बता दें कि सुरेंद्र सिंह बघेल (SS) थाना प्रभारी गोविन्दगढ जिला रीवा को दस हज़ार रुपये एवं आरोपित एएसआई देशराज सिंह परिहार सहायक उप निरीक्षक को 3 हज़ार रुपये रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार के अलग-अलग दो स्थानों पर रंगे हाथ ट्रैप किया है। एक ही मामले में लोकायुक्त पुलिस को दो अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करनी पड़ी है पहली कार्रवाई गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत लेक व्यू होटल में रहने वाले थाना प्रभारी के कमरे में की गई है तो दूसरी कार्रवाई गोविंदगढ़ थाना परिसर में स्थित एएसआई के घर में की गई है कार्रवाई करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपितों को लेकर सर्किट हाउस पहुंची है जहां पर कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपितों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
रीवा/मध्यप्रदेश।
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारियों कर्मचारियों पर लोकायुक्त का शिकंजा जोरदार कसा हुआ है बावजूद इसके घूसखोर अधिकारी रिश्वत लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्य प्रदेश के रीवा जिले से है जहां
लोकायुक्त पुलिस ने रीवा में गोविंदगढ़ थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह बघेल (एसएस बघेल) को 10 हजार और एएसआई देशराज सिंह परिहार को 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
रीवा एसपी नवनीत भसीन ने लोकायुक्त द्वारा ट्रैप हुए गोविंदगढ़ थाना प्रभारी एसएस बघेल और उपनिरीक्षक देशराज सिंह परिहार को निलंबित कर पुलिस लाइन बुला लिया है। एसपी ने कहा है कि दोषी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी को जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं दिया जाएगा।
ट्रेप कार्रवाई डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में निरीक्षक प्रमेंद्र कुमार व निरीक्षक डीएस मरावी ने की है। इस दौरान प्रधान आरक्षक सुरेश कुमार,आरक्षक मनोज मिश्रा,प्रेम सिंह,शैलेंद्र मिश्रा, धर्मेंद्र जायसवाल,सुजीत साकेत,शिवलाल प्रजापति,विजय पाण्डेय,मो. शाहिद खान सहित 15 सदस्यीय दल मौजूद रहा है। लोकायुक्त टीम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई जारी रखी है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,लोकायुक्त एसपी गोपाल सिंह धाकड़ ने बताया कि गोविंदगढ़ थाना प्रभारी एसएस बघेल व एएसआई देशराज सिंह की शिकायत आई थी। तब अश्विनी मिश्रा पुत्र रमाकांत निवासी अमिलकी का कहना था कि आर्म्स एक्ट के प्रकरण से नाम हटाने के एवज में 13 हजार की रकम मांगी जा रही थी।
पैसे न देने पर 12 सितंबर को पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 329/21 धारा 308, 193, 182, 109, 120 बी आईपीसी एवं 25(1-B)(A), 27 आर्म्स एक्ट के प्रकरण में आरोपी बनाया जा रहा था। जबकि 13 हजार रिश्वत देने पर शिकायतकर्ता का नाम हटाए जाने की बात कही जा रही थी।
दरअसल,गोविंदगढ़ थाना अंतर्गत खंधों मंदिर में कट्टे से फायर होने व अमिलकी रेलवे पुल के पास लूट की झूठी कहानी को रफा-दफा करने के एवज में 13 हजार रुपए की रकम मांगी थी। पैसे न देने पर जांच अधिकारी दबाव बना रहे थे।
ऐसे में पीड़ित लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर शिकायत की। एसपी ने गोपनीय जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। ऐसे में 10 नवंबर को ट्रैपिंग का दिन नियत किया गया। जैसे ही दोनों ने थाना परिसर में 13 हजार की रकम ली। वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथ दबोच लिया। लोकायुक्त टीम ने केमिकल युक्त पानी से हाथ धुलवाया तो दोनों के हाथ लाल हो गए। थाना परिसर में
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद थाना परिसर में हड़कंप मच गया।
इनका कहना
शिकायत प्राप्त हुई थी जिसके बाद कार्रवाई की गई है उक्त कार्रवाई में थाना प्रभारी गोविंदगढ़ सहित एक अन्य कर्मचारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत कर मामले को विवेचना में लिया गया है।
–गोपाल धाकड़, एसपी लोकायुक्त रीवा।
