बता दें कि इंस्पेक्टर धनेंद्र सिंह भदौरिया की कहानी तो बड़ी लंबी है परंतु ताजा बात यह है कि दतिया से इंदौर ट्रांसफर हुए थे। इंदौर में क्राइम ब्रांच के चीफ बनाए गए थे। गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा के पसंदीदा इंस्पेक्टर बताए जाते हैं। कहा जा रहा है कि पुलिस डिपार्टमेंट में इतने पावरफुल हैं कि एसपी कमिश्नर तो दूर की बात, डीजीपी भी शिकायत प्राप्त होने के बावजूद इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करते।
भदौरिया अपनी नौकरी के दौरान अभी तक सात बार विभागीय जांच का सामना कर चुके हैं। एक बार बर्खास्त भी किया जा चुका है और उन पर दो क्रिमिनल केस हैं। जबकि एक बार जेल भी जा चुके हैं।
इंदौर/मध्यप्रदेश।
मध्य प्रदेश पुलिस के सबसे पावरफुल टीआई धनेंद्र सिंह भदौरिया को अंततः सस्पेंड कर दिया गया। यह कितने ताकतवर हैं, इसका अंदाजा आप सिर्फ इस बात से लगा सकते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश का पालन होने में चौबीस घंटे का समय लगा।
दरअसल,क्राइम ब्रांच TI धनेंद्र सिंह भदौरिया को निलंबित कर दिया गया है रविवार सुबह इसका आदेश जारी कर दिया गया, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजेश हिगणकर ने यह आदेश जारी किया है इस आदेश में लिखा है कि धनेद्र सिंह भदौरिया थाना प्रभारी अपराध शाखा नगरीय पुलिस इंदौर के विरुद्ध अभद्र व्यवहार एवं अवैध वसूली संबंधी शिकायतें प्राप्त होने के संबंध में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है, इन्हे रक्षित केंद्र संबंद्ध किया जाता है।

क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएस और डीजीपी के साथ ही प्रदेश के जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की बैठक ली थी जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस, इंदौर के एक टीआई के भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े प्रदेश के आईजी और एसपी से कहा लिस्ट बनाइए किसी को छोड़ना मत और एडीजी इंटेलिजेंस को जानकारी भेजिए। मौका आने पर ऐसे भ्रष्टाचारियों के यहां हम ईओडब्ल्यू के छापे भी डलवाएंगे। मुख्यमंत्री यहां तक कह गए कि तत्काल कार्रवाई करिए इस तरह भ्रष्टाचार का गदर मचाने वाले टीआई पर। हालांकि उन्होंने इस दौरान इस टीआई का नाम नहीं लिया था लेकिन साफ समझा जा सकता था कि इशारा किसकी तरफ़ था।

सीएम शिवराज की नाराजगी और फटकार के बाद इंदौर के टीआई पर गाज गिरी है। हालांकि वसूली टीआई पर कार्रवाई से पहले सरकार की जमकर किरकिरी हो चुकी थी।
टीआई के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा,बिल्डर से लेकर कलेक्टर तक सब ने शिकायत की थी

–सिकलगीर से अवैध हथियार जब्त किए गए थे, इस मामले में कुख्यात गुंडा राहुल टोकनीवाला भी शामिल पाया गया था। लेकिन बाद में गुंडे से सांठगांठ कर उसे बाहर कर दिया गया। वहीं इस मामले में एक दिव्यांग को उलझा दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर आजाद नगर एससीपी मोती उर रहमान ने भी क्राइम ब्रांच की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे।
–28 जून को क्राइम ब्रांच में हिमांशु पाठक, शुभा, वसुंधरा, रेखा पटेल, कुशल पटेल, अर्पित बनकर, दिलीप राठौर के खिलाफ 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। यह मामला टीक्यूसर्ट प्रा.लि. के कर्ताधर्ताओं से जुड़ा हुआ था। आरोप है कि प्रकरण खरगोन का होने के बाद भी घटनास्थल गोपुर चौराहे का दर्शा कर टीआइ ने सीधे एफआइआर कर ली। पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र ने एसीपी स्तर के अफसर को जांच सौंपी और केस में खात्मा लगवाया।
–सुपर कारिडोर (छोटा बांगड़दा) स्थित करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर भी टीआइ विवादों में रहे। अफसरों की बगैर मंजूरी के सुनील अवस्थी, जितेंद्र, अनिल और नितिन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। आरोपितों ने हाई कोर्ट में एक रिकार्डिंग पेश कर बताया कि टीआइ ने उन्हें धमकाया था। मामले की भी पुलिस आयुक्त को शिकायत की गई।
–ताजा मामला निपानिया क्षेत्र की 300 करोड़ से ज्यादा कीमती जमीन का है। थाना प्रभारी ने इस मामले में एक बिल्डर को नोटिस जारी कर दिया था जो कद्दावर नेता का रिश्तेदार है। नेता ने इस मामले में टीआइ से बैठक की और हल निकालने की सलाह दी। टीआइ द्वारा दोबारा नोटिस देने पर मामला गर्माया और मुख्यमंत्री को शिकायत हो गई।
दागदार है पुराना रिकॉर्ड

लगभग 7 साल पहले दतिया जिले में पदस्थ निलंबित टीआई धनेंद्र सिंह भदाैरिया को पुलिस महानिरीक्षक उमेश जोगा ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। उन पर हत्या के प्रयास के आरोपी भीम यादव (3 हजार का इनामी) से घूस लेने, उसे शरण देने के आरोप थे। दतिया एसपी इरशाद वली द्वारा की गई जांच में यह आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया है।
लगभग 2 साल पहले लूट के आरोपी टीआई धनेंद्र सिंह भदौरिया और दो आरक्षक विजय कौशल व साहब सिंह दतिया न्यायालय में पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। इसके बाद टीआई द्वारा हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगाई गई थी। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने टीआई भदौरिया की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए जमानत दे दी। टीआई भदौरिया को जमानत मिलने के बाद दतिया एसपी ने कोतवाली थाना प्रभारी रविंद्र सिंह गुर्जर को लाइन अटैच कर दिया और थाने के कमान धनेंद्र सिंह को सौंप दी।
कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा–अगले जनम मोहे टीआई ही कीजो…
“अगले जनम मोहे टीआई ही कीजो…..”
कितनी असहाय वाली स्थिति…?
यह वही साहब है जो कुछ वर्ष पूर्व एक मामले में जेल भी जा चुके है और ज़मानत मिलते ही , इनके लिये पद ख़ाली करने के लिये एक साहब को लाइन भेजा गया और इन्हें तुरंत वहाँ पदस्थ…. pic.twitter.com/5p0IXgpKoz
— Narendra Saluja (@NarendraSaluja) October 9, 2022
वहीं टीआई धनेंद्र सिंह भदौरिया सरकार के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। कांग्रेस ने टीआई को लेकर शिवराज सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता नरेंद्र सलूजा (Congress leader Narendra Saluja) का ने ट्वीट कर सरकार पर निशान साधा। सलूजा ने सीएम शिवराज का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि- “अगले जनम मोहे टीआई ही कीजो…..” कितनी असहाय वाली स्थिति…? यह वही साहब है जो कुछ वर्ष पूर्व एक मामले में जेल भी जा चुके है और ज़मानत मिलते ही , इनके लिये पद ख़ाली करने के लिये एक साहब को लाइन भेजा गया और इन्हें तुरंत वहाँ पदस्थ….
वहीं दूसरे ट्वीट में सलूजा ने लिखा कि- झाबुआ एसपी का तबादला – 5 मिनट, कलेक्टर का तबादला – 10 मिनट, टीआई का तबादला – 24 घंटे बताओ कौन बड़ा…? वास्तव में एमपी अजब है- ग़ज़ब है….
झाबुआ एसपी का तबादला – 5 मिनट
कलेक्टर का तबादला – 10 मिनट
टीआई का तबादला – 24 घंटे
बताओ कौन बड़ा…?
वास्तव में एमपी अजब है- ग़ज़ब है….
— Narendra Saluja (@NarendraSaluja) October 9, 2022
शहर के कई बड़े कारोबारियों पर हाथ डाला
बता दें कि इंदौर क्राइम ब्रांच टीआइ धनेंद्र सिंह भदौरिया पर अवैध वसूली को आरोप लगे हैं। टीआई ने अवैध वसूली से अरबों रुपए का साम्राज्य खड़ा किया है। कहा जा रहा है कि टीआई ने बड़े अधिकारियों को जानकारी दिए बिना ही शहर के कई बड़े कारोबारियों पर हाथ डाला। इनके खिलाफ बिना साक्ष्य के ही कार्रवाई की है। साथ ही कुछ व्यापारियों से मोटी रकम की वसूली भी की है। कई मामलों की शिकायत सरकार तक पहुंची थी। इसके बाद सीएम शिवराज ने पुलिस के बड़े अधिकारियों को उस टीआई पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
