भोपाल/मध्यप्रदेश………….
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, नामांकन भरने के बाद हर राजनीतिक दल को अपने प्रत्याशी के चुनाव क्षेत्र में तीन बार मीडिया में इश्तेहार देना होगा। यह इश्तेहार प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या दोनों में देना होगा। इश्तेहार उस क्षेत्र के क्षेत्रिए मीडिया में देना होगा। इश्तेहार में बताना होगा कि उस प्रत्याशी के खिलाफ कितने आपराधिक मामले लंबित हैं। इसके अलावा हर राजनीतिक दल अपने वेबसाइट पर ये पोस्ट करेंगे कि उनके कौन-कौन से प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उन पर आरोप क्या है।
230 में से 108 विधायक पर मामले दर्ज…………
मध्यप्रदेश के 230 में से 108 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मंत्री जयभान सिंह पवैया के खिलाफ सबसे गंभीर डकैती एवं सरकारी कर्मचारी से मारपीट और धार्मिक वैमनस्यता फैलाने का केस दर्ज हैं। जबकि पिछोर विधायक एवं पूर्व मंत्री केपी सिंह के खिलाफ भी डकैती का मामला दर्ज है। ज्यादातर विधायकों के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों से मारपीट के मामले दर्ज हैं। मप्र इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के 28 और कांग्रेस के 12 विधायकों पर गंभीर मामले दर्ज हैं। गंभीर मामलों से आशय पांच साल या उससे अधिक सजा पाने वाले अपराध। गैर जमानती अपराध। सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना। हत्या, अपहरण, ज्यादती से संबंधित अपराध। महिलाओं पर अत्याचार से संबंधित अपराध। बसपा के एक और दो निर्दलीय विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। भाजपा से नरसिंहपुर विधायक व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल पर हमला, धमकी, आगजनी आदि के मामले दर्ज हैं। इनके अलावा अनेक विधायकों पर सरकारी कर्मचारियों से मारपीट, सरकारी काम में बाधा, धमकी, मारपीट आदि के प्रकरण पंजीबद्ध हैं।
8 मंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं मामले…………..
आपराधिक मामले मप्र सरकार के 8 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने 2013 में अपने शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया है। इन मंत्रियों में विश्वास सारंग, जालम सिंह पटेल, लाल सिंह आर्य, संजय सत्येंद्र पाठक, राजेंद्र शुक्ला, जयभान सिंह पवैया, हर्ष सिंह शामिल हैं।
