बता दें कि कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड में अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच में करीब 80 अधिकारियों व कर्मियों को दोषी पाया गया है। एसआइटी ने करीब 3200 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी है। रिपोर्ट में करीब 700 पन्ने मुख्य हैं, जिनमें दोषी पाए गए अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका के अलावा करीब 36 संस्तुतियां भी शामिल हैं। एसआइटी ने करीब 50 पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के अलावा जिला प्रशासन के अधिकारियों व कर्मियों के अलावा आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की संस्तुति की है।
कानपुर/उत्तरप्रदेश।
कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड में विशेष जांच दल (एसआइटी) की रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। जिसके अनुसार,कानपुर के तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान में डीआईजी अनंत देव तिवारी (Anand Dev Tiwari) को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया है। कानपुर में हुए बहुचर्चित बिकरू कांड (Bikru Kand) की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट में वह दोषी पाए गए हैं। जिसके बाद उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा,तत्कालीन SSP दिनेश कुमार पी. को नोटिस दिया गया है। इससे पहले एसआईटी की रिपोर्ट में 80 अधिकारियों व कर्मचारियों को दोषी पाया जा चुका है।

बिकरू कांड के बाद हुई थी कार्यवाही
बिकरू कांड के बाद अनंत देव को एसटीएफ के डीआईजी पद से हटाकर पीएसी मुरादाबाद में डीआईजी के पद पर भेज दिया गया था। अब उन्हें पीएसी के डीआईजी पद से निलंबित कर दिया गया है। वह बिकरू कांड से पहले कानपुर नगर के एसएसपी थे।
बिकरू कांड के समय कानपुर नगर के एसएसपी रहे दिनेश कुमार पी को बाद में झांसी के एसएसपी पद पर स्थानान्तरित कर दिया गया था। मौजूदा समय में वह इसी पद पर हैं कारण बताओ नोटिस का जवाब मिलने के बाद उनके खिलाफ लघु दंड की कोई कार्रवाई की जा सकती है।
तेज़तर्रार अफसरों में गिनती होती हैं इनकी

DIG अनंत देव कानपुर से सटे जिले फतेहपुर के मूल निवासी हैं। कानपुर से उनका गहरा नाता है। परिवार के कई सदस्य यही रहते हैं। अनंत देव ने अपनी शिक्षा-दिखा फतेहपुर से पूरी करने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी इलाहाबाद से की। अनंत देव 1986 बैच के पीपीएस अफसर हैं और प्रमोशन के बाद इन्हें आईपीएस बनाया गया। वह इससे पहले 1998 में कानपुर में तैनात रहे। लगभग एक साल तक कानपुर में तैनाती के दौरान आनंद देव ने स्वरूप नगर, कलेक्टरगंज समेत तीन सर्किलों की जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान अनंत देव ने शहर से गई गिरोहों और अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपराधियों का एनकाउंटर किया। डी-39 गैंग की उन्होंने कमर तोड़ दी थी। दाउद इब्राहीम और अतीक गैंग के कई अपराधियों को उन्होंने सलाखों के पीछे पहुंचाया।
मायावती ने अनंत देव को एसटीएफ का एसपी बना ददुआ को मारने का आदेश दिए। अनंत देव तेज-तर्रार एसटीएफ के जवानों के साथ 2007 में मारकुंडी के जंगलो में उतर गए और मुठभेड़ में 5 लाख के इनामी तथा उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश में आतंक का पर्याय बने कुख्यात डकैत ददुआ को मार गिराया। ददुआ पर डकैती, हत्या और अपहरण के 200 से ज्यादा मामले उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में दर्ज थे। मुठभेड़ में ददुआ के साथ उसका दाहिना हाथ छोटा पटेल सहित 4 अन्य डकैत भी मारे गए थे। अपने गुरू ददुआ के मारे जाने के बाद उसके चेले ठोकिया ने बदला लेने की कसम खाई और एसटीएफ पर हमला कर दिया, जिसमें 15 से ज्यादा एसटीएफ के जवान शहीद हुए थे। इसके बाद
ददुआ और ठोकिया ददुआ के एनकाउंटर के बाद इन्हें अपराधियों का यमराज तक कहा जाने लगा और बड़े-बड़े डकैत व अपराधियों में इनका खौफ भर गया। वह 100 से ज्यादा बड़े अपराधियों को ढेर कर चुके हैं। एनकाउंटर की फेहरिस्त और बढ़ती ही गई है।
राष्ट्रपति पदक विजेता हैं अनंत देव
कानपुर का चार्ज संभालने से पूर्व मुजफ्फरनगर के साथ ही फैजाबाद, गोरखपुर, बुलंदशहर, प्रतापगढ़, आजमगढ़ व सिद्धार्थ नगर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की बागडोर अनंत देव संभाल चुके हैं। इन्हें वीरता के चलते राष्ट्रपति पदक से नवाजा जा चुका है।
कई ऑडियो हुए थे वायरल

बीते दिनों एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में अनंच देव के खिलाफ जांच की सिफारिश की थी। यह सिफारिश कानपुर के बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा के एक पत्र और कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर की गई थी। इस ऑडियो में बिकरू में रेड पर जाने से पहले सीओ देवेंद्र मिश्रा और एसपी ग्रामीण के बीच फोन पर बातचीत है। इसमें देवेंद्र मिश्रा चौबेपुर एसओ और पूर्व एसएसपी अनंत देव पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। सीओ ने एसपी ग्रामीण से कहा था कि पुराने एसएसपी अनंत देव ने एसओ विनय तिवारी पर हाथ रखा है। अनंत देव की वजह से ही विनय तिवारी बोलना सीख गया है। उन्होंने एसपी ग्रामीण को यह भी जानकारी दी थी कि विनय तिवारी डेढ़ लाख रुपए महीने लेकर जुआं खिलाता था। शिकायत पर भी विनय तिवारी पर कार्रवाई नहीं होती थी। यही नहीं एसओ ने जुआ खेलाने वाले से 5 लाख रुपए अनंत देव तिवारी को दिए थे।
क्या था पूरा मामला

कानपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई, 2020 की रात कुख्यात अपराधी विकास दुबे व उसके साथियों ने सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की घेरकर हत्या कर दी थी। बिकरू गांव में पुलिस टीम एक मामले में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई थी, लेकिन पुलिस के दबिश देने की सूचना विकास दुबे को पहले ही मिल गई थी। एसटीएफ ने कुख्यात विकास दुबे को 10 जुलाई, 2020 को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। शासन ने इसके अगले दिन 11 जुलाई, 2020 को एसआइटी गठित कर उसे नौ बिंदुओं पर जांच सौंपी थी।
ये लगे थे आरोप

-अनंत देव तिवारी के साथ जय बाजपेई की फोटो वायरल हुई हैं। लिहाजा अनंत देव तिवारी पर विकास दुबे के संपर्क में रहने का आरोप है।
-कई ऑडियो वायरल हुए हैं, जिनमें अनंत देव तिवारी के संबंध में तमाम बातें सामने आई हैं।
-ये भी जानकारी मिली है कि जय बाजपेई अनंतदेव तिवारी के मकान बनने में भी सहयोग कर रहा था।
-जय वाजपेई के मार्फत विकास दुबे ट्रांसफर पोस्टिंग भी कराता था। साथ ही जमीन की खरीद फरोख्त का काम भी करता था।
