बता दें कि ग्वालियर के मुरार थाने में दुष्कर्म पीड़ित को प्रताड़ित करने और आरोपी के दादा के कहने पर मारपीट कर बयान बदलने का दबाव डालने के मामले में एकल पीठ ने तत्कालीन मुरार TI अजय पवार और एक SI कीर्ति उपाध्याय पर FIR दर्ज करने और इनके साथ ही ASP सुमन गुर्जर, CSP मुरार रामनरेश पचौरी व TI सिरोल प्रीति भार्गव को ग्वालियर अंचल से बाहर कर विभागीय जांच कराने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट की युगल पीठ ने विभागीय जांच व FIR के आदेश पर आंशिक रोक लगा दी है।
ग्वालियर/मध्यप्रदेश।
मुरार मे बलात्कार मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद दो टीआई व एक एसआई को पुलिस मुख्यालय ने ज़िले से बाहर भेज दिया है। मंगलवार को हाईकोई की युगल पीठ ने FIR और विभागीय जांच के आदेश पर आंशिक रोक (स्टे) लगा दी है। पर पांचों पुलिसकर्मियों को ग्वालियर अंचल से बाहर जाना होगा। साथ ही इस मामले में अब VC की जगह भौतिक सुनवाई के लिए कहा है।
मध्यप्रदेश शासन व मुरार थाना के तत्कालीन TI अजय पवार ने 23 जून को दिए एकल पीठ आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर की थी। दोनों अपीलों को एक साथ सुना गया था। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने तर्क दिया कि रिट पिटीशन में सीधे FIR के आदेश नहीं दिए जा सकते हैं। जिन लोगों के खिलाफ FIR के आदेश दिए गए हैं, उन्हें सुना ही नहीं गया। कोर्ट ने सीधे-सीधे पुलिस अधिकारियों को दोषी मानते हुए आदेश दिया है। इस तरह के आदेश से न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं हो रहा है। इसलिए आदेश पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की युगल पीठ ने विभागीय जांच व FIR के आदेश पर आंशिक रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने यह दिए थे निर्देश
–ASP शहर सुमन गुर्जर को मामले की जांच दी थी, पर आरोपी पर कोई कार्रवाई न करते उल्टा उनकी मदद की। भूमिका की जांच हो। अंचल से बाहर भेजा जाए।
–CSP आरएन पचौरी ने आरोपियों की मदद की, कोर्ट को गलत जानकारी देकर गुमराह किया, इसलिए भूमिका की जांच हो। अंचल से बाहर ट्रांसफर किया जाए
–मुरार थाने से मामला सिरोल भेजा गया। यहां जांच सिरोल थाना प्रभारी प्रीति भार्गव कर रही थीं। पांच महीने तक कुछ नहीं किया। भूमिका की जांच हो
–मुरार थाना TI अजय पवार व सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय ने नाबालिग को अवैध रूप से थाने में बिठाए रखा। नाबालिग के वीडियो बनाकर और कुछ अहम CCTV वाट्सएप पर शेयर भी किए। इन दोनों अफसरों पर मामला दर्ज किया जाए। जिस पर अब स्टे मिल गया है।
–हाईकोर्ट ने पुलिस अफसरों पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। यह राशि पीड़िता को देने के लिए कहा।
कोर्ट ने थानों में जितने भी CCTV कैमरे लगे हैं, वह 24 घंटे चालू रखे जाएं। भविष्य में ये कैमरे बंद नहीं रहे। कंट्रोल रूम से कैमरे कन्ट्रोल हों।
–कोर्ट ने कहा कि अक्सर देखने को मिलता है कि थाने के CCTV बंद होने की रिपोर्ट आती है। इस घटना के समय भी कैमरे बंद थे। DGP मध्य प्रदेश इसका पालन करवाएं।
–CBI मामले की जांच करे, CBI गंगा सिंह व पुलिस अफसरों के फोन कॉल्स की जांच करे।
पीड़िता व उसके पिता के बयानों की तीन वीडियो क्लिप पेश की थी। इस क्लीपिंग को बंद लिफाफे में रखने के निर्देश दिए हैं।
–पुलिस अफसरों की भूमिका की विभागीय जांच के आदेश दिए थे, जिस पर अब आंशिक रोक लगा दी है।
क्या था पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,एक लड़की ने मुरार थाना पहुंचकर घटना के संबंध में बताया था कि खुद की उम्र 15 साल बताते हुए आरोप लगाया था कि सीपी कॉलोनी निवासी गंगा सिंह भदौरिया के मकान में वह झाडू पोंछा का काम करती थी। 20 दिसंबर 2020 से उसे काम पर रखा था। घर के ग्राउंड फ्लोर पर ही रहती थी। 31 जनवरी की रात 8 बजे गंगासिंह का नाती आदित्य भदौरिया और उसका एक दोस्त ने मेरे दरवाजा पर दस्तक दी। जब दरवाजा खोला तो आदित्य और उसके दोस्त कमरे में आ गए। इन्होंने मेरे साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वहां से धमकाकर भाग गए। काफी डरी हुई थी पहले CM हेल्प लाइन पर कॉल किया। जहां सूचना मिलने पर मुरार पुलिस उसे लेकर थाना पहुंची। पुलिस ने आदित्य के दोस्त पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। पर मामला दर्ज होने का पता चलते ही आरोपी आदित्य भदौरिया का दादा व ठेकेदार गंगासिंह भदौरिया थाने पहुंचा। उसके बाद पुलिस ने उल्टा पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़िता ने कहा था कि उसे थाने में रात भर झाडू और डंडे से पीटा। उसके मां-पिता को थाने में बंधक बनाकर पुलिस ने पीटा। इसमें तत्कालीन TI मुरार अजय पवार, सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय पर सीधा आरोप लगा था।
