HomeBreaking Newsरक्षाबंधन विशेष:खाकी वाले भाई की रचना अपनी बहन के लिए

रक्षाबंधन विशेष:खाकी वाले भाई की रचना अपनी बहन के लिए

प्रकृति के पुष्पों जैसी कोमल
तुम ठंडी की धूप सुहानी सी
हर पल हँसती रहना ऐसे ही
किसी बड़े महलों की रानी सी
कितना सच्चा है प्यार तुम्हारा
इन सबसे बहुत अनजानी सी
भर भर के खुशियाँ देने वाली
तुम लगती हो बड़ी दानी सी
हमने साथ रहकर पाया है जो
एहसास बच्चे की नादानी सी
मेरे हृदय में बसने वाली
जैसे तुम कोई आसक्ति हो
तुम बहन हो मेरी और शक्ति हो
मेरी ऊर्जा भी और भक्ति हो।

कहीं बैठ अभी यह सोच रहे
सौभाग्य से मिलती रिश्ते की डोर
दुनिया के उलझन में जीने वाले
दिल के सन्नाटें में खुशियों का शोर
जीवन बन गया इन्द्रधनुष सा
ये सतरंगी अम्बर हँसा हो जैसे
लगा कर अपना पूरा जोर
गहरे रिश्ते चमकते हैं जैसे
नीले पानी पर पड़ा सवेरा हो
अनन्त से आयी ऐसी रश्मि
जिसका नहीं होता कोई छोर
हम हृदय में पाकर अनमोल प्यार
अपना सा झुकते उसकी ओर
तमसे ही हर खुशियाँ है मेरी
ऐसी मिलने वाली तृप्ति हो
मेरे हृदय में बसने वाली
जैसे तुम कोई आसक्ति हो
तुम बहन हो मेरी और शक्ति हो
मेरी ऊर्जा भी और भक्ति हो।

सूना लगता है सब कुछ क्यों
तुम बिन बीते ना कोई मेरा कल
समय ही ठहर जाये वहीं
हृदय में रहती हो जिस पल
यूँ हँसती हुई रहना ऐसे ही
बहता है जैसे झरने का जल
हम सच और पवित्र कर्मों के साथ
खुशियों से भर दे माँ का आँचल
सब अर्पित करते हैं सब अपना
दिल में रखकर भाव निश्चल
जो साथ रहो तो जीत मिले
तुम मेरे लिए वह हस्ती हो
मेरे हृदय में बसने वाली
जैसे तुम कोई आसक्ति हो
तुम बहन हो मेरी और शक्ति हो
मेरी ऊर्जा भी और भक्ति हो।

खाकी की कलम से…………..✒️✒️☝️☝️👮👮🚔🚔

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