बता दें कि इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 25 जून को गौरव सिंह को निलंबित कर दिया था। गौरव सिंह को कुल्लू के एसपी के पद से हटाने के बाद सेंट्रल जोन मंडी में शिफ्ट किया गया था। वहीं कुल्लू में गुरदेव शर्मा को एसपी के पद पर तैनाती दी गई थी। इस पूरे प्रकरण की डीआईजी सेंट्रल रेंज मधु सूदन ने जांच कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। इस मामले में गौरव सिंह की विभागीय जांच हो रही है और बलवंत को चार्जशीट किया गया है।
शिमला/हिमाचल प्रदेश।
हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित थप्पड़ कांड के बाद से निलंबित चल रहे एसपी गौरव सिंह और पीएसओ बलवंत सिंह को सरकार ने बहाल कर दिया है। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने बहाली के अलग-अलग आदेश जारी कर दिए हैं। तैनाती होने तक दोनों का मुख्यालय शिमला निर्धारित किया गया है। गौरव को चार्जशीट कर जवाब मांगा गया है। जवाब के आधार पर ही उन्हें सजा देने या न देने का फैसला लिया जाएगा।
गौरव सिंह गत 23 जून को निलंबित किए गए थे और उनकी बहाली 42 दिन बाद हुई है। गौरव सिंह 2013 बैच के आईपीएस हैं। पुलिस मुख्यालय ने तैनाती के लिए गौरव सिंह का मुख्यालय शिमला निर्धारित किया है।
हालांकि इसी मामले में सीएम सिक्योरिटी इंचार्ज से हटाए गए एएसपी ब्रजेश सूद की तैनाती एक हफ्ते बाद ही कर दी गई थी।
ब्रजेश सूद की दोबारा नियुक्ति पर सीएम जय राम ठाकुर ने कहा था कि रिपोर्ट के आधार पर निर्णय किया गया है।दूसरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा था कि विजुअल्स के आधार कार्रवाई प्रस्तावित रहेगी।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 जून को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कुल्लू दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के सामने एसपी कुल्लू रहे गौरव सिंह, एडिशनल एसपी सीएम सुरक्षा बृजेश सूद और मुख्यमंत्री के पीएसओ बलवंत सिंह भिड़ गए थे।
गौरव सिंह ने एएसपी बृजेश सूद को थप्पड़ मार दिया था। इसी बीच बलवंत सिंह ने एसपी को लात मारी थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया के जरिये देश दुनिया में वायरल हो गया था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दौरे के दौरान अफसरों की इस भिड़ंत के कारण सरकार की भी किरकिरी हुई थी।
प्रारंभिक जांच के बाद 25 जून को गौरव और बलवंत को निलंबित कर दिया गया था।
बाद में आईजी मंडी रेंज ने विस्तृत जांच कर पुलिस मुख्यालय के जरिये सरकार को रिपोर्ट भेजी। तब से गौरव सेंट्रल रेंज मंडी से अटैच थे जबकि बलवंत सिंह को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। बृजेश सूद को जांच में दोषी न पाए जाने पर सरकार ने बहाल कर फिर से सीएम सुरक्षा में लगा दिया था।
