●फाइनल ईयर/ टर्मिनल सेमेस्टर की परीक्षाएं सितंबर 2020 के अंत तक आयोजित की जाएंगी।
●फाइनल ईयर/ टर्मिनल सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑनलाइन/ ऑफलाइन मोड़ में संस्थान अपनी सुविधा के अनुसार करा सकते हैं।
●फाइनल ईयर/सेमेस्टर के स्टूडेंट्स का मूल्यांकन उनके द्वारा दी परीक्षा के आधार किया जायेगा।
●जो स्टूडेंट्स फाइनल परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता तो उन्हें विश्वविद्यालय या संबंधित संस्थान द्वारा आयोजित कराई जाने वाली विशेष परीक्षा में शामिल होने के लिए अवसर दिया जायेगा।
●विश्वविद्यालय/ संस्थान यह स्पेशल परीक्षा जब उचित समझे तब करा सकता है लेकिन यह व्यवस्था केवल शैक्षिक सत्र 2019-20 के लिए ही मान्य होगी।
●बाकी परीक्षाओं के बारे में {जैसे, बीए प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष/प्रथम सेमेस्ट या द्वितीय सेमेस्टर के लिए} 29 अप्रैल 2020 को जारी गाइड लाइन मान्य होगी।
नई दिल्ली…………
विश्वविद्यालय अनुदान आयोगन (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शैक्षणिक संस्थाओं की फाइनल ईयर/ फाइनल सेमेस्टर की परीक्षाओं और नए एकेडमिक सत्र को लेकर रिवाइज्ड गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। यह गाइडलाइन ग्रह मंत्रालय के उस नोटिफिकेशन के बाद जारी की गई जिसमें विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थाओं को परीक्षाओं को कराने की अनुमति दी गई।
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) ने सोमवार को रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी कर दी है। यूजीसी ने घोषणा की है कि यूनिवर्सिटी में फाइनल एग्जाम सितंबर में होंगे यानी यूनिवर्सिटियों के फाइनल एग्जाम रद्द नहीं होंगे। इससे पहले यह खबर आई थी कि यूजीसी की एक कमिटी ने फाइनल ईयर के एग्जाम को भी रद्द करने की सिफारिश की है। तब यह माना जा रहा था कि अन्य सेमेस्टर/टर्म की तर्ज पर ही फाइनल इयर का रिजल्ट भी पहले हो चुके एग्जाम और इंटर्नल असेसमेंट के आधार पर तैयार किया जाएगा। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि ऐसा कुछ नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला…………….
प्राप्त जानकारी के अनुसार,विश्वविद्यालय और कालेज अब अपनी अटकी पड़ी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 30 सितंबर तक करा सकेंगे। गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद यूजीसी ने सोमवार देर रात विश्वविद्यालयों और कालेजों की परीक्षाओं को लेकर संशोधित गाइड लाइन जारी की है। जिसमें जुलाई में परीक्षाओं को कराने जैसी अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। साथ ही अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को अनिवार्य बताते हुए इन्हें सितंबर के अंत तक कराने की अनुमति दी है। जो ऑनलाइन और ऑफलाइन किसी भी माध्यम से कराई जा सकेंगी। यूजीसी ने इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और कालेजों को यह भी छूट दे दी है, वह इन परीक्षाओं की स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए 30 सितंबर तक कभी भी करा सकते हैं। हालांकि यूजीसी को इसकी जानकारी देनी होगी।
यूजीसी ने इससे पहले 29 अप्रैल को जारी गाइडलाइन में सभी विवि और कालेजों से एक से पंद्रह जुलाई के बीच अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को कहा था। जबकि पहले और दूसरे वर्ष की परीक्षाएं कराने के लिए 15 से 30 जुलाई तक का समय तय किया था। इस बीच कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों और विश्वविद्यालयों ने मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षाएं कराने से हाथ खड़े कर दिए थे। जिसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी से परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दिए थे।
अंतिम वर्ष की परीक्षा अनिवार्य………….
यूजीसी ने इसके बाद हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी। जिसकी रिपोर्ट के बाद यूजीसी बोर्ड ने यह फैसला लिया है। यूजीसी ने इसके साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश दिया है, कि यदि इसके बाद भी कोई छात्र अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं दे पाता है तो उचित कारण पाए जाने पर उसे बाद में परीक्षा का मौका दिया जाए। संशोधित गाइडलाइन में यूजीसी का सबसे ज्यादा जोर अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर है। जबकि पहले और दूसरे वर्ष के लिए यूजीसी ने पहले ही विश्वविद्यालयों से आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रमोट करने के निर्देश दिए हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट के जरिये एकेडमिक गाइडलाइन जारी की………
The UGC has revisited its earlier guidelines related to university examinations.
In view of the safety, career progression and placements of the students and their larger interests, after consulting @HMOIndia and @MoHFW_INDIA, it has been decided that pic.twitter.com/evKTYPwnIa— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) July 6, 2020
देशभर में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों की फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर को लेकर आज नई गाइडलाइन जारी की। मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट के जरिये एकेडमिक गाइडलाइन जारी की।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने परीक्षा आयोजित कराने के फैसले को '' क्रूर मजाक '' बताते हुए अपना असंतोष व्यक्त किया है।
Not Guidelines of UGC but a cruel joke with students.
Don't spoil the lives of students.#PromoteFinalYearSrudents#COVIDー19 #StudentsLivesMatters pic.twitter.com/tzb86laQcH
— SFI Delhi (@SfiDelhi) July 6, 2020
