HomeNews Headlinesबॉलीवुड शोक में डूबा:मशहूर अभिनेता कादर खान का 81 साल की उम्र...

बॉलीवुड शोक में डूबा:मशहूर अभिनेता कादर खान का 81 साल की उम्र में कनाडा में निधन

मुंबई/महाराष्ट्र…………


दिग्गज अभिनेता, डायलॉग राइटर और स्क्रिप्ट राइटर कादर खान का सोमवार को 81 साल की उम्र में कनाडा में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और चार महीने से अस्पताल में भर्ती थे। बेटे सरफराज ने उनके निधन की पुष्टि की। कनाडा में ही उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।


डिसऑर्डर से पीड़ित थे……….


कादर को प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर हो गया था। यह शरीर की गति, चलने के दौरान बनने वाले संतुलन, बोलने, निगलने, देखने, मनोदशा और व्यवहार के साथ सोच को प्रभावित करता है। यह डिसऑर्डर मस्तिष्क में नर्व सेल्स के नष्ट होने के कारण होता है। कादर खान पिछले कई साल से कनाडा में ही अपने बेटे-बहू सरफराज और शाइस्ता के साथ रह रहे थे। बीते कुछ वक्त से सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। 2017 में उनके घुटने की सर्जरी हुई थी। तब से वे ज्यादा देर तक चलने में डरते थे, उन्हें लगता था कि वे गिर जाएंगे।


जीवन सफर…………


22 अक्टूबर 1937 को कादर खान काबुल में एक भारतीय-कनाडाई परिवार में पैदा हुए थे। 1973 में उन्होंने यश चोपड़ा की फिल्म ‘दाग’ से करियर की शुरुआत की। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों के लिए कहानियां लिखीं। स्क्रिप्ट राइटिंग शुरू करने से पहले वे मुंबई के एमएच साबू सिद्दीक इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के लेक्चरर थे। परिवार में उनकी पत्नी अजरा और दो बेटे सरफराज और शहनवाज खान हैं।

1983 में आई फिल्म ‘कुली’ कादर खान के करियर की सुपरहिट फिल्मों में शामिल है। मनमोहन देसाई के बैनर तले बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म सुपरहिट रही थी।  शक्ति कपूर के साथ कादर खान की जोड़ी काफी पसंद की गई। दोनों ने करीब 100 फिल्मों में साथ काम किया। 1982 और 1993 में आई फिल्मों ‘मेरी आवाज सुनो‘ और ‘अंगार’ में बेस्ट डायलॉग के लिए कादर खान को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।  हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें साल 2013 में साहित्य शिरोमणि पुरस्कार भी मिला था।



अमिताभ बच्चन ने श्रद्धांजलि दी…………


अमिताभ बच्चन ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘"कादर खान प्रतिभा के धनी और फिल्मों के लिए समर्पित कलाकार थे। वे गजब के लेखक थे। मेरी ज्यादातर कामयाब फिल्में उन्हीं ने लिखीं। वे मेरे अजीज दोस्त रहे। वे गणितज्ञ भी थे।'' अमिताभ और कादर ने ‘दो और दो पांच’, ‘अदालत’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘कुली’, ‘कालिया’, ‘शहंशाह’ और ‘हम’ समेत 21 फिल्मों में साथ बतौर अभिनेता या डायलॉग-स्क्रिप्ट राइटर काम किया था।


कादर खान के 10 मशहूर डायलॉग…………



-हम नहीं तीर और तलवार से मरने वाले, कत्‍ल करना है तो तो एक तिरछी नजर काफी है…


– हमदीनानाथ चौहान….नाम है मेरा से लेकर मैं जहां खड़ा होता हूं, लाइन वहीं से शुरू होती है..


-तुम्‍हारी उम्र मेरे तर्जुबे से बहुत कम है, तुमने उतनी दीवालियां नहीं देखीं जितनी मैंने तुम जैसे बिकने वालों की बर्बादियां देखी हैं- जैसी करनी वैसी भरनी


-सुख तो बेवफा तवायफ की तरह है…जो आज इसके पास, कल उसके पास- जैसी करनी वैसी भरनी


-जिंदगी तो खुदा की रहमत है, जो नहीं समझा उसकी जिंदगी पे लानत- नसीब


-लानत है, ना पेट में दाना है, ना लोटे में पानी है, ना बंडल में बीडी है, ना माचिस में तीली है- बाप नंबरी बेटा दस नंबरी 


-मालिक, मुझे मालूम नहीं था कि आप मेरे पीछे खड़े हैं, मैं समझा कोई जानवर अपनी सींग से खटमल्‍लू चला रहा है। – हिम्‍मतवाला


-अरे क्‍या गजब करते हो सेक्रेटरी साहब? क्‍यों मोहब्‍बत के शीशे को बुढ़ापे के पत्‍थर से तोड़ रहे हो- दूल्‍हे राजा


-सरकार अगर इस गांव के सर हैं, तो मैं उस सर का सींग हूं। और जो हमारी बात नहीं मानता मैं उसे सींग मार कर सिंगापुर बना देता हूं- हिम्‍मतवाला


-बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरख्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है 'इकबाल'- कुली


कादर खान ने राजेश खन्ना की महाचोर, छैला बाबू, धरम कांटा, फिफ्टी फिफ्टी, नया कदम, मास्टरजी और नसीहत जैसी फिल्मों के डायलॉग लिखे। उन्‍हें  डायलॉग राइटर के तौर पर ब्रेक राजेश खन्ना ने ही दिया था। उन्‍हें मेरी आवाज सुनो फिल्म के लिए 1982 में सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का पुरस्कार मिला और 1993 में अंगार फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।

Live Share Market :
- Advertisment -

Most Popular

error: Content is protected !!