बता दें कि नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में इतनी लंबी राशि की रिश्वत लेना आम बात है और ठेकेदारों के द्वारा लंबी राशि की रिश्वत दी जाती है। जिससे उनके बिल पास हो सके। इस मामले की शिकायत ठेकेदार द्वारा लोकायुक्त को किए जाने के बाद लोकायुक्त ने यह कार्रवाई की है लेकिन सैकड़ों ऐसे मामले होते हैं, जिसमें ना तो शिकायत होती है और ना ही शिकवा और जनता के पैसों का बंदरबांट बदस्तूर जारी रहता है।
दमोह/मध्यप्रदेश।
मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों पर लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। आए दिन लोकायुक्त भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर रहा है। ताजा मामला दमोह के तेंदुखेड़ा का है जहां एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए नगर पंचायत के सीएमओ और बाबू (अकाउंटेंट) को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया है। हालांकि बताया जा रहा है कि नगर पालिका का उपयंत्री भी शामिल था,जो कार्यवाही की भनक लगते ही मौके से भाग खड़ा हुआ।
दोनों नगर पंचायत दफ्तर में ही एक ठेकेदार से रिश्वत ले रहे थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सीएमओ ने एक ठेकेदार से उसके किए हुए कामों का बिल पास करने के एवज में 13 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। जिसकी शिकायत ठेकेदार ने सागर लोकायुक्त से की थी।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,CMO प्रकाश चंद्र पाठक और अकाउंटेंट जितेंद्र श्रीवास्तव ठेकेदार से 30 लाख के बिल के बदले एक लाख रुपए की रिश्वत ले रहे थे। दोनों को नगर पंचायत के दफ्तर से गिरफ्तार किया गया है। मामले में सब इंजीनियर अशोक शाह को भी आरोपी बनाया गया है। रिश्वत का हिस्सा CMO और अकाउंटेंट और सब इंजीनियर का था।
नगर परिषद ठेकेदार बीएल बड़ेरिया ने बताया कि उसने शिक्षक कालोनी में सीसी सड़क और नाली निर्माण कराया था, जिसका लगभग 30 लाख रुपए का भुगतान होना था। निर्माण कार्य होने के बाद भी नगर परिषद के CMO, इस इंजीनियर और अकाउंटेंट भुगतान के बदले रिश्वत मांग रहे थे। CMO उससे 13 प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे। बीएल बड़ेरिया के अनुसार, कमीशन न देने के कारण CMO बिल नहीं पास कर रहे थे। कई बार अनुरोध किया, लेकिन CMO ने उनकी नहीं सुनी, इसलिए उसे मजबूर होकर सागर लोकायुक्त में जाकर शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
इनका कहना
सागर लोकायुक्त DSP राजेश खेड़े ने बताया कि शिकायत दर्ज करने के बाद लोकायुक्त टीम ठेकेदार के साथ CMO कार्यालय पहुंची। लोकायुक्त टीम ने ठेकेदार को कैमिकल लगे नोट दिए और जैसे ही CMO, अकाउंटेंट ने कैमिकल लगे नोटों को लिया,लोकायुक्त टीम ने दोनों को पकड़ लिया। सब इंजीनियर दफ्तर नहीं आया था, इसलिए वह पकड़ा नहीं गया, लेकिन उसको भी आरोपी बनाया गया है।
–ठेकेदार बीएल बड़ेरिया ने बताया कि एक लाख रुपए से पहले भी वह 54 हजार रुपए घूस में दे चुका है। इसमें से 36 हजार रुपए सब इंजीनियर अशोक शाह और 18 हजार रुपए अकाउंटेंट जितेंद्र श्रीवास्तव ने लिए थे।
