भोपाल/मध्यप्रदेश………
खतरे में 50 पुलिसकर्मियों की जान,किसी बड़े हादसे के इंतजार में शासन–प्रशासन
नामक शीर्षक से No1police.com द्वारा खबर प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद
इस खबर को गंभीरता से लिये जाने के बाद मानव अधिकार आयोग हरकत में आया और डीजीपी भोपाल ऋषि कुमार शुक्ला को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है क्योंकि
मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मी हर रोज़ खुद की ज़िंदगी को खतरे में डालकर नौकरी कर रहे थे
ये खतरा किसी नक्सली या बदमाश का ना होकर उनके दफ्तर में मौजूद था ये सभी पुलिसकर्मी जिस बिल्डिंग में काम करते है वो खतरनाक हालत में पहुंच चुकी है ये मामला सामने आने के बाद मानव अधिकार आयोग ने भी इस पर संज्ञान लिया है।
मानव अधिकार आयोग ने डीजीपी को नोटिस जारी किए……..
मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है वहीं अयोग के संज्ञान के बाद मुख्यालय की प्लानिंग शाखा के अधिकारी जल्द ही पुलिस कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की बात कह रहे हैं।
मानव अधिकार आयोग ने इस मामले में डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है आयोग ने इस मामले में डीजीपी को जर्जर इमारत में काम कर रहे पुलिस कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए है।
क्या था मामला……..
दरअसल, भोपाल में करोड़ों की लागत से बनी पुलिस मुख्यालय की नई बिल्डिंग जिसमें प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी से लेकर तमाम बड़े अधिकारी बैठते हैं लेकिन आज भी पुलिस मुख्यालय की कुछ ब्रांच पुराने भवन से संचालित हो रही हैं इस पुरानी इमारत पर किसी भी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है जिस बिल्डिंग को पीडब्ल्यूडी ने भी बैठने लायक नहीं बताया वहां आज भी डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, हैड कांस्टेबल और कांस्टेबल रैंक के करीब पचास अधिकारी और कर्मचारी बैठकर काम कर रहे हैं।
जर्जर बिल्डिंग में पुलिस विभाग की कई शाखाएँ है संचालित……….
इस जर्जर बिल्डिंग में विशेष शाखा का स्टोर, आरएंडडी शाखा, समुदायिक पुलिसिंग शाखा, डीजीपी का मीटिंग हॉल, पुराना डीजीपी का कैबिन, जहां पर मंगलवार को जनुसनवाई होती है, आरटीआई कार्यालय के साथ कई शाखा के स्टोर रूम है।
हैरत की बात है कि पीडब्ल्यूडी ने भी बिल्डिंग का निरीक्षण कर उसे जर्जर घोषित कर बैठने लायक नहीं बताया था बिल्डिंग के कई हिस्से गिर भी रहे हैं इसके बावजूद इसी बिल्डिंग की पहली मंजिल पर स्टोर रूम के लिए नए निर्माण का काम भी किया गया।
