बता दें कि केबी वर्मा सीहोर स्वास्थय विभाग में स्टोर कीपर के पद पर लंबे समय तक पदस्थ रहे हैं। अभी वर्तमान में उनकी पदस्थापना बैतूल है बताया गया है। ईओडब्लूय की यह कार्रवाई सीहोर और बैतूल दोनों जगहों पर चल रही है। उम्मीद है कि और संपत्ति के बारे में ईओडबल्यू को और जानकारी मिलेगी।
सीहोर/बैतूल/मप्र।
मध्यप्रदेश में ईओडब्ल्यू (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जहां EOW भोपाल द्वारा मंगलवार को सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ स्टोर इंचार्ज (Store Incharge) के यहां दबिश दी है।
शहर की पाश काॅलोनी दांगी स्टेट में रहने वाले स्वास्थ्य विभाग के स्टोर कीपर केबी वर्मा के घर मंगलवार काे आर्थिक अपराध इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो EOW ने दबिश दी। एक टीम घर पर कार्रवाई में जुटी है। सूत्र बताते हैं कि रेड आय से अधिक संपत्ति को लेकर डाली गई है। EOW के एसपी राजेश मिश्रा ने बताया कि टीम ने दोनों स्थानों पर एक साथ कार्रवाई है। दबिश में करीब 45 लाख रुपए नकदी और 9 लाख रुपए के आभूषण मिले हैं। 22 लाख खाते में मिले है। 23 एलआईसी की पॉलिसियां और जमीन के दस्तावेज भी मिले है। स्टोर कीपर के पद पर पदस्थ लिपिक को 30 से 35 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है।
सीहोर में स्वास्थ्य विभाग में रह चुके स्टोर कीपर केबी वर्मा अभी बैतूल में पदस्थ हैं। दोपहर में EOW की टीम दांगी स्टेट में उनके घर पहुंची। सूत्रों की माने तो टीम को घर से करीब 45 लाख रुपए नकदी के साथ सोने-चांदी के आभूषण और कुछ पॉलिसियां मिली हैं। बता दें कि वर्मा सीहोर स्वास्थ्य विभाग में स्टोर कीपर के पद पर लंबे समय तक पदस्थ रहे। बताया जा रहा है कि दोनों जगह पर टीम कार्रवाई कर रही है।
बैतूल में भी EOW का छापा

बैतूल में भी सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ स्टोर कीपर कृष्ण वल्लभ वर्मा के आवास पर ईओडब्ल्यू की दबिश से बैतूल स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मंगलवार सुबह भोपाल से टीम बैतूल पहुंची थी। यहां वर्मा के घर से उन्हें कुछ नकदी मिली। जांच के बाद टीम वर्मा को लेकर सीहोर रवाना हो गई। सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी ने बताया कि सीहोर के किसी मामले में शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू द्वारा स्टोर कीपर वर्मा के आवास पर कार्रवाई की गई है।
उन्हें ईओडब्ल्यूडी की टीम साथ लेकर गई है। अभी तक उन्हें भी अधिकृत रूप से कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन ईओडब्ल्यू की टीम पर उनके आवास पर छापा मारने और उन्हें ले जाने की सूचना मिली है। वर्मा सीएमएचओ कार्यालय के स्टोर में तैनात थे। उन्हें जिला अस्पताल के स्टोर का प्रभार दिया गया था। लेकिन फिलहाल वे विभागीय परचेसिंग (खरीद) का कार्य देख रहे थे।
