बता दे कि श्योपुर जिले में चार दिन के भीतर लोकायुक्त पुलिस की यह दूसरी कार्रवाई है। इसके पहले लोकायुक्त पुलिस ने श्योपुर की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पास आय से अधिक संपत्ति पकड़ने की कार्रवाई की थी।
श्योपुर/मध्यप्रदेश।
ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस ने एक पटवारी को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों धरदबोचा। जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए 7 हजार की रिश्वत की मांग करने वाले पटवारी को लोकायुक्त की टीम ने 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। पुलिस ने पटवारी के पास से रिश्वत के रुपये भी जब्त किए और हाथ धुलवाए तो वह गुलाबी रंग से रंग गए। पटवारी ने रिश्वत तहसील में लिए। लोकायुक्त टीम को देखकर पटवारी ने भागने की कोशिश की, लेकिन भाग नहीं पाया।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,बांसेड़ हाल लक्ष्मीपुरा पिपरघार पोहरी निवासी 38 वर्षीय शिशुपाल आदिवासी पुत्र बाबूलाल आदिवासी को अपने बच्चों का जाति प्रमाणपत्र बनवाना था। शिशुपाल बांसेड़ ग्राम कुराचोर के पटवारी सुशील सिंह तोमर से मिले। पटवारी ने जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 20 हजार रुपये मांगे। श्री आदिवासी का कहना है, कि उनकी बड़ी बेटी संगीता को डीएड में प्रवेश दिलाना था, इसलिए वह पटवारी के सामने काफी गिड़गिड़ाया। लेकिन पटवारी नहीं माने। इसके बाद 7 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। 20 सितंबर को शिशुपाल ने पटवारी को पहली किश्त के रूप में 2 हजार रुपये भी दे दिए। लेकिन पटवारी जाति प्रमाण पत्र के लिए घूमाता रहा। इस दौरान डीएड में प्रवेश की तारीख भी निकल गई।
पटवारी सुशीलसिंह तोमर ने शिशुपाल से कहा, कि मुझे पूरे रुपये दोगे तभी साइन करूंगा। श्री आदिवासी 30 सितंबर को ग्वालियर लोकायुक्त के पास शिकायत लेकर पहुंचे। लोकायुक्त ने उन्हें टेप रिकॉर्डर दिया। 1 अक्टूबर को श्री आदिवासी कराहल तहसील में पटवारी तोमर को 2 हजार रुपये दिए और उनकी रिकॉर्डिंग की। बाकी 5 हजार रुपये प्रमाणपत्र मिलने पर देना तय हुआ।
लोकायुक्त पुलिस ने 5 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज कर ली। इसके बाद शिशुपाल ने 2 हजार पटवारी को दे दिए और शेष 5 हजार रुपए 12 अक्टूबर को देने की बात तय हुई, इसलिए सोमवार को टीआई राघवेंद्र ऋषिश्वर के नेतृत्व में लोकायुक्त की 11 सदस्यीय टीम पहले ही कराहल तहसील कार्यालय में पहुंच गई। इसके बाद शिशुपाल तहसील कार्यालय पहुंचा, जहां उसने पटवारी सुशील तोमर को जेब से निकालकर 5 हजार रुपए दिए। पटवारी तोमर ने उन रुपयों को जैसे ही हाथ में लिया, वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया।
