बता दें कि पुलिस जवानों को पकड़ने के लिए आईपीएस ने अपना वाहन 100 मीटर दूर छोड़ दिया और पैदल चलकर प्वाइंट के पास पहुंची और दस मिनट तक उनकी कारगुजारिया देखने के बाद उन्हे एंट्री लेते हुए दबोच लिया। पकड़े गए पुलिसकर्मियों की पहचान प्रधान आरक्षक भानू प्रताप,आरक्षक कमल रावत व दिलीप चौहान के रूप में हुई।
ग्वालियर/मध्यप्रदेश।
कहते हैं कि बलि सिपाही की दी जाती है राजा तो राज करने के लिए होते हैं। कुछ ऐसा ही मामला ग्वालियर में देखने को मिला। दरअसल,नो एण्ट्री में ट्रकों से एंट्री फीस लेकर शहर में प्रवेश करा रहे तीन पुलिसकर्मियों को आईपीएस हितिका वासल ने गिरवाई थाना क्षेत्र के बेला की बावड़ी पर बीती रात पकड़ा है। आईपीएस को देखते ही एक पुलिस जवान भागा, जिसे अन्य पुलिस कर्मियों की मदद से पकड़ा। पुलिसकर्मी माफी मांगने लगे और आगे से गलती ना करने का वादा किया। पुलिस जवानों को रंगे हाथ पकड़ने के बाद एसपी को जानकारी दी। जिस पर एसपी ने तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया लेकिन थाने के मुखिया थाना प्रभारी जिनकी नाक के नीचे खुलेआम ये वसूली का खेल चल रहा था उनको इसकी भनक थी या नही ये तो जाँच का विषय है को, दस हजार रुपए का अर्थदण्ड लगा के कार्यवाही को अंजाम दिया गया।

क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,एसपी अमित सांघी ने बताया कि लंबे समय से बेला की बावड़ी तथा विक्की फैक्ट्री से एण्ट्री लेकर वाहनों को शहर में प्रवेश कराने की शिकायतें मिल रही थी। जिस पर आईपीएस रितिका वासल को मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। बीती रात आईपीएस बेला की बावड़ी पहुंची तो यहा पर तीन पुलिसकर्मी ट्रकों को रोककर उनसे एंट्री लेते मिले। तस्तीक करने के बाद वह पुलिसकर्मियों के पास पहुंची। एएसपी को सामने देखते ही पुलिसकर्मी घबरा गए और एक जवान वहां से भाग निकला, जिसे पुलिस कर्मियों की मदद से पकड़ा।
