बता दें कि रमेश शर्मा 30 जुलाई को प्रमोट होकर एएसआई बने थे। अगले ही दिन 31 जुलाई को रिटायर हो गए थे। एक अगस्त को कोतवाली में ही विदाई पार्टी हुई थी। 4 दिन बाद ही बुधवार को कोतवाली थाने के पीछे टावर पर उनका शव लटका मिला। रमेश शर्मा गुना में अपनी पत्नी और मां के साथ रहते थे। उनके दो बच्चे अहमदाबाद में और एक बेटी राजस्थान के छबड़ा जिले में रहती है। परिजनों का आरोप है कि दो दिन पहले जो प्रमोशन दिया गया था, वह केवल नाम के लिए था, इस तरह के प्रमोशन में केवल पद नाम मौखिक तौर पर बदल जाता है। सरकारी दस्तावेजों में इसका कोई जिक्र नहीं होता और ना ही वेतन ये पेंशन में फायदा होता है।
गुना/मध्यप्रदेश।
गुना में कोतवाली थाने से रिटायर्ड ASI रमेश शर्मा ने फांसी लगाने से पहले डायरी में तीन पन्ने का सुसाइड नोट अपनी गाड़ी में छोड़ा था। रमेश की बेटी ने बिना कुछ पढ़े डायरी निकालकर पुलिस को दे दी थी। बाद में परिवार वालों ने हंगामा किया तो परिवार वालों को सुसाइड नोट पढ़वाया गया। सुसाइड नोट में रमेश शर्मा ने जिले में तैनात दो पूर्व SP राहुल लोढ़ा, राजेश सिंह और कैंट थाने के हेड कांस्टेबल पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। सुसाइड नोट में इंक्रीमेंट रोकने और परेशान करने का भी आरोप लगाया गया है। इसकी वजह से प्रमोशन में देरी की बात कही गई है। बेटी ने कहा कि इतने वरिष्ठ अधिकारियों के नाम लिखे हैं, पता नहीं निष्पक्ष जांच होगी भी या नहीं। आज एएसआई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,कोतवाली थाने के पुलिसकर्मियों ने बताया कि मंगलवार को रमेश शर्मा पहले कैंट थाने गए और उसके बाद कोतवाली आए। यहां रात 10 बजे तक वे रहे। उन्होंने हंसी-खुशी सबसे बात की। उनके चेहरे पर किसी तरह की कोई चिंता नहीं दिख रही थी। वे हमेशा जैसे रहते थे, वैसे ही उस दिन भी रहे। इसके बाद वे कोतवाली से निकल गए।
बुधवार सुबह उनकी बेटी ज्योति शर्मा ने कोतवाली पुलिस को बताया कि उनके पिता रात से घर नहीं आए हैं। उनके दोनों नंबर चालू हैं, लेकिन फोन नहीं उठ रहा है। इसके बाद वह SP राजीव मिश्रा से मिलने पहुंच गई। वहां SP को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद जैसे ही वह SP ऑफिस से बाहर निकली, कोतवाली थाने की गाड़ी आ गई। ज्योति को पुलिस ने बताया कि कोतवाली के पीछे ही पिता ने फांसी लगा ली है। परिवार वाले कोतवाली परिसर के पीछे की ओर गए तो टावर पर रमेश शर्मा का शव लटक रहा था।
इसी दौरान ज्योति ने कोतवाली में ही खड़ी अपने पिता की गाड़ी की डिग्गी में देखा तो एक डायरी मिली। उस डायरी को उन्होंने बिना पढ़े ही पुलिस को दे दिया। बाद में उन्हें पता चला कि उस डायरी में उनके पिता ने 3 पेज का सुसाइड नोट लिखा हुआ है। इसके साथ ही मृतक की जेब से उनका मोबाइल भी मिला, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।
परिवार ने हंगामा किया तब पढ़ने के लिए दी डायरी, वीडियो देखें
परिवार के सभी सदस्यों ने हंगामा कर दिया। उनका कहना था की पहले उन्हें सुसाइड नोट और मोबाइल दिखाया जाए। उसके बाद ही वे बॉडी लेंगे। जैसे-तैसे उन्हें मनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। वहां भी सभी परिवार वाले डायरी पढ़ने की जिद पर अड़े रहे। इसके बाद बुधवार देर रात अस्पताल चौकी में उनके बयान लिए गए और कोतवाली लाकर डायरी पढ़वाई गयी। मृतक की बेटी ने डायरी पढ़ने के बाद बताया की डायरी में दो बड़े अधिकारियों के नाम लिखे हैं। इनमे जिले में तैनात रहे दो पूर्व SP राहुल लोढ़ा और राजेश सिंह के नाम हैं। साथ ही केंट थाने के महेंद्र कुशवाहा का भी नाम सुसाइड नोट में लिखा हुआ है। नोट में इन सभी अधिकारियों पर इंक्रीमेंट रोकने, परेशान करने के आरोप लगाए गए हैं। इनकी वजह से ही प्रमोशन देरी से होने का भी आरोप लगाया गया है।
रिटायर्ड होने से दो दिन पहले पदोन्नति हुई,न वेतन बढ़ा, न पेंशन पर कोई असर हुआ
जिस थाने से सेवानिवृत्त हुए, उसी के पीछे एएसआई रमेश शर्मा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने मरने से पहले डायरी में अपनी समस्याओं का भी जिक्र किया है। दरअसल उन्होंने पुलिस विभाग में पूरा सेवा काल मुंशी गिरी में निकाला, जब पदोन्नत हुए तो 2 दिन बाद ही रिटायर्ड हो गए। उन्हें सेवा काल के दौरान डायरी न लिखने जैसी छोटी चीज को लेकर भी वेतनवृद्धि रोके जाने की सजा मिली है। प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक बने, लेकिन इस पद का जो लाभ मिलना था, वह सिर्फ नाम का ही है। क्योंकि सिर्फ कार्यवाहक पदोन्नति मिली थी।
इससे न तो वेतन बढ़ा और न ही पेंशन में कोई लाभ। इसके अलावा दो अन्य मामले उनके कार्यकाल के थे, जिनमें उन्हें कोर्ट में पेशी करनी पड़ रही है। इन तमाम समस्याओं को लेकर वह परेशान थे। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ डायरी में नोट लिखने के बाद उन्होंने अपनी जान दे दी। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल ये है कि उन्होंने कोतवाली के पिछले हिस्से में मंगलवार रात को फांसी लगाई और बुधवार दोपहर को पुलिस को इसका पता चला।
रात भर उनका शव वहां लटका रहा, जबकि परिजन उन्हें तलाशते रहे। उनके मोबाइल की घंटी बज रही थी, लेकिन उठा नहीं रहे थे। इसके बाद भी उनका शव किसी पुलिसकर्मी को नहीं दिखा। बुधवार दोपहर 1 बजे के लगभग पुलिस को उनकी आत्महत्या की सूचना मिली।
ASI से मिली डायरी में बड़े खुलासे,दो पूर्व IPS के कार्यकाल में हुईं परेशानियों का जिक्र किया
1–एएसआई की जेब से एक डायरी मिली है, जिसमें सेवा काल के दौरान सामने आई परेशानियों का जिक्र है। तबादला रुक जाना, वेतनवृद्धि रुक जाना सहित अन्य समस्याओं का जिक्र किया है। इसमें दो पूर्व आईपीएस अधिकारी के नाम का भी उल्लेख किया है।
2–प्रधान आरक्षक के पद पर रहने के दौरान रमेश शर्मा को कोतवाली में प्रकरणों की डायरी न लिखने को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी ने 3 साल पहले वेतनवृ़द्धि रोकी थी। इस वजह से वह चिंतित रहते थे। हालांकि यह बाद में खुल गई थी।
3–लंबे समय तक कोतवाली में पदस्थ रहे, डेढ़ साल पहले अपना तबादला कैंट थाने में कराया था, लेकिन यह बाद में यह तबादला पूर्व एसपी ने निरस्त कर दिया, उन्हें बताया गया कि वह कोतवाली में ही रहना चाहते हैं, इस वजह से उन्हें रोका गया।
4–कैंट में पदस्थी के दौरान कुछ जरुरी दस्तावेज खो गए थे। मामला कोर्ट तक पहुंच गया था। वह पेशी भी कर चुके थे।
5–नोटबंदी के शासकीय नोट को बदला जाना था, लेकिन वह भूल गए। बाद में उन्हें इसके लिए लापरवाह माना और विभागीय प्रक्रिया से गुजर रहे थे।
6–रिटायर्ड होने से सिर्फ 2 दिन पहले शासन ने उन्हें प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक बनाया, लेकिन यह सिर्फ कार्यवाहक पद था। इसका लाभ न तो वेतन पर मिला और पेंशन पर।
इनका कहना
रिटायर्ड एएसआई ने आत्महत्या की है, इस मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। उन्होंने मुझे कोई अपनी परेशानी भी नहीं बताई। उनके पास एक डायरी मिली है, जिसमें उन्होंने सेवा काल के समय की कुछ समस्या का जिक्र किया है। हम बारीकी से मामले की जांच कर रहे हैं। उनके निधन पर हमें दुख है। रिटायर्ड होने के बाद मिलने वाले भत्ते भी मिल चुके हैं, कुछ भुगतान बाकी है।
–राजीव कुमार मिश्रा,एसपी।
