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दबंगों ने दलित आरक्षक को घोड़ी चढ़ने से रोका,पुलिस की कड़ी सुरक्षा में निकली बारात,कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला

छतरपुर/मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से दबंगों द्वारा दलित दूल्हें को घोड़ी चढ़ने से रोकने का मामला सामने आया है। दबंगों ने इस बार दूल्हा बने दलित आरक्षक को घोड़ी नहीं चढ़ने दी। वहीं पुलिस जवान को खुद की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। इसके बाद पुलिस सुरक्षा में दूल्हे को घोड़ी पर बिठाकर गांव में बारात घुमाई गई।
दरअसल,जिले के बड़ामलहरा अनुभाग के अंतर्गत ग्राम भगवां थाने के ग्राम कुंडलया में दबंगों ने दूल्हा बने दलित आरक्षक को घोड़ी नहीं चढ़ने दी। नौबत यहां तक आ गई कि दूसरों की रक्षा करने वाली एमपी पुलिस के जवान को खुद की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। इसके बाद पुलिस सुरक्षा में दूल्हे को घोड़ी पर बिठाकर गांव में बारात घुमाई गई।

क्या है पूरा मामला

पुलिस की कड़ी सुरक्षा में घोड़ी पर बैठा दूल्हा

प्राप्त जानकारी के अनुसार,देश की आजादी के 75 साल बाद भी आज गांवों में दलितों पर दबंगों का इतना आतंक है कि वे कानून के रखवालों को तक को नहीं बख्शते हैं। ऐसा ही चौंकाने वाला एक मामला तहसील घुवारा के ग्राम कुंडलया में सामने आया है, जिसमेें दूसरों की रक्षा करने वाले पुलिस जवान को खुद की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी है।

पुलिस के साए में निकली बारात

दरअसल,टीकमगढ़ जिला मुख्यालय में कोतवाली में पदस्थ आरक्षक दयाचंद पुत्र भागीरथ की शादी थी। आरक्षक दयाचंद दलित समाज से संबंध रखता है। आरक्षक 9 फरवरी को घोड़ी पर चढ़कर अपनी दुल्हनियां को लाने के लिए बाजे गाजे के साथ घर से निकला, जब गांव में उसकी दूल्हा निकासी की रस्म हो रही तभी यह बात गांव के दबंगों को पता चलते ही जरा भी रास नहीं आई। दबंगों ने गाली-गलौज करते हुए दूल्हा बने दलित आरक्षक को घोड़ी चढ़ने से रोक दिया और विवाद करने लगे लेकिन दूल्हे के परिवार ने मौके की नजाकत व दबंगों के तेवर देखकर दूल्हे को समझाइश देकर मना लिया और बिना राछ के ही सभी वापस लौट गए, इसके बाद बारात गांव से रवाना हो गई। यह बात आरक्षक को नागवार गुजरी और उसने अपने परिजनों के साथ पुलिस और प्रशासन को इस पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। एक नौजवान पुलिस आरक्षक की शादी के दिन उसके ही गांव में घोड़े पर बैठकर दबंगों द्वारा राछ नहीं निकलने देने की खबर ने पूरे जिले के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मचा दी।

पुलिस की कड़ी सुरक्षा में घोड़ी पर बैठा दूल्हा

पुलिस की कड़ी सुरक्षा में दलित आरक्षक की बारात निकली

10 फरवरी को जब दूल्हा बारातियोें सहित दुल्हन की विदा कराके कुंडलया पहुंचा, तभी छतरपुर कलेक्टर संदीप जीआर, बड़ामलहरा और बिजावर अनुभाग के कई थानों के पुलिस बल सहित कुंडलया पहुंच गए। गांव में कड़ी सुरक्षा के बीच दुल्हन विदा करा के गांव लौटे दलित दूल्हे को फिर से घोड़ी पर बिठाया और गांव में उसकी राछ निकासी कराके विवाह की अन्य रस्में पूरी कराई हैं। कलेक्टर ने दूल्हे को गुलदस्ता भेंट करके शुभकामनाएं भी दीं। इस मामले में आरक्षक दूल्हे दयाचंद ने बताया कि रात के समय दूल्हा निकासी की रस्म के दौरान गांव के दबंगों ने उसे घोड़ी चढ़ने से रोका और डीजे वापस करवा दिया था। दरअसल गांव में दलित के घोड़ी पर नहीं चढ़ने की परंपरा रही है, इस परंपरा को मैंने तोड़ा है। अब देखते है कि आगे क्या होता है।

कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला

वहीं घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दयाचंद अहिरवार स्वयं आरक्षक है लेकिन बारात निकालने के लिये उसे पुलिस बुलानी पड़ी। संकीर्णतावादी हौसले इसी सरकार में क्यों परवान चढ़ रहे हैं।दलित उत्पीड़न प्रदेश में रोज की बात है। पुलिस ने बारात तो निकलवा दी मगर पूरा परिवार कांप रहा है। दबंगों का खौफ है।मध्यप्रदेश सरकार तत्काल उसे सुरक्षा दे और दबंगों पर केस दर्ज कर सीखचों तक ले जाए। कांग्रेस नागरिक अधिकार और आत्मसम्मान का सौदा नहीं होने देगी।

 

इनका कहना

SP सचिन शर्मा ने बताया एक गली में जाने को लेकर रोका गया था, लेकिन दूल्हे को धूमधाम से घोड़ी पर बैठाकर पुलिस की सुरक्षा में हर गली से गुजारा गया।
एएसपी विक्रम सिंह ने बताया कि गांव मेें हालात पूरी तरह से सामान्य हैं, विवाह की सभी रस्में पूरी कराई जा चुकी हैं। एक आरोपित के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्यवाही की गई है। गांव में पुलिस अभी भी सतर्क है।

–दूल्हे दयाचंद अहिरवार का कहना है कि हमारे गांव में परंपरा है कि छोटी जाति का कोई दूल्हा घोड़ी पर बैठकर बरात नहीं निकाल सकता। मैंने ये परंपरा तोड़ने की ठानी। मैंने जब घोड़ी पर बैठकर बरात निकाली तो एक गली के बाहर कुछ ऊंची जाति के युवाओं ने डीजे वाले को आगे बढ़ने से रोका। दरअसल, बरात उस गली से निकल रही थी, जहां सवर्ण लोग रहते हैं। मैंने इसकी सूचना मेरे वरिष्ठ अधिकारियों को दी। दयाचंद ने कहा कि अभी तो विभाग के लोगों ने बरात निकालने में मदद कर दी है। बाद में परेशानी हो सकती है। कुछ लोग विवाद कर सकते हैं।

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