव-8, कंपू-8, थाटीपुर-8, माधौगंज-8 में बेटी की पेटी लगाई गई थीं। जब यहां पेटी लगाने के बाद पहली बार उन्हें खोला गया था तो इसमें रोचक शिकातये भी मिली थीं।
इनका कहना
महिला सुरक्षा के लिए लगाई गई बेटी की बेटी के बारे में एडिशनल एसपी हितिका वासल का कहना है कि बेटी की पेटी पर हम पूरा ध्यान देंगे और देखेंगे कि उसमें क्या-क्या शिकायतें आ रही है। जल्द इस पूरे मामले को दिखवाएंगी कि आखिर पेटी को क्यों नहीं खोला जा रहा है। और इस बेटी की पेटी योजना को और बढ़ावा दिया जाएगा।
