ग्वालियर/मध्यप्रदेश…………….
अपनी लापरवाही के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले माहेश्वरी नर्सिंग होम की लापरवाही का खामियाजा एक थाना प्रभारी के हँसते खेलते परिवार को चुकाना पड़ा एक ही पल में जीवन की सारी खुशियों ने जैसे मुँह मोड़ लिया हो। एक ही पल में दो मासूमों के सिर से "माँ"! का साया उठ गया। दरअसल,माहेश्वरी नर्सिंग होम में 27 मई 2016 को डाॅक्टरों की लापरवाही के चलते एक ऐसा हादसा हुआ, जिसमें टीआई दीपक यादव की पत्नी की मौत हो गई और उनका हंसता-खेलता परिवार बिखर गया।
क्या है पूरा मामला……………..
प्राप्त जानकारी के अनुसार,तत्कालीन महाराजपुरा टीआई दीपक यादव की पत्नी रेनू यादव को छाती में बाल तोड़ हो गया था, जिससे कारण गठान हो गई थी। माइनर ऑपरेशन के लिए वह माहेश्वरी नर्सिंग होम में भर्ती हुईं। शाम पांच बजे डाॅक्टरों ने बिना परीक्षण किए उन्हें एनेस्थीसिया दिया और फिर ऑपरेशन कर दिया, जो कि सफल रहा। ऑपरेशन के बाद डाॅक्टर चले गए। कुछ समय बाद रेनू यादव की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी हुई जो कि उनकी सांस नली में फंस गई। हालत बिगड़ती देखकर परिजनों ने डाॅक्टर को बुलाया लेकिन ड्यूटी पर कोई डाॅक्टर था ही नहीं। चंद मिनट में उनकी सांसें थम गईं। इलाज में डाॅक्टरों द्वारा बरती गई लापरवाही के खिलाफ टीआई दीपक यादव ने बेटे ध्रुव यादव और पुत्री नायसा यादव द्वारा 2018 में अधिवक्ता मनोज उपाध्याय के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में दावा पेश किया, जिसे स्वीकार करते हुए अध्यक्ष अरुण सिंह तोमर और सदस्य आभा मिश्रा ने आठ लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
इनका कहना…………..
बेटे ध्रुव (13) और बेटी नायशा (10) की जिम्मेदारी भी मुझ पर आ गई है। यदि कोई गंभीर बीमारी होती तो इतना कष्ट नहीं होता लेकिन डाॅक्टरों की लापरवाही ने परिवार को बिखेर कर रख दिया। डाॅक्टरों की लापरवाही की सजा मेरे परिवार को भुगतनी पड़ रही है। इस आदेश से डाॅक्टरों को सबक मिलेगा।
—दीपक यादव,तत्कालीन महाराजपुरा टीआई।
