बता दें कि बड़े भाई देवेंद्र जाट ने बताया की अंत में जब वह अपने भाई का शव अपने गांव ले गया, तो मुरैना पुलिस के दो सिपाही तक शव के साथ नहीं गए थे। जिस हरेन्द्र जाट ने मध्यप्रदेश पुलिस की सेवा की। उत्कृष्ट कार्य के लिए आईजी से सम्मान प्राप्त किया। उसके मरने पर मुरैना पुलिस के दो जवान तक उसके शव के साथ मथुरा नहीं जा सके थे।
मुरैना/मध्यप्रदेश।
अपने विभाग से न्याय की गुहार लगाते सिपाही के परिजनों ने पुलिस पर मामले को जानबूझकर दबाने का आरोप लगाया है। जो न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। दरअसल,यातायात थाने के सिपाही हरेंद्र जाट की मौत को करीब ढाई महीने हो चुके हैं। बावजूद पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही। यहां तक कि मौके से मिला सुसाइड नोट भी पुलिस ने हरेंद्र के घरवालों को नहीं सौंपा है। सुसाइड नोट में थाने के कुछ लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। परिजनों ने
क्या था पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,11 अप्रैल 2021 काे कॉन्स्टेबल हरेंद्र जाट ने ट्रैफिक थाने के कमरे में फांसी लगा ली थी। देवेन्द्र जाट बड़ा भाई एयरफोर्स में है। इस वक्त जोधपुर में पदस्थ है। हरेन्द्र अविवाहित था। हरेन्द्र के भाई देवेन्द्र जाट ने बताया कि इस आत्महत्या कांड में यातायात थाने के अधिकारी फंसे हुए हैं। हरेन्द्र मरने से पहले सुसाइड नोट में यह लिखकर दे चुका है।
इन अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई पुलिस ने नहीं की है। देवेन्द्र जाट ने बताया कि जब उसने अपने भाई का सुसाइड नोट मांगना चाहा, तो तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी आरती चराटेे ने यह कहते हुए नहीं दिया कि इसे फोरेंसिक लैब में भेजेंगे। देवेन्द्र ने बताया कि जब उसने सुसाइड नोट की फोटो खींचना चाही, तो वह भी नहीं खींचने दी। केवल पढ़ने दिया था।
क्या लिखा था सुसाइड नोट में
देवेन्द्र जाट ने बताया कि मरने से पहले हरेन्द्र ने सुसाइड नोट लिखा था। उसमें लिखा था कि मम्मी-पापा, भाई-बहन मुझे माफ करना। मुझे थाने के कुछ लोगों ने टारगेट करके परेशान कर रखा है। उससे मैं बुरी तरह आहत हूँ। मैं तुम लोगों का ज्यादा साथ नहीं दे पाया। मेरा जीवन बहुत ही छोटा रहा। भाई तुम मम्मी-पापा की देखभाल करते रहना। सुसाइड नोट पर उसके हस्ताक्षर भी हैं।
देवेन्द्र जाट ने बताया कि जब उसके पिता व उसे, उसके भाई के सुसाइड की खबर मिली तो उसने पुलिस से कह दिया था कि उसके सामान से छेड़छाड़ न करें। बावजूद उनके थाने में पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उसके दोनों बैग खंगाल लिए। उसमें से डायरी का पन्ना फाड़ कर सुसाइड नोट निकाल लिया था। उसके शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए भिजवा दिया था। अंत में जब वह अपने भाई का शव अपने गांव ले गया, तो मुरैना पुलिस के दो सिपाही तक शव के साथ नहीं गए थे। जिस हरेन्द्र जाट ने मध्यप्रदेश पुलिस की सेवा की। उत्कृष्ट कार्य के लिए आईजी से सम्मान प्राप्त किया। उसके मरने पर मुरैना पुलिस के दो जवान तक उसके शव के साथ मथुरा नहीं जा सके थे।
पुलिस कोरोना का बहाना करके टालती रहती है मामला
देवेन्द्र जाट ने बताया कि मुरैना पुलिस की तरफ से उसके घर वालों को कभी फोन नहीं आता है। जब, वह लोग फोन करते हैं, और पूछते हैं कि जांच में क्या निकला तो, पुलिस कोरोना का बहाना करके टालती रहती है। अब, तो जिले में लाॅकडाउन भी नहीं है। पुलिस फिर भी मामले को दबाए बैठी है।
इनका कहना
मामले में एसपी ललित शक्यवार का कहना है कि मैं इस मामले की डायरी मंगाकर देखूंगा। इस मामले की विवेचना करवाई जाएगी।
