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लोकायुक्त ने 10 हज़ार की रिश्वत लेते हुए डिप्टी रेंजर को रंगे हाथों दबोचा,टीम को देखते ही नोटों की गड्डी फेंककर भागा

बता दें कि रेस्ट हाउस में जहां जबलपुर लोकायुक्त पुलिस रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किये गये डिप्टी रेंजर के खिलाफ कार्यवाही कर रही थी। इस दौरान ही एक अन्य रमरमा निवासी युवक सुरेन्द्र पटले भी वहां पहुंचा। जहां मीडिया से चर्चा करते हुए उसने डिप्टी रेंजर गोविंद वासनिक पर नौकरी के नाम पर डेढ़ लाख रूपये लेने का आरोप लगाया। युवक ने बताया कि मेरे अलावा और भी युवाओं से डिप्टी रेंजर ने नौकरी लगाने के नाम पर राशि ली है, लेकिन न मुझे और न ही किसी अन्य युवा को नौकरी लगी और न ही ली गई राशि डिप्टी रेंजर वापस कर रहे है।


बालाघाट/मध्यप्रदेश।

लोकायुक्त जबलपुर ने मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में छापामार कार्यवाही करते हुए वन विभाग के डिप्टी रेंजर गोविंद वासनिक (लामता प्रोजेक्ट परियोजना में पदस्थ) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। टीम ने बताया कि उन्हें देखते ही डिप्टी रेंजर रिश्वत में लिए गए 10 हज़ार रुपए फेंककर भागने लगा लेकिन टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद लोकायुक्त टीम आरोपी डिप्टी रेंजर को लेकर वारासिवनी रेस्ट हाउस पहुंची।
जहां पुलिस ने आरोपी डिप्टी रेंजर गोंविद वासनिक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत धारा 7,13 और 1 बी के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है। जबलपुर लोकायुक्त पुलिस द्वारा यह कार्यवाही डीएसपी दीलिप झरवड़े के नेतृत्व में की गई। इस दौरान लोकायुक्त निरीक्षक स्वप्निल दास, भूपेन्द्र दीवान, आरक्षक जुबेद खान, सोनु चौकसे, विजय विष्ट और राकेश विश्वकर्मा मौजूद थे।

क्या है पूरा मामला

कार्रवाई करती लोकायुक्त पुलिस

प्राप्त जानकारी के अनुसार,बालाघाट (balaghat) में शिकायतकर्ता रमरमा निवासी राकेश बिसेन ने बताया कि वर्ष 2017 में खेत के पास वनविभाग के फेसिंग तार को काट दिया गया था। जिसके खिलाफ वनविभाग द्वारा उसके खिलाफ फेसिंग चोरी का मामला वारासिवनी थाने में दर्ज कराया गया था। जिसमें मेरे द्वारा माफी भी मांगी गई थी। हाल ही में आयोजित नेशनल लोक अदालत में मामले को समझौता को लेकर नोटिस जारी हुए थे। जिसमें समझौता के नाम पर डिप्टी रेंजर गोंविद वासनिक द्वारा 10 हजार रूपये की मांग की गई थी। जिसकी शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस को की गई थी।डिप्टी रेंजर को 10 हजार रूपये लेते समय लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया।
शिकायतकर्ता राकेश बिसेन की माने तो वर्ष 2017 में इसी मामले को रफा-दफा करने के लिए डिप्टी रेंजर द्वारा मुझसे 80 हजार रूपये की मांग की गई थी। बताया जाता है कि प्रार्थी राकेश बिसेन ने 14 सितंबर को इसकी शिकायत फोन पर लोकायुक्त पुलिस को की थी। जिसके बाद वह 16 सितंबर को लोकायुक्त पुलिस से मिलने जबलपुर गये थे। जिनके साथ लोकायुक्त पुलिस का एक आरक्षक 17 सितंबर को वारासिवनी पहुंचा और इस दौरान आरक्षक ने प्रार्थी और डिप्टी रेंजर के बीच रिश्वत की रकम के लेने को लेकर हुई मोबाईल चर्चा को रिकॉर्ड किया था।

इनका कहना

रमरमा निवासी राकेश बिसेन की शिकायत पर 10 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए डिप्टी रेंजर गोविंद वासनिक को पकड़ा गया है। जिनके द्वारा वारासिवनी थाने में दर्ज चोरी मामले में नेशनल लोक अदालत में समझौता करवाने के नाम पर राशि की मांग की गई थी। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया हैं।

–दिलीप झरवड़े, डीएसपी, लोकायुक्त जबलपुर।

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