बता दें कि सफाई कर्मी लक्ष्मण ने दरोगा अशोक द्वारा रिश्वत मांगने की लोकायुक्त को शिकायत की थी। लक्ष्मण का दो माह का वेतन जारी करने के एवज़ दरोगा अशोक 5 हज़ार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक 6 पर जब वह रिश्वत की ले रहा था तब उसे रंगे हाथों किया गिरफ्तार कर लिया गया। लोकायुक्त पुलिस ने बताया कि दरोगा अशोक ने रिश्वत मांगी थी, जब इसकी पुष्टि हुई तो कार्रवाई की गई।
ग्वालियर/मध्यप्रदेश।
ग्वालियर नगर निगम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी चल रही है। अतिरिक्त कमाई के लालच में किसी को भी नहीं बख्श रहे। हालात ये हैं कि कुछ निगम कर्मचारी अधिकारी अपने ही लोगों से छोटे-मोटे या जरूरी कामों के लिए भी रिश्वत मांग रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला तब उजागर हुआ जब नगर निगम के एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड लिया गया।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर निगम में पदस्थ दरोगा अशोक को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने ट्रैप किया है।
लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक आवेदक नगर निगम कर्मचारी लक्ष्मण खरे ने शिकायत की थी कि नगर निगम का चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर (सफाई दरोगा) अशोक धवल उनका वेतन निकालने में परेशान कर रहा है और रिश्वत मांग रहा है। आवेदक के मुताबिक उसके करीब 60 हजार रुपये फंसे हुए है जिसको निकालने के लिए अशोक धवल 10 प्रतिशत रिश्वत मांग रहा है लेकिन सौदा 5 हज़ार रुपये में तय हो गया।
आज गुरुवार को सुबह लक्ष्मण खरे ने अशोक धवल को पड़ाव स्थित डफरिन सराय नगर निगम स्टाफ क्वार्टर के पास बुलाया और रिश्वत के 5 हज़ार रुपये दिये पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
नगर निगम के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर को ट्रेप करने के बाद लोकायुक्त टीम उसे अपने ऑफिस ले गई। जहाँ उससे पूछताछ जारी है। डीएसपी प्रद्युम्न पाराशर के नेतृत्व में अशोक धवल को ट्रेप करने की कार्रवाई करने वाली टीम में इंस्पेक्टर आराधना डेविस, इंस्पेक्टर राघवेंद्र ऋशिश्वर, इंस्पेक्टर राघवेंद्र तोमर, ब्रजमोहन नरवरिया सहित लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर का अन्य स्टाफ शामिल था।
