बता दें कि ये पहला मौका है जब EOW ने एक ही दिन में दो बड़ी कार्यवाही की है आज सुबह EOW ने पंचायत सचिव रोशन सिंह गुर्जर के ग्वालियर और भिंड स्थित घरों पर छापामार कार्यवाही की है जिसमें बेहिसाब संपत्ति मिली है। EOW की कार्यवाही के बाद से रिश्वतखोर कर्मचारियों अधिकारियों में दशहत का माहौल है।
ग्वालियर/मध्यप्रदेश।
ग्वालियर ईओडब्ल्यू ने आज दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुये रिश्वतखोर फर्म एंड सोसायटी के सहायक रजिस्ट्रार
भगवान दास कुबेर (BD Kuber) काे 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इससे पहले ईओडब्ल्यू ने आज सुबह सवेरे पंचायत सचिव के यहां छापामार कर भारी मात्रा में संपत्ति पकड़ी है। यह पहला मौका है जब ईओडब्ल्यू ने एक के बाद एक दो कार्रवाईयां की है इससे रिश्वतखोर कर्मचारियों में दहशत का माहौल है।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,फरियादी हेमंत उपाध्याय निजी रूप से फर्म एंड साेसायटी रजिस्टर्ड कराने का काम करते हैं। इन दिनाें वह सराफा बाजार व्यवसायी संघ की समिति के रिन्यूअल का काम संभाल रहे हैं। इसी सिलसिले में एक डेढ़ माह पहले उनकी सहायक पंजीयक भगवान दास कुबेर से मुलाकात हुई थी। इस दाैरान सहायक पंजीयक ने उनसे रिन्युअल की ऐवज में 25 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में समझाैता बीस हजार रुपये पर हुआ था। इसके बाद बीते राेज हेमंत पांच हजार रुपये लेकर बैजाताल स्थित फर्म एंड साेसायटी रजिस्टर्ड कार्यालय पहुंचे थे। यहां पर सहायक पंजीयक कुबेर ने पैसे लेने से इंकार करते हुए कहा कि बीस हजार से कम में काम नहीं हाेगा। इसके बाद फरियादी ने ईओडब्ल्यू में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई। ईओडब्ल्यू ने बीस हजार रुपये लेकर आज हेमंत काे फिर भगवान दास कुबेर के पास भेजा था। हेमंत ने फर्म एंड साेसायटी रजिस्टर्ड कार्यालय में पहुंचकर सहायक पंजीयक कुबेर के बीस हजार रुपये दिए, जिसे उसने सामने रखी फाइल के अंदर रख लिए। इसी दाैरान ईओडब्ल्यू टीआइ यशवंत गाेयल अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और सहायक पंजीयक काे रंगे हाथाें गिरफ्तार कर लिया गया।
इनका कहना
EOW के TI यशवंत गोयल ने बताया कि हेमंत की शिकायत की जांच की गई। शिकायत पुख्ता होने के बाद EOW ने इस मामले को सही पाया और बुधवार दोपहर ट्रैप की कार्रवाई की। हेमंत उपाध्याय ने जैसे ही दफ्तर में जाकर असिस्टेंट रजिस्ट्रार भगवानदास कुबेर के हाथ में 20 हज़ार रुपए थमाए, वैसे ही पहले से मौजूद EOW की टीम ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी।
