बता दें कि बरैया का उपचुनाव के दौरान विवादित बयानबाजी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके खिलाफ बीजेपी चुनाव आयोग भी पहुंची। नतीजों के बाद बरैया ने फिर से मतगणना की मांग की है। उन्होंने कलेक्टर को रिकाउंटिंग का आवेदन दिया था जिसके बाद अंतिम निर्णय
भाजपा की रक्षा सिरोनिया – 56683
कांग्रेस के फूलसिंह बरैया- 56632
51 मतों से भाजपा की जीत हुई
भांडेर/दतिया/मप्र।
मध्यप्रदेश के दतिया जिले से भांडेर सीट पर बीजेपी प्रत्याशी की जीत हुई है। यहां भाजपा प्रत्याशी रक्षा सिराेनिया ने कांटे के मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया काे 51 मताें से हरा दिया है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला रहा। यही वजह कि मात्र 51 वोटों से बीजेपी प्रत्याशी रक्षा सिरोनिया विजय हुईं। इस सीट पर दलित वोटों का खासा जोर था, प्रदेश के सबसे बड़े दलित नेता के रुप में पहचाने जाने वाले फूलसिंह बरैया दलित वोटों को अपनी तरफ खींचने में नाकाम रहे। बरैया कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए थे उन्हें कांग्रेस ने राज्यसभा भेजने के लिए प्रत्याशी बनाया था बरैया पहले बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।
बीजेपी की जीत का प्रमुख कारण
2018 में कांग्रेस के टिकट पर जीतीं रक्षा सिरोनिया इस बार फिर से भाजपा के टिकट से विधानसभा पहुंचने में सफल रहीं। ऐसे में आइए जानते हैं 1.75 लाख मतदाताओं वाले भांडेर सीट पर क्या रही सिरोनिया के जीत की तीन प्रमुख कारण
1. फूल सिंह बरैया भले ही सबसे बड़े दलित नेता रहे हों, लेकिन बसपा में रहते हुए उन्होंने लक्ष्मी बाई, ब्राह्मणों और धर्म के खिलाफ कई विवादित बयान दिए थे। इससे सवर्ण वोटर नाराज था और उसने रक्षा सिरोनिया को चुना।
2. विधायक बनने के बाद से लोगों के फोन न उठाने वाली रक्षा सिरोनिया बेहद सरल स्वभाव की हैं। क्षेत्र में जब लोगों ने उनसे ऐसी शिकायतें कीं तो उन्होंने गलती मान ली और उनके पैर छूने लगीं। अपनी गलती मानने की रक्षा के इस अदा को जनता ने पसंद किया।
3. यहां पर शिवराज सिंह चौहान का असर काफी ज्यादा है। उन्होने 2-3 बार क्षेत्र का दौरा किया जिससे रक्षा सिरोनिया के पक्ष में माहौल बना और वे जीत गईं।
