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रोजगार सहायिका शिक्षक पति के साथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार,वहीं दूसरी ओर तहसीलदार का रीडर 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

भोपाल/मध्यप्रदेश।

भोपाल लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को जिले की रोजगार सहायिका और उसके शिक्षक पति को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। रोजगार सहायिका नीतू भार्गव ने ठेकेदार से यह रिश्वत ग्राम पंचायत दिल्लौद में चल रहे निर्माण कार्य के बिल मंजूर करने के बदले में मांगी थी। नीतू अपने शिक्षक पति विनय के जरिए रिश्वत ले रही थी। इससे पहले भी वह ठेकेदार से बिल भुगतान के लिए रुपए ले चुकी है।

लोकायुक्त पुलिस की गिरफ्त में नीतू भार्गव का पति विनय भार्गव।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,लोकायुक्त पुलिस ने बताया कि 8 जुलाई को फरियादी वैभव भार्गव ने बिलों के भुगतान के लिए रोजगार सहायिका नीतू भार्गव द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत दी थी। ठेकेदारी ग्राम पंचायत दिल्लौद में मनरेगा योजना के तहत दो सड़कों का निर्माण करा रहा है। आरोप है कि नीतू भार्गव ने मजदूरों और मशीनी कार्य के भुगतान के लिए पहले भी 30 हजार रुपए लिए थे। इसके बाद एक बार फिर 50 हजार रुपए की मांग कर रहीं थी। वैभव इससे पहले भी आरोपियों को रिश्वत के 30 हजार रुपए दे चुका था।
लोकायुक्त पुलिस ने बताया कि शिकायत सही पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके लिए पहले पुलिस फरियादी के साथ गुरुवार को आरोपी के घर पहुंची थी। लेकिन, विनय ने वै‌भव को करोंद चौराहा आने को कहा। फिर एक घंटे बाद मनोहर डेयरी की पार्किंग में बुलाया। यहां जैसे ही विनय ने रिश्वत ली, तभी लोकायुक्त निरीक्षक डॉ. सलिल शर्मा, वीके सिंह की टीम ने आरोपी नीतू भार्गव व उसके पति विनय भार्गव को पकड़ लिया। रिश्वत के पैसे विनय भार्गव ने अपने हाथों में लिए थे। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।


तहसीलदार का रीडर 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार,EOW की कार्यवाही



देवास/मध्यप्रदेश।

देवास के हाटपिपल्या में तहसीलदार के कम्प्यूटर ऑपरेटर को रिश्वत लेते ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया। कम्प्यूटर ऑपरेटर सचिन विश्वकर्मा नामांतरण के प्रकरण मामले में 10 हजार रुपए की रिश्वत ले रहा था। विश्वकर्मा तहसीलदार के रीडर का भी काम देखता है। पीड़ित ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) उज्जैन को शिकायत की थी।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,हाटपिपल्या के रहने वाले गणेश जाट का नामांतरण का प्रकरण तहसीलदार के पास विचाराधीन है। करीब 5 महीने से कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। पीड़ित ने तहसीलदार के कंप्यूटर ऑपरेटर सचिन विश्वकर्मा से सम्पर्क किया तो उसने 10 हजार रुपए की मांग की। साथ ही कहा कि अगर नहीं दिए तो तुम्हारा काम नहीं होगा। जिसके बाद गणेश जाट ने 6 जुलाई को उज्जैन ईओडब्ल्यू के एसपी दिलीप सोनी को शिकायत की।
गणेश जाट ने एसपी को शिकायत में बताया कि 3 प्रकरण के निराकरण के लिए तहसीलदार का कंप्यूटर ऑपरेटर 10 हजार मांग रहा है। शिकायत की जांच करने के बाद गणेश जाट को केमिकल लगे 10 हजार रुपए के नोट देकर भेजा। गुरुवार को कंप्यूटर ऑपरेटर सचिन विश्वकर्मा को 10 हजार रुपए दिए तो उसने जेब में रख लिया। जेब में रखते ही ईओडब्ल्यू की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम ने हाथ धूलवाए तो कंप्यूटर ऑपरेटर के हाथ गुलाबी हो गए। टीम ने 10 हजार रुपए जब्त करने के साथ जिस पैंट में रुपए रखे थे। उसे भी जब्त कर लिया। ईओडब्ल्यू की टीम ने सचिन विश्वकर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा में प्रकरण दर्ज कर जमानत पर रिहा कर दिया।

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