भोपाल/मध्यप्रदेश……..
अपनी जान दाव पर लगाकर जर्जर भवन में कई दिनों से काम कर रहे पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के जीवन पर खतरे की घंटी बज रही है।
इस खतरे की घंटी की वजह से पुलिस मुख्यालय भोपाल में बैठे करीब पचास पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को जान का खतरा है।
इस पुरानी इमारत पर किसी भी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है जिस बिल्डिंग को पीडब्ल्यूडी ने भी बैठने लायक नहीं बताया वहां आज भी डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, हैड कांस्टेबल और कांस्टेबल रैंक के करीब पचास अधिकारी और कर्मचारी बैठकर काम कर रहे हैं।
दरअसल, पुलिस मुख्यालय की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है और इसी बिल्डिंग में काम कर रहे पचास पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को जान का खतरा है
एक तरफ करोड़ों की लागत से बनी पुलिस मुख्यालय की नई बिल्डिंग जिसमें प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी से लेकर तमाम बड़े अधिकारी बैठते हैं।
लेकिन आज भी पुलिस मुख्यालय की कुछ ब्रांच पुराने भवन से संचालित हो रही हैं।
पीडब्ल्यूडी ने बिल्डिंग को जर्जर घोषित किया………
हैरत की बात है कि पीडब्ल्यूडी ने बिल्डिंग का निरीक्षण कर उसे जर्जर घोषित कर बैठने लायक नहीं बताया है
सोचने की बात ये हैं कि क्या हर बार हादसों से ही सबक
लेना सही है या शासन-प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
बिल्डिंग के कई हिस्से गिर भी रहे हैं
इसके बावजूद इसी बिल्डिंग की पहली मंजिल पर स्टोर रूम के लिए नए निर्माण का काम भी किया गया
इस निर्माण की वजह से बाथरूम का पानी छत के रास्ते दीवारों पर आ रहा है।
जर्जर भवन में पुलिस की कई शाखाएँ संचालित…….
इसी जर्जर बिल्डिंग में विशेष शाखा का स्टोर, आरएंडडी शाखा, समुदायिक पुलिसिंग शाखा, डीजीपी का मीटिंग हॉल, पुराना डीजीपी का कैबिन, जहां पर मंगलवार को जनुसनवाई होती है, आरटीआई कार्यालय के साथ कई शाखा के स्टोर रूम है।
गुप्त सूत्रों से पता लगा है कि इमारत जर्जर होने और उसमें करंट फैलने की शिकायत एडीजी पुरूषोत्तम शर्मा ने प्लानिंग डिपार्टमेंट के जिम्मेदारों से कर चुके हैं, लेकिन बिल्डिंग को शिफ्ट नहीं किया गया।
