बता दें कि इस चर्चित और संगीन हत्याकांड को देखते हुए पुलिस ने न्यायालय में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। आजीवन कारावास से दंडित आरोपी कल्याण सिंह यादव भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं वे ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
ग्वालियर/मध्यप्रदेश……………
मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर के बहुचर्चित रामप्रकाश यादव व उसके बेटे अजीत यादव हत्याकांड के आरोपी भाजपा नेता कल्याण सिंह यादव, गजेन्द्र सिंह यादव, अजीत यादव व विनोद माहौर को अदालत ने दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर डेढ-डेढ हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया है। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने इस मामले में छह आरोपियों को आरोप प्रमाणित नहीं होने पर दोषमुक्त कर दिया। जबकि इस मामले में एक आरोपी हरकेश यादव फरार है तथा तीन आरोपियों के खिलाफ इसी मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर अलग-अलग ट्रायल चल रही है।
क्या था पूरा मामला……………..
प्राप्त जानकारी के अनुसार,आरोपियों ने 6 फरवरी को सचिन तेंदुलकर मार्ग पर पिता-पुत्र की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में कुल पन्द्रह आरोपी बनाए गए थे। इन आरोपियों में से एक आरोपी मनोज यादव की मौत हो चुकी है। न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने आरोपी गजेन्द्र, कल्याण, अजीत यादव व विनोद माहौर को दोहरे आजीवन कारावास के अलावा हत्या के प्रयास के अपराध में भी दोषी पाते हुए सात साल व पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक विजय शर्मा एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक एमपी बरुआ ने पैरवी की। प्रकरण की जानकारी देते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक एमपी बरुआ ने बताया कि 6 फरवरी 13 को फरियादी इन्द्रजीत यादव पुत्र स्व रामप्रकाश यादव निवासी ग्राम मोहनपुर मुरार ने मुरार थाने में रिपेार्ट की कि 6 फरवरी 13 को वह अपने पिता रामप्रकाश, भाई अजीत यादव, ताऊ रमेश यादव एवं चचेरे भाई दयानंद यादव के साथ अपनी कार से सोनू यादव निवासी ग्राम बंधौली के भाई की शादी में जीवाजी क्लब गये थे। शादी में शामिल होने के बाद रात को लगभग 10 बजे सभी लोग अपने घर मोहनपुर के लिए रवाना हुए। कुलपति बंगले तिराहे से वे सचिन तेंदुलकर मार्ग पर जा रहे थे कि तभी डीबी सिटी के पास उनके आगे बिना नंबर की सफेद स्विफ्ट कार दिखाई दी। इसी समय किसी गाड़ी ने पीछे से हॉर्न दिया तो उसने सडक की बांयी तरफ गाड़ी कर दी। इसी बीच पीछे वाली गाड़ी तेजी से आगे आयी और उसमें से किसी ने अचानक गाड़ी पर फायर करना शुरु कर दिए। फरियादी ने अपनी गाड़ी सडक़ की बांयी तरफ उतार दी। आगे वाली कार से भी उतरकर सभी लोगफायर करने लगे। वह गाड़ी का गेट खोलकर दीवार कूंदकर छिप गया और देखा कि एक सफेद रंग की कार में आरोपी गजेन्द्र यादव 315 बोर की बंदूक लेकर, मनोज यादव 12 बोर की बंदूक लेकर व अजीत यादव व अजय यादव उसी गाड़ी की ओर फायरिंग कर रहे थे। पीछे की कार में आए लोग भी फायरिंग करने लगे थे। इन आरोपियों में कल्याण सिंह व चन्द्रप्रकाश यादव आदि शामिल थे।
दशकों पुरानी है खानदानी दुश्मनी,हो चुकी हैं कई मौतें………….
भाजपा नेता कल्याण सिंह यादव
दरअसल 1995 में गजेंद्र यादव के पिता की रामप्रकाश यादव ने हत्या कर दी थी तभी से दोनों पक्षों में दुश्मनी दोनों गुटों से चली आ रही थी रामप्रकाश यादव को 2003 में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया था बाद में जमानत पर वह जेल से बाहर आया था। पुलिस के मुताबिक ग्वालियर के ग्राम मोहनपुर के रहने वाले राम प्रकाश और कल्याण सिंह के परिवारों में यह दुश्मनी ढाई दशक पुरानी है जिसमें अभी तक आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। इस चर्चित और संगीन हत्याकांड को देखते हुए पुलिस ने न्यायालय में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। यहाँ बता दे कि आजीवन कारावास से दंडित आरोपी कल्याण सिंह यादव भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं वे ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
घटनास्थल से ये हथियार हुए थे बरामद…………….
घटनास्थल से एक रिवाल्वर 32 बोर की, एक 315 बोर की बंदूक, दो 32 बोर रिवाल्वर, 30 जिंदा राउंड, 11 जिंदा राउंड 315 बोर के बरामद किए गए थे।
तीन आरोपी है फरार……………….
इस मामले में एक आरोपी हरकेश पुत्र कुंअरजीत यादव उम्र 23 साल ग्राम नगरामई मैनपुरी उत्तरप्रदेश, गुड्डन उर्फ मंगल, बल्लू यादव को अदालत ने फरार घोषित किया है। तीनों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं।
साक्ष्यों के अभाव में ये बरी………………
रज्जाक खान निवासी, आरिफ खान, वासित खान सभी निवासी मेवाती मोहल्ला, भूरा यादव पुत्र अशोक यादव ग्राम मोहनपुर, इंदर यादव उर्फ दाउ निवासी झांसी तथा घनश्याम शामिल है।
तीन के खिलाफ अलग-अलग ट्रायल…………….
इस मामले में तीन अन्य आरोपी अक्की यादव पुत्र बहादुर सिंह यादव निवासी मोहरपुर, अजय यादव निवासी पिंटोपार्क गोला का मंदिर तथा एक अन्य आरोपी के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेश से इसी हत्याकांड में अलग-अलग ट्रायल चलाई जा रही है।
अदालत में भारी सुरक्षा व्यवस्था………………
न्यायालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में आरोपियों को जेल ले जाती पुलिस
रामप्रकाश हत्याकांड में फैसले की तारीख तय होने के बाद पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों पर नजर रखते हुए शनिवार को अदालत में सुरक्षा के कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे। अदालत में प्रवेश के लिए बनें छह प्रवेश द्वारों में से केवल दो द्वार ही आने-जाने के लिए खोले गए थे यहां सशस्त्र जवानों के अलावा जिस कोर्ट में फैसला होना था वहां भी भारी बल तैनात था। अदालत में आने वालों को तलाशी के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था। इंदरगंज थाने पर वज्र को भी तैनात किया गया था।
