भोपाल/मध्यप्रदेश………
डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा होने के बाद जारी एक परिपत्र में कहा है कि बिना अनुमति के मीडिया से संबंध रखने वाले पुलिस अफसर और कर्मचारियों पर कार्यवाही की जाएगी
डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को मीडिया से दूरी बनाए रखना का फरमान जारी किया है।
उन्होंने कहा है कि बिना अनुमति के कोई भी मीडिया से संबंध नही रखेगा और अगर ऐसा करते कोई अधिकारी-कर्मचारी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
क्या है मामला…….
दरअसल, बीते दिनों दलित आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा भड़की थी ,साथ ही सोशल मीडिया पर भी हिंसा को भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे और टीवी चैनलों पर हिंसा का सीधा प्रसारण दिखाया गया था। इसी के चलते पुलिस ने यह निर्णय लिया है। पुलिस का मानना है कि मीडिया और सोशल मीडिया में चले मैसेज के कारण ही हिंसा भड़की थी, इसलिए उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एक परिपत्र जारी कर सचेत किया है कि मीडिया से दूरी बनाए रखे।
सोशल मीडिया पर पुलिस अफसरों और कर्मचारियों द्वारा अविवेकपूर्ण टिप्पणियां की जा रही है, जो की गलत है। निर्देश के बावजूद अगर कोई अधिकारी-कर्मचारी ऐसा करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
डीजीपी द्वारा जारी परिपत्र में निर्देश……..
1.फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यू ट्यूब, ब्लॉग पर अनुचित, अमर्यादित एवं आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट न करें।
2.सोशल मीडिया पर शासकीय दस्तावेज को स्कैन कर, स्क्रीन शॉट शेयर न करें।
3.अतिउत्साह में वाट्सएप ग्रुप में किसी भी पोस्ट का समर्थन न करें।
4.पुलिस अफसर और कर्मचारी फर्जी नाम से फेसबुक, वाट्सएप या अन्य किसी सोशल साइट पर अपना प्रोफाइल पेज न बनाएं।
5.किसी भी विषय, फोटो अन्य सामग्री जो कि दुर्भावनापूर्ण, अश्लील, जाति-धर्म, लिंग, किसी के पक्षपात को प्रदर्शित करती हो इस तरह की पोस्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दें और न ही समर्थन करें।
6.वीआईपी की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात अफसर और कर्मचारी महत्वपूर्ण स्थलों के फोटो, सेल्फी सोशल साइट पर बिलकुल भी पोस्ट न करें।
न ही ऐसी कोई जानकारी पोस्ट की जाए जिससे सुरक्षा को खतरा हो।
