बता दें कि एक से नाम प्रदीप सिंह होने के कारण कुछ न्यूज वेबसाइट और सोशल मीडिया यूजर्स से एक गड़बड़ी भी हो गई हरियाणा किसान के बेटे प्रदीप सिंह ने टॉप किया हैं वहीं मध्यप्रदेश के टॉपर प्रदीप सिंह मूलतः बिहार के रहने वाले हैं और वर्तमान में इंदौर में रहते हैं उनके पिताजी पैट्रोल पंप पर काम करतें उनकी 26वीं रैंक आयी है।
नई दिल्ली…….
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 के परिणामों की घोषणा कर दी है। यूपीएससी द्वारा आज 4 अगस्त 2020 को परिणामों के लिए जारी ऑफिशियल नोटिस के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा 2019 में प्रदीप सिंह ने टॉप किया है, उनका रोल नंबर 6303184 है। वहीं, जतिन किशोर (रोल नंबर 0834194) और प्रतिभा वर्मा (रोल नंबर 6417779) ने क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसी के साथ प्रतिभा वर्मा महिला उम्मीदवारों में यूपीएससी 2019 की टॉपर बन गई हैं।
प्रदीप सिंह ने यूपीएससी सिविल सेवा (मेन्स) परीक्षा 2019 में टॉप किया है।
आईआरएस अधिकारी प्रदीप सिंह उन 829 उम्मीदवारों की सूची में सबसे ऊपर हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं के लिए अर्हता प्राप्त की है, जिनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस शामिल हैं। बता दें कि टॉपर AIR1 प्रदीप सिंह का ये चौथा प्रयास था उनकी उम्र 29 साल है, वो सोनीपत में रह रहे हैं। अब उनकी आयुसीमा खत्म होने वाली थी। सोनीपत के प्रदीप सिंह ने साल 2018 में सिविल सेवा परीक्षा दी थी। तब उन्हें 260वीं रैंक हासिल हुई थी। उस समय वे आईआरएस के लिए चुने गए थे। उनकी पहली पोस्टिंग दिल्ली में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर हुई। 2019 में उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) ने यूपीएससी टॉपर प्रदीप सिंह को उनकी कामयाबी पर बधाई दी है. उन्होंने कहा, “हरियाणा के साधारण परिवार के बेटे प्रदीप सिंह ने UPSC की सिविल सेवा परीक्षा टॉप करके न सिर्फ पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है बल्कि ये साबित कर दिया है कि हरियाणा के युवा बहादुरी, प्रतिभा और मेहनत में सदैव सबसे आगे रहे हैं.”
हरियाणा के साधारण परिवार के बेटे प्रदीप सिंह ने #UPSC की सिविल सेवा परीक्षा टॉप करके न सिर्फ पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है बल्कि ये साबित कर दिया है कि हरियाणा के युवा बहादुरी, प्रतिभा और मेहनत में सदैव सबसे आगे रहे हैं।
Congratulations Pradeep.
गौरवशाली। pic.twitter.com/qq8IcBP9kp
— Dushyant Chautala (@Dchautala) August 4, 2020
यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 के परिणामों की घोषणा और वर्ष 2019 के टॉपर्स की लिस्ट अपने ऑफिशियल वेबसाइट, upsc.gov.in पर जारी की है।यूपीएससी 2019 की नियुक्ति के लिए कुल 829 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है, जिसमें 304 जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार हैं. 78 ईडब्ल्यूएस (EWS) के उम्मीदवार, 251 ओबीसी (OBC) के उम्मीदवार, एससी (SC) के 129 उम्मीदवार और एसटी (ST) के 67 उम्मीदवार हैं। इस तरह कुलमिलाकर 829 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है।
मध्यप्रदेश के टॉपर प्रदीप सिंह की कहानी…….
AIR 26 UPSC CSE 2019 pic.twitter.com/AF2aKboNfQ
— Pradeep Singh (@_pradeepsingh_) August 4, 2020
UPSC 2019 में जिस प्रदीप सिंह ने मध्यप्रदेश में टॉप किया क्या उन्हें आप जानते हैं। यह वही प्रदीप सिंह हैं जो 2018 में भी यूपीएससी में 93 रैंक के साथ सफल हुए थे। महज 22 साल की उम्र में ही यह 2018 में ही आईआरएस (IRS) अफसर बन गए। उस समय वे एक नंबर से आईएएस बनने से रह गए थे। खास बात यह है कि उन्होंने दोबारा अपना भाग्य आजमाया और बन गए यूपीएससी 2019 के मध्यप्रदेश के टॉपर। उन्हें देशभर में 26वीं रैंक मिली है। जबकि मध्यप्रदेश में उनकी पहली रैंक आई है।
प्रदीप के संघर्ष की पूरी कहानी…….

सिविल सेवा परीक्षा 2019 के टॉपर प्रदीप सिंह का परिवार इंदौर में रहता है और उनके पिताजी पेट्रोल पंप पर काम करते हैं। मूलतः बिहार के गोपालगंज के रहने वाले प्रदीप सिंह पांच साल के थे जब उनका परिवार इंदौर आकर बस गया था।
यूपीएससी टॉप करने वाले प्रदीप सिंह के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। क्योंकि पिता मनोज सिंह पेट्रोल पंप पर काम करते थे। मां हाउस वाइफ हैं। जबकि प्रदीप का भाई प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। प्रदीप बताते हैं कि उनके दादा ने अंतिम इच्छा जाहिर की थी कि उनका पोता सिविल सर्विसेज में जाकर देश की सेवा करें। प्रदीप ने उनके दादा की अंतिम इच्छा पूरी की है।
प्रदीप सिंह ने यूपीएससी परीक्षा 2018 में भी सफलता हासिल की थी और वे महज 22 साल में ही आईएएस अफसर बन गए थे। फिलहाल वे भारतीय राजस्व सेवा में असिस्टेंट कमिश्नर हैं। टॉपर बनने की ललक और अपने परिवार की स्थिति को देख उन्होंने यूपीएससी 2019 में भी भाग्य आजमाया और इस बार वे टॉपर बन गए। लिस्ट में 26वीं रैंक उन्हें मिल गई।
घर बेचकर भरी थी कोचिंग की फीस……….
जब वे पहली बार आईएएस में सफल हुए थे, उसके पहले परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा खराब थी। इंदौर में स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सर्विसेस की तैयारियां शुरू कर दी थीं। प्रदीप तैयारी के लिए दिल्ली जाना चाहते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति राह में बाधा बन गई थी। ऐसे में पिता को बेटे की कोचिंग के लिए घर भी बेचना पड़ गया। कहते हैं कि परीक्षा के दौरान उनकी मां की तबीयत भी खराब रहने लगी, लेकिन पिता ने इस बात की भनक उन्हें नहीं लगने दी थी।
