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किसान गोलीकांड के बाद आज पहली बार मंदसौर आये PM,कैसे किसान आंदोलन बना था गोलीकांड

बता दें कि आंदोलन में किसान इतने हिंसक हो गए कि सरकार को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। आंदोलन में करीब छह लोगों की जान चली गई थी। हिंसा के बाद बिगड़े हालात के बाद प्रदेश में शांति स्थापित करने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उपवास किया। दरअसल मालवा निमाड़ की 65 सीटें जो एमपी की सत्ता का दरवाज़ा हैं।



मंदसौर/मध्यप्रदेश………….


मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन की वजह से राजनीतिक केंद्र बने मंदसौर में आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने जा रहे हैं। वो यहां क्या संदेश देते हैं इस पर सबकी नजर है यहां पर राहुल गांधी और शिवराज सिंह चौहान पहले ही जा चुके हैं। पीएम की मंदसौर रैली पर कांग्रेस ने पूछा है 'जब किसानों पर गोली चली थी, उस वक्त प्रधानमंत्री मोदी कहां थे। प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो प्रोग्राम 'मन की बात' तक में इसका जिक्र नहीं किया था। ऐसे में अब वो मंदसौर किस हक से वोट मांगने आ रहे हैं। फिलहाल, सियासी विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी मौसम में पीएम मंदसौर जाकर यह बताना चाहते हैं कि उनकी पार्टी और वो किसान विरोधी नहीं हैं। यह वही मंदसौर है जहां मध्य प्रदेश का बहुचर्चित गोलीकांड हुआ था।

6 जून 2017 को मंदसौर में हुए किसानों के हिंसक प्रदर्शन में शिवराज सरकार बैकफुट पर आ गई थी। किसी ने नहीं सोचा था कि मध्यप्रदेश में एसएमएस और सोशल मीडिया से शुरू हुआ किसान आंदोलन इतना खतरनाक रूप ले लेगा।

इस दौरान आंदोलनकारियों ने बैंकों, पुलिस चौकी और ट्रेन को अपना निशाना बनाया। जली हुई पुलिस चौकी, उपद्रवियों के निशाना बने बस और बेबस पुलिस के मुरझाए चेहरे इस आग को साफ बयां कर रहे थे। किसानों ने देवास में हाट पिपलिया थाने पर धावा बोल दिया और जब्ती के वाहनों को आग लगा दी। उन्होंने भोपाल-इंदौर के बीच चलने वाली दो बसों सहित 10 से अधिक वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया मंदसौर के कयामपुर में किसानों ने तीन बैंकों युको, जिला सहकारी बैंक और कृषक सेवा सहकारी समिति की शाखाओं में आग लगा दी।


कलेक्टर को भी करना पड़ा किसानों के आक्रोश का सामना…………



आंदोलनकारियों ने बैंकों, कारखाने और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। किसानों को समझाने गए तत्कालीन जिलाधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह को भी उनके गुस्से का सामना करना पड़ा। मंदसौर शहर और पिपलिया मंडी में कर्फ्यू लगाना पड़ा गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिजनों और किसानों ने बरखेड़ा पंत पर चक्काजाम कर दिया। गोलीबारी में मारे गए छात्र अभिषेक पाटीदार के शव को सड़क पर रखकर किसानों ने प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने मृतक किसानों को शहीद का दर्जा देने की मांग की थी।


सरकार ने गोलीकांड की जाँच के लिए जैन आयोग का गठन किया………..



आंदोलन के बाद पूरे देश खूब हंगामा मचा मध्य प्रदेश सरकार ने आंदोलन की जांच के लिए जैन आयोग का गठन किया और एक साल बाद भी ये नहीं पता कि किसानों पर गोली किसने चलाई न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट का हर किसान को इंतज़ार है। इन परिवारों को इंसाफ की किरण एक साल पहले दिखाई थी। 12 जून 2017 को शिवराज सरकार ने एक सदस्यीय जैन आयोग का गठन कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। न्यायिक आयोग को पता करना था कि पुलिस फ़ायरिंग सही थी या नहीं यदि नहीं तो फिर फ़ायरिंग के लिए गुनहगार कौन है। इसके बाद जैन आयोग का कार्यकाल बढ़ता रहा पीड़ित किसानों के परिवार ही नहीं तारीख़ भी रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है। अंततः जैन आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी और इसमें सीआरपीएफ के जवानों को क्लीन चिट दे दी गई।


इनकी मौत के बाद मचा हंगामा…………



अभिषेक पाटीदार (22)

कन्हैयालाल पाटीदार (40)

चैनराम पाटीदार (40)

पूनमचंद उर्फ बब्लू पाटीदार (32)

सत्यनारायण धनगर (40)

घनश्याम धाकड़ (28)


इसके बाद छह जून को मंदसौर जिले के पिपल्यामंडी में भारी हिंसा हुई। एक हजार से ज्यादा लोगों ने फोरलेन पर चक्काजाम किया। पुलिस ने खदेड़ने की कोशिश की तो हालात बेकाबू हो गए। उग्र भीड़ ने 25 ट्रकों को आग के हवाले कर दिया पुलिस ने काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े तो किसान खेतों में फैल गए और पुलिस को घेरकर पथराव शुरू कर दिया इस दौरान फायरिंग में छह लोगों की मौत हुई।

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