भोपाल/मध्यप्रदेश…….
चुनावी सरगर्मियों को देखते हुए मध्यप्रदेश के दोनों प्रमुख दलों ने कमर कश ली है। कोई भी चुनाव जीतने में कोई कसर छोड़ना नही चाहता क्योंकि मध्यप्रदेश 2018 के चुनाव में इस बार मुकाबला बड़ा दिलचस्प होगा। भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए युवाओं से ज्यादा अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताया है। 2018 के चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने समितियों का ऐलान कर दिया है। चुनाव के मद्देनजर अहम रोल अदा करने वाली समितियों में दिग्गजों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस में समितियों के ऐलान के बाद भाजपा ने भी इस बार उन चेहरों को समितियों में शामिल किया है जो कि कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी के लिए मजबूत रणनीति तैयार कर सके।
कांग्रेस और बीजेपी की समितियों पर एक नजर……..
कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव प्रचार कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। प्रचार कमेटी में कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, विवेक तन्खा, सज्जन सिंह वर्मा, अर्चना जायसवाल, इंद्रजीत पटेल, मुकेश नायक को शामिल किया गया है। तो वहीं बीजेपी ने चुनाव प्रबंध समिति का जिम्मा नरेंद्र सिंह तोमर जैसे सरीखे नेता को देकर अपनी तैयारी को मजबूत बताने का काम किया है।
कांग्रेस में समन्वय समिति की कमान दिग्विजय सिंह के पास है तो, भाजपा में राजनैतिक समन्वय समिति का जिम्मा मंत्री नरोत्तम मिश्रा को मिला है। नरोत्तम मिश्रा बीते चुनाव में कांग्रेसी खेमे के अहम चेहरों को पार्टी में लाकर खलबली मचा चुके है। इस बार भी दिग्विजय के मुकाबले नरोत्तम को समन्वय का जिम्मा देकर पार्टी ने अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
कांग्रेस ने सुरेश पचौरी को चुनाव योजना और रणनीति कमेटी का चैयरमेन बनाया है। इसके जवाब में बीजेपी ने गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह को चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने का जिम्मा सौपा है।
कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र समिति की जिम्मेंदारी विधानसभा डिप्टी स्पीकर राजेंद्र सिंह को सौंपी है, तो वहीं बीजेपी ने चुनाव घोषणा पत्र समिति में पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा, रघुनंदन शर्मा और प्रहलाद पटेल को अहम जिम्मेदारी सौंपकर आम आदमी से जुड़े विषयों पर मंथन का काम सौंपा है।
कांग्रेस ने हजारीलाल रघुवंशी को अनुशासन समिति का चैयरमेन बनाया है, वहीं बीजेपी ने चुनाव कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति का गठन कर विजेन्द्र सिंह सिसोदिया, सांसद आलोक संजर को जिम्मा सौंपा है।
कांग्रेस में मीडिया संवाद कमेटी की कमान माणक अग्रवाल को दी है, तो बीजेपी में प्रचार प्रसार और साहित्य निर्माण समिति का गठन कर विजेश लूनावत और महापौर आलोक शर्मा को अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
बहरहाल, बीजेपी ने साल 2013 के विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी नेता नंदकुमार सिंह चौहान, कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर, सरताज सिंह, अनूप मिश्रा को इस बार इन समितियों में कोई स्थान नही मिला है। मतलब साफ है कि बीजेपी इस बार चुनावी तैयारियों में कहीं कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती है और यही कारण है कि बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार पार्टी ने चुन-चुनकर पार्टी नेता और मंत्रियों को समितियों में जगह दी है।
