ओरछा/टीकमगढ़……….

रामराजा सरकार का मुख्य द्वार……..
आज देश में रामनवमी की धूम है इस अवसर पर भगवान श्री राम की ऐसी राजधानी के बारे में बताने जा रहे है जहां आज भी भगवान श्रीराम का राज चलता है।
सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक भगवान का दरबार लगता है और पूरी दुनिया से भगवान के भक्त यहां उनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पुलिस जवानों द्वारा दिन में 5 बार गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है………
मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्रीराम की सत्ता कायम है
यहां रामनवमी पर राजा के दर्शन के लिए पूरे देश से लोग आते हैं।
बुन्दलेखण्ड के ओरछा में जिसको दूसरी अयोध्या के नाम से भी जाना जाता है यहां भगवान श्री राम का ही राज चलता है।
यहां के राजा श्री रामराजा ही हैं और पूरे राजश्री ठाठ- बाट से प्रभू श्री राम का दरबार लगता है
नजारा और भी भव्य लगता है जव आरती केसमय प्रभु श्री राम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है
पुलिस जवान द्वारा दिन में पांच बार राजा को सलामी दी जाती है
भगवान श्री रामराजा सरकार के इस दरवार में रोज हजारों की संख्या में देशी विदेशी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
साल में दो बड़े आयोजन होतें है……….
साल में दो बड़े आयोजन होते हैं रामनवमी और विवाह पंचमी जिसकी तैयारियां कई दिनों से चलने लगती हैं रामनवमी पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में भक्त पहंचते हैं, और गर्भगृह में आकर भगवान भक्तों को दर्शन देते हैं।
सके अलावा यहां भगवान श्री राम का विवाह भी बड़ी धूमधाम से मानाया जाता है। इसके लिए पांच दिनों पहले से ही तैयारिया शुरु हो जाती हैं नगर में धूमधाम से बारात निकाली जाती है, जिसमें विदेशो से भी श्रद्धालु आकर शामिल होते हैं।
रामराजा सरकार का इतिहास………
बताया जाता है कि संवत 1632 ईस्वी में ओरछा की महारानी गणेश कुंअर अयोध्या से पुख्य नक्षत्र में पैदल अपनी गोद में श्री राम को ओरछा लेकर आईं और यहां लाकर उनका राज्यअभिषेक किया तब से लेकर यहा के राजा श्री राम ही हैं और आज भी यहां इन्ही की सत्ता कायम है।
राजा दशरथ अपने पुत्र का राज्याभिषेक करना चाहते थे लेकिन बनवास के कारण ऐसा ना हो पाया और इस वियोग में उन्होंने प्राण त्याग दिए
इसलिए ऐसा माना जाता है कि कलयुग में राजा दशरथ ने ओरछा के राजा मधुकर शाह के रुप में जन्म लिया और रानी कौशल्या ने रानी गणेश कुंअर के रुप में जन्म लिया और अयोध्या से राम को ओरछा लेकर लाई और उनका अपने हाथो से राज्याभिषेक किया तब से लेकर आज तक यहां राम को राजा के रुप में पूजा जाता है।
रानी गणेश कुँअर थी महान रामभक्त……….
ऐसी भी मान्यता है कि ओरछा के राजा मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे और रानी गणेश कुंअर राम भक्त थी
दोनों को अपने आराध्य पर बहुत गर्व था राजा ने एक दिन रानी से कहा कि यदि आप के भगवान के इतना मानती हो तो उन्हे अयोध्या से लेकर आओ राजा के कहने पर रानी भगवान के लाने ओरछा निकल गई
और कई दिनों तक तपस्या भी की लेकिन जब रानी को भगवान श्री राम नही मिले तो तो उन्होने सरजू नदी में अपने प्राण देने की कोशिश की।
रानी जैसे ही सरजू नदी में कूदी तो भगवान श्री राम बालक के रुप में गोद में आ गए, और रानी अपने साथ भगवान राम को पुख्य नंक्षत्र में पैदल चलकर अयोध्या से ओरछा लाईं, जिसके बाद राजा मधुकर शाह राम का राजतिलक किया और सारा राजपाठ राम को सौंप दिया तब से लेकर आज तक यहा श्री रामराजा की ही सरकार चलती है।
