♠लालगंज कोतवाली में पदस्थ 2018 बैच के कांस्टेबल आशुतोष यादव का रक्तरंजित शव पुलिस बैरक की तीसरी मंजिल की छत पर जाने वाली सीढ़ियों पर मिला।
♠25 सितंबर 2020 की शाम करीब पांच बजे कांस्टेबल आशुतोष की जरूरत पड़ी तो उसकी तलाश शुरू हुई।
जब वह कोतवाली मे नहीं मिला तो बैरक मे जाकर देखा गया। वहां भी न मिलने पर साथी सिपाही बैरक की तीसरी मंजिल पर जाने वाली सीढियों पर गया तो उसके होश उड़ गये। कांस्टेबल आशुतोष यादव का शव सीढ़ियों पर लुढ़का पडा था।♠मृतक के साथियों ने बताया कि छुट्टी बिता कर घर से लौटने के बाद वह अधिक शांत व एकांत में रहने लगा। साथी पुलिसकर्मियों से उसने दूरी बना ली थी। हल्का नंबर चार में उसकी नियमित तैनाती थी, लेकिन शुक्रवार को उसकी ड्यूटी कोतवाल के साथ हमराह के रूप में लग गई। ड्यूटी लगने के बाद कार्यालय से जब वह एके-47 लेकर निकला तो किसी तो नहीं मालूम था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
प्रतापगढ़/उत्तरप्रदेश।
उत्तर प्रदेश में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला यूपी के प्रतापगढ़ जिले का है,जहां लालगंज कोतवाली में एक सिपाही ने खुद को गोली मार ली। सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई। बैरक की तीसरी मंजिल की सीढ़ी पर खून से लथपथ उसका शव मिलने से हड़कंप मच गया।सात घंटे बाद पुलिस को घटना की जानकारी हो सकी। दरअसल,जिले के लालगंज कोतवाली में तैनात सिपाही आशुतोष यादव की शुक्रवार की शाम बैरक में संदिग्ध दशा में गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस अफसरों का मानना है कि सिपाही ने सरकारी एके-47 से गोली मारकर खुदकुशी की। कांस्टेबल की हत्या किसने और क्यों की या फिर उसने आत्महत्या की। इन सभी पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है।
क्या है पूरा मामला


प्राप्त जानकारी के अनुसार,गाजीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के खरौना गांव निवासी आशुतोष यादव पुत्र अखिलेश यादव वर्ष 2018 बैच के सिपाही थे। उनकी पहली तैनाती लालगंज कोतवाली में 16 फरवरी 2019 को हुई थी। शुक्रवार शाम बैरक की तीसरी मंजिल पर खुद को गोली से उड़ा लिया। सात घंटे बाद पुलिस को घटना की जानकारी हो सकी। बैरक की तीसरी मंजिल की सीढ़ी पर उसका खून से लथपथ शव मिलने से हड़कंप मच गया। इस बीच कोतवाल व सीओ भी पहुंचे जानकारी मिलने पर पहुंचे एसपी अनुराग आर्य,एएसपी पश्चिमी दिनेश चंद्र द्विवेदी ने घटना को लेकर पूछताछ की। फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।
इनका कहना
आशुतोष यादव के साथी सिपाहियों ने एसपी को बताया कि वह 17 सितंबर को छुट्टी से लौटे थे, तब से गुमसुम रहते थे। पूछने पर कुछ नहीं कहकर बात टाल देते थे।साथी सिपाहियों ने किसी कारण वश उसके परेशान रहने की जानकारी दी है। फिलहाल पुलिस अफसर घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं। एसपी अनुराग आर्य का कहना है कि प्रारंभिक जांच में घटना आत्महत्या की लग रही है। मौके से खोखा व बुलेट का टुकड़ा मिला है। दोपहर में गोली चलने की आवाज सुनाई दी थी। सिपाही आशुतोष यादव की ड्यूटी कोतवाल के हमराही में लगी थी। सुबह उन्हें कोतवाली से एके-47 दी गई थी। वह एके-47 घटनास्थल पर मिली है।
