“बता दें कि अंचल में 60 से ज्यादा कालेजों में ना तो खुद के भवन ,प्ले ग्राउंड ,प्रयोगशाला और शिक्षकों की नियुक्ति है और ना ही वह यूजीसी के तहत निर्धारित मापदंडो का पालन कर रहे हैं”
ग्वालियर/मध्यप्रदेश……..
कॉलेज संचालक छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर शिक्षा का बाज़ारू करण करने पर आमादा है। सभी नियम कायदों को तांक पर रखकर हर हाल में अपने कॉलेजों की मान्यता बनाये रखने पर जोर दे रहे इसके लिए उन्हें चाहें कोई भी जतन करना पड़े वो करने को तैयार है।
ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित जीवाजी यूनिवर्सिटी में देखने को मिला जहाँ कॉलेज संचालकों द्वारा निरीक्षण दल को कॉलेज की मान्यता बनाये रखने के लिए रिश्वत देने का मामला सामने आया है।
जीवाजी विश्वविद्यालय से अंचल के करीब 400 कालेज जुड़े हुए हैं लेकिन अधिकांश कॉलेजों को 2 साल से समय दिए जाने के बावजूद उन्होंने निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं किया। सुधार की जगह अब इन कॉलेज के प्रबंधकों ने निरीक्षण दल को रिश्वत दे अपने पक्ष में करना चाहा। पर निरीक्षण दल के सदस्य ने दी गई रिश्वत को कुलपति के हवाले कर दिया है। कुलपति का कहना है कि किसी भी कॉलेज संचालक को पैसे के आधार पर मान्यता नहीं दी जाती है। वह अब इस रिश्वत देने के मामले की जांच कराएंगी और अगर कॉलेज संचालकों दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला………
ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में लंबे अरसे बाद कार्य परिषद की बैठक हुई। इस बैठक में 2018-19 की संबद्धता को लेकर विचार-विमर्श कार्य परिषद सदस्यों और विश्वविद्यालय के प्रबंधन ने किया। जिन साठ कॉलेजों की मान्यता को निरीक्षण दल ने रद्द करने की बात कही थी, उस पर कार्य परिषद ने मोहर लगाई है। इन कालेजों में ना तो खुद के भवन,प्ले ग्राउंड,प्रयोगशाला और शिक्षकों की नियुक्ति है और ना ही वह यूजीसी के तहत निर्धारित मापदंडो का पालन कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस बिंदु पर रही जिसमें निरीक्षण दल के एक सदस्य को चार कॉलेज संचालकों ने नगदी से भरे लिफाफे दिए।
