ग्वालियर/मध्यप्रदेश…….
यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे के दो मददगारों को यूपी एसटीएफ 9 जुलाई की रात ग्वालियर से उठा ले गई है। इसका खुलासा शनिवार सुबह उस वक्त हुआ, जब कानपुर एसटीएफ ने इसकी सूचना ग्वालियर पुलिस को दी। यूपी एसटीएफ ने ग्वालियर से एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के दो मददगारों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने ओमप्रकाश और अनिल पांडेय को गिरफ्त में लेकर उत्तर प्रदेश ले गई है। आरोप है कि 2 जुलाई की रात बिकरु में पुलिसकर्मियों की हत्या में नामजद 2 आरोपितों शशिकांत और शिवम को उन्होंने अपने यहां शरण दी थी। विकास के एनकाउंटर के बाद अब पुलिस उसके साथियों को तलाश रही है। विकास के साथियों को शरण देने वाले दो आरोपियों को ग्वालियर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, बड़ा सवाल ये है कि, गैंगस्टर को शरण देने वाले इन दोनो आरोपियों को पकड़ने के लिए यूपी एसटीएफ बीते दो दिनों से ग्वालियर में डेरा डाले हुए थी, लेकिन ग्वालियर पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
क्या था पूरा मामला……………
प्राप्त जानकारी के अनुसार,कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिकरू गांव में 2-3 जुलाई की रात पुलिस वांटेंड हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए दबिश डालने पहुंची थी। टीम की कमान बिठूर के डीएसपी देवेंद्र मिश्रा संभाल रहे थे। उनके साथ तीन थानों की फोर्स मौजूद थी। इससे पहले कि पुलिस विकास को दबोचती, उसके गैंग ने पुलिस पर धावा बोल दिया। काफी देर तक चली मुठभेड़ में डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, एसओ शिवराजपुर महेंद्र सिंह यादव, चौकी प्रभारी मंधना अनूप कुमार सिंह समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। सभी की गोलियों से छलनी कर और निर्ममता से पीट-पीटकर तथा धारदार हथियारों से हमला कर हत्या की गई थी। मुठभेड़ के बाद विकास दुबे और उसका पूरा गैंग गांव से फरार हो गया।
इसके बाद आठ पुलिसवालों को मारकर अचानक चर्चा में आया कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे को शुक्रवार को कानपुर पुलिस ने उज्जैन से कानपुर ले जाते समय भागने के दौरान मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस कर्मियों की हत्या करने वाली विकास की गैंग के कई गुर्गे कानपुर पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराए हैं और कई अभी फरार हैं जिनकी तलाश अभी जारी है। पुलिस इनके शरण दाताओं को तलाश कर रही है।
ग्वालियर में दो दिन छुपे रहे विकास के गुर्गे………..
उधर कानपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि विकास के कुछ साथी ग्वालियर में छिपे हैं। सूचना की तस्दीक के बाद पुलिस को मालूम चला कि विकास का साथी शशिकांत पांडे उर्फ़ सोनू और शिवम दुबे ग्वालियर में छिपे हैं। पुलिस ने जब मुखबिर दौड़ाये तो उसे पता चला कि ग्वालियर के भगत सिंह नगर में रहने वाले ओमप्रकाश पांडे और सागर ताल के पास बनी सरकारी मल्टी निवासी अनिल पांडे ने अपने यहाँ दो दिन शरण दी। सूचना पक्की होने के बाद कानपुर पुलिस गुरुवार को ग्वालियर आई और ओमप्रकाश पांडे और अनिल पांडे को अपराधियों को शरण देने की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया।
परिवार ने कहा हमारा कोई संबंध नही है………….

ओमप्रकाश की पत्नी ने बताया कि उनके पति ओमप्रकाश यहां एक कारखाने में नौकरी करते हैं। 9 जुलाई की शाम करीब 6.30 बजे यूपी एसटीएफ आई और पति और बेटे अनिल को अपने साथ ले गई। ओमप्रकाश की पत्नी और बेटी ने कहा कि उनके परिवार का शशिकांत पांडे से काई संबंध नहीं है। शशिकांत कभी नहीं आए और न ही हम उनके घर गए। हमारी पैतृक संपत्ति जरूर एक साथ है। इसलिए ओमप्रकाश जरूर कभी-कभार बिकरु जाया करते थे। ओमप्रकाश की पत्नी ने बताया कि जेठ प्रेम प्रकाश एनकाउंटर में मारे गए हैं, जबकि भतीजा शशिकांत फरार है। पुलिस को संदेह है कि वो यहां आया था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
इसके पहले 10 साल पहले भी विकास की गिरफ्तारी हुई थी…………
इस मामले में अभी ग्वालियर पुलिस ने किसी तरह की जानकारी नहीं है। सूत्रों का कहना है कि कानपुर पुलिस से अभी सिर्फ इतनी ही जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि विकास का ग्वालियर में ओमप्रकाश और अनिल के यहां आता रहता था। विकास को उत्तर प्रदेश की पुलिस करीब 10 साल पहले भी ग्वालियर से गिरफ्तार कर ले गई थी।
21 नामजद में से 12 अभी भी फरार………….
अब तक विकास के करीबी प्रभात, बऊआ, अमर दुबे, प्रेम प्रकाश पांडे, अतुल दुबे का एनकाउंटर हो चुका है। नामजद में 21 आरोपियों में से 12 अभी भी फरार हैं। वहीं, चौबेपुर के एसओ रहे विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा समेत 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इनका कहना…………….
एडीजीपी एवं ग्वालियर आईजी राजाबाबू सिंह ने गिरफ्तारी की तस्दीक करते हुए बताया कि कानपुर पुलिस ग्वालियर आई थी और दोनों आरोपियों को पकड़कर ले गई है और उन्हें जेल भेज दिया है।
