बता दें कि भोपाल में सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (CGST) के सुपरिटेंडेंट अंकुर खंडेलवाल को दो लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा है। उन्हें 5 दिन की रिमांड पर लिया है। एक व्यापारी से 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते सीबीआई ने उन्हें बुधवार शाम पकड़ा था। इसके बाद गुरुवार खंडेलवाल को सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया।
भोपाल/मध्यप्रदेश।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सीबीआई ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए केन्द्र सरकार के एक बड़े अधिकारी को लाखों रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बुधवार की शाम CBI (CENTRAL BUREAU OF INVESTIGATION) की टीम ने सीजीएसटी (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के सुपरिटेंडेंट अंकुर खंडेलवाल को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। हालांकि रिश्तखोरी के मामले में उनका साथी अधिकारी चेतन सक्सेना भी शामिल था लेकिन वो सीबीआई की गिरफ्त में आने से पहले भी भाग निकला।
CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए GST के सुप्रिंटेंडेंट को 2 लाख की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
दरअसल,एक व्यापारी ने रिश्वत मांगने की शिकायत CBI से की थी। CBI ने GST के सुप्रिंटेंडेंट चार ठिकानों पर भी छापा मारा। तलाशी की कार्रवाई अभी जारी है।
क्या है पूरा मामला,एक गिरफ्तार,दूसरा फरार

प्राप्त जानकारी के अनुसार,भोपाल के एक व्यापारी पीयूष पर जीएसटी ने एक करोड़ की रिकवरी निकाली थी। सूत्रों ने बताया कि इसी रिकवरी में सेटलमेंट के नाम पर जीएसटी के दो सुप्रिडेंट स्तर के अधिकारियों ने रिश्वत की मांग की थी। आरोप है कि सुप्रिडेंट अंकुर खंडेलवाल और चेतन सक्सेना ने सेटलमेंट के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।हालांकि फिर 6 लाख रुपये पर बात तय हुई।
CBI ने इस पूरे मामले की प्राथमिक जांच के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ सबूत जुटाए और अफसर को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। इसके बाद जब पीयूष अरेरा हिल्स स्थित जीएसटी के ऑफिस में रिश्वत की पहली किश्त 2 लाख लेकर पहुंचा। जैसे ही उसने अंकुर खंडेलवाल को 2 लाख रुपए दिए, वैसे ही CBI की टीम ने उसे दबोच लिया। हालांकि, चेतन सक्सेना वहां से गायब हो गया। सीबीआई की टीम ने अंकुर खंडेलवाल और चेतन सक्सेना के 4 संभावित स्थानों पर दबिश दी है। वहां सर्चिंग की कार्रवाई की जा रही है सीबीआई इस एंगल पर जांच कर रही है कि इन अफसरों ने और कितने व्यापारियों से तो इस तरह की रिश्वत ली है।
सुपरिटेंडेंट ने छुए नहीं नोट, बल्कि ड्राॅज में रखवाए 2 लाख रुपए
सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद पियूष को बुधवार देर शाम रुपए लेकर अरेरा हिल्स स्थित सीजीएसटी ऑफिस भेजा। पियूष का कहना है कि उसने खंडेलवाल के कहने पर ड्राज में रुपए रख दिए। उसके जाते ही सीबीआई की टीम ने दबिश देते हुए ड्राॅज से रुपए बरामद कर दिए। पूछताछ के बाद देर रात तक सीबीआई ने होशंगाबाद रोड स्थित खंडेलवाल के दो मकानों और ससुराल में दबिश दी।
इसके अलावा सक्सेना के भी मकान और ऑफिस में पुलिस ने तलाशी ली। टीम ने मौके से 2 लाख रुपए के अलावा खंडेलवाल का लेपटॉप भी जब्त किया। दोपहर बाद सीबीआई ने खंडेलवाल को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पांच दिन की रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया गया है।
लोकायुक्त ने अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग के बाबू को 10 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथों दबोचा

मुरैना/मध्यप्रदेश।
मुरैना में लोकायुक्त ने 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते बाबू को रंगे हाथों दबोचा है। बाबू जगदीश चन्द्र वर्मा-सहायक ग्रेड -3 पुरानी कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित अनुसूचित जाति जनजाति विभाग में पदस्थ है। फरियादी ने बताया कि बाबू ने उससे पंप कनेक्शन के लिए ट्रांसफार्मर रखवाने के एवज में 15 हजार रुपए मांगे थे। पहली किश्त के 10 हजार रुपए देते समय उसने लोकायुक्त से उसे पकड़वा दिया। घटना गुरुवार की है।
जैसे ही बाबू के पकड़ने की सूचना कार्यालय में पहुंची सभी बाबू व कर्मचारी इधर-उधर हो लिए। यह कार्यवाही ग्वालियर लोकायुक्त (Gwalior lokayukta) पुलिस ने मुरैना स्थित कार्यालय जिला संयोजक, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग में की
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,फरियादी सुरेश जाटव पुत्र गनपत जाटव, निवासी, कैमपुरा, सबलगढ़ ने बताया कि इस कार्यालय में बिना रिश्वत के कोई काम होता ही नहीं है। जिस बाबू जगदीश चन्द्र वर्मा को उसने पकड़वाया है वह बस्ती-बस्ती विकास पंप में ऊर्जाकरण का काम देखता था। फरियादी ने बताया कि उसके पास कुल ढाई बीघे जमीन है।
वह अपनी जमीन पर पंप कनेक्शन के लिए दो बिजली के खंबे व एक छोटे ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए बाबू के पास आया था, क्योंकि शासन की एक योजना में उसका नाम आ गया था। इस पर बाबू ने कहा कि आवेदन भले ही दे जाओ, लेकिन बिना पैसे के काम नहीं होगा। इस पर जब उसने कहा कि कितने पैसे लगेंगे, तो बाबू ने 15 हजार रुपए की राशि की मांग की थी।
फरियादी सुरेश जाटव ने बताया कि बाबू द्वारा पैसे मांगे जाने के बाद वह 18 अप्रैल को ग्वालियर स्थित लोकायुक्त एसपी के कार्यालय में पहुंचा। वहां बाबू की करतूत बताई। इस पर लोकायुक्त ने उसके साथ टीम भेजी। इस मौके पर लोकायुक्त के डीएसपी प्रद्युम्न सारस्वत व अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।
रिश्वत या भ्रष्टाचार के खिलाफ यहां कर सकते हैं शिकायत
रिश्वत मांगने या सरकारी काम में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ आमजन शिकायत कर सकते हैं। यह शिकायत लोकायुक्त, अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से की जा सकती है। हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ऐसे मामलों में शिकायत के लिए एक मोबाइल नंबर जारी करने की घोषणा की है। इस पर कोई भी प्रमाण सहित शिकायत कर सकता है। वहीं, सीबीआइ के पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की जा सकती है। इसके लिए समय-समय पर सीबीआइ मोबाइल पर मैसेज भी भेजती है।
भ्रष्टाचार का मामला है और लोकायुक्त से शिकायत कर रहे हैं, तो शपथ पत्र देना जरूरी है। रिश्वत मांगने का मामला है, तो आडियो व वीडियो सहित अन्य प्रमाण दिए जा सकते हैं। यही प्रक्रिया ईओडब्ल्यू के लिए है। शिकायत कार्यालय में जाकर करनी होती है।
