बता दे इससे पहले बालाघाट की लांजी में नगर परिषद निर्माण शाखा प्रभारी उपयंत्री संजय शर्मा को गिरफ्तार करने के तीन दिन बाद ही लोकायुक्त पुलिस ने परियोजना अधिकारी को ट्रेप कर रिश्वतखोरों में हड़कंप मचा दिया है।
बालाघाट/जबलपुर/मप्र।
मध्यप्रदेश में काम करने के एवज में रिश्वत लेने के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। रिश्वत मांगने की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस भी रिश्वतखोरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। बावजूद इसके घूसखोर अधिकारी कर्मचारी रिश्वत लेने से बाज नही आ रहे हैं। रिश्वतखोरी का खेल बदस्तूर जारी है और बेचारी जनता कदम कदम पर काम कराने के लिए घुस की इस परंपरा के आगे बेबस लाचार ही दिख रही है।
लोकायुक्त टीम जबलपुर ने शुक्रवार सुबह बालाघाट पहुंचकर ट्रेप की कार्रवाई की है। यहाँ महिला एवं बाल विकास बैहर के परियोजना अधिकारी को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है।
टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,ग्राम पंचायत हिर्री निवासी ममता मरकाम की शिकायत पर परियोजना अधिकारी दक्षदेव शर्मा को रिश्वत लेते ट्रैप किया गया।
दरअसल,लोकायुक्त निरीक्षक जीएस मर्सकोले ने बताया कि ममता मरकाम का चयन आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर हुआ है, लेकिन नियुक्ति नहीं मिल रही थी। नियुक्ति पत्र जारी करने के एवज में परियोजना अधिकारी ने महिला से कुल 20 हजार रुपए की मांग की थी।
महिला ने 11 अप्रैल 2022 को इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त जबलपुर से की। जिसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से परियोजना अधिकारी दक्षदेव शर्मा को कार्यालय में ही पांच हजार रुपए लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
20 हजार की मांगी थी रिश्वत,10 हजार रुपए में तय हुआ सौदा
ममता ने बताया कि आरोपी परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ी सहायिका से पूर्व में 20 हजार की मांग की गई थी, लेकिन प्रार्थी की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण एक साथ इतनी राशि देने में असमर्थता जताई गई। इसके बाद नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए 10 हजार रुपए में सौदा किया गया, जिसकी पहली किस्त 5 हजार रुपए देना तय हुआ। आंगनबाड़ी सहायिका की सूझबूझ और लोकायुक्त टीम की तत्परता के चलते अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
