नई दिल्ली……….
प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर का निधन हो गया है। शनिवार देर रात करीब 3.30 बजे तरुण सागर ने दिल्ली में शहादरा के कृष्णा नगर इलाके में अंतिम सांस ली वे 51 साल के थे। तरुण सागर पीलिया से पीड़ित थे और दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल से अपना इलाज करवा रहे थे। बताया जा रहा है कि वे संथारा प्रथा का पालन कर रहे थे और उन्होंने दवाइयां लेने से इंकार कर दिया था।
जैन संप्रदाय के लोग संथारा प्रथा के तहत अन्न-जल छोड़ देते हैं, इसका लक्ष्य जीवन को ख़त्म करना होता है जैन संप्रदाय की मान्यता के अनुसार इस तरह 'मोक्ष' प्राप्त किया जा सकता है।
क्या है संथारा या संलेखना प्रथा………..
जैन धर्म के मुताबिक, मृत्यु को समीप देखकर धीरे-धीरे खानपान त्याग देने को संथारा या संलेखना (मृत्यु तक उपवास) कहा जाता है। इसे जीवन की अंतिम साधना भी माना जाता है। बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 2015 में इसे आत्महत्या जैसा बताते हुए भारतीय दंड संहिता 306 और 309 के तहत दंडनीय बताया था। हालांकि दिगंबर जैन परिषद ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
जीवन परिचय…………
मध्य प्रदेश के दमोह में साल 1967 में जिले के गुंहची गांव के रहने वाले तरुणसागर बचपन से ही काफी धार्मिक थे। उनका जन्म का नाम पवन कुमार जैन था। शुरू से ही धर्म में उनका काफी लगाव रहता था। बताया जा जाता है कि उन्होंने 14 साल की उम्र में ही अपना घर त्याग दिया था। वो आचार्यों के साथ रहने लगे थे। तरुण सागर ने आचार्य विद्यासागर से ब्रह्मचर्य की दीक्षा ली। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 20 साल की उम्र में वह मुनि तरुणसागर बन गए। तरुण सागर को आचार्य पुष्पदंग सागर ने मुनि दीक्षा दी। जिस समय तरुण सागर घर से निकले थे तो यह कहते थे कि वो भगवान बनना चाहते हैं। आज समाधि भावना के साथ उनकी यह बात सच हो गई।
तरुण सागर को उनके कड़वे प्रवचनों के लिए जाना जाता था। वे अपने अनुयायियों को जो प्रवचन देते थे उन्हें कड़वे प्रवचन कहते थे। इन प्रवचनों में तरुण सागर समाज में मौजूद कई बुराइयों की तीखे शब्दों में आलोचना करते थे। उनके प्रवचनों की किताब भी 'कड़वे प्रवचन' नाम से प्रकाशित की जाती है।
जब विधानसभा में पहुंचे मुनि………..
पिछले साल उन्होंने देश में फ़र्जी बाबाओं की जांच करने और उन्हें सजा दिलवाने की बात भी कही थी। तरुण सागर ने कहा था कि देशभर में लगभग 1400 फ़र्जी बाबा हैं जिनकी संपत्ति की जांच की जानी चाहिए।
तरुण सागर की लोकप्रियता जैन समुदाय के बाहर भी थी। उनकी पहुंच नेता और कई राज्य सरकारों तक थी।

साल 2016 में तरुण सागर को हरियाणा विधानसभा को संबोधित करने के लिए बुलाया गया था।
जब तरुण सागर ने हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया तो राजनीतिक गलियारों में कई दिन तक इसकी चर्चा चलती रही। उसी दौरान बॉलीवुड संगीतकार और कई मौक़ों पर आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल रहने वाले गायक विशाल डडलानी को अपने एक ट्वीट के चलते माफ़ी मांगनी पड़ी थी।
डडलानी ने लिखा था, "अगर आपने इन लोगों के लिए वोट दिया है तो आप इस बकवास के लिए ज़िम्मेदार हो नो अच्छे दिन, जस्ट नो कच्छे दिन।
उनके इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनकी खूब आलोचना की खुद अरविंद केजरीवाल ने इस ट्वीट को अफ़सोसजनक बताया था। इसके बाद डडलानी ने कई बार अलग-अलग यूजर्स को माफ़ी का ट्वीट भेजा था।
जब मुनि के कहने पर संघ ने बेल्ट बदली…………
तरुण सागर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का क़रीबी माना जाता था। साल 2011 में उन्हें राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने विजयदशमी के कार्यक्रम में बुलाया था।
इस दौरान उन्होंने कहा था कि स्वंयसेवक जिस चमड़े की बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं वह अहिंसा के विपरीत है। इसके बाद आरएसएस ने अपनी ड्रेस से चमड़े की बेल्ट की जगह कैनवास की बेल्ट इस्तेमाल करनी शुरू कर दी।
कड़वे प्रवचन से समाज की कुरूतियों पर करते थे प्रहार…………
मुनि 'कड़वे प्रवचन' नाम से समाज और राष्ट्र के अहम मुद्दों पर तीखी शब्दों में अपनी राय दिया करते थे। कड़वे प्रवचन नाम से उनकी पुस्तक भी काफी प्रचलित है। पेश हैं उन्हीं की कुछ बातें——–
-किसी दूसरे का बुरा सोचो, उससे पहले अपना बुरा हो जाता है।
-तमाम प्रदूषणों से ख़तरनाक मन का प्रदूषण है, विचारों को शुद्ध रखो।
-भाग्य में जो लिखा है, वही मिलेगा।
-परिवार में ख़ुशी चाहते हैं, तो समझदारी और प्यार से काम लें।
-दिमाग को ठंडा रखो, वक्त के साथ बदलाव को अपनाओ।
-बेटियां होने से, अहंकार ख़त्म हो जाता है।
-व्यक्ति सूरत से नहीं, सीरत से पहचाना जाता है।
-दुनिया का भला चाहते हैं, पहले स्वयं का करो।
-शराब से ज्यादा नशा धन का है।
-धनाढ्य होने के बाद भी पैसों का मोह है, तो उससे बड़ा ग़रीब कोई नहीं।
-मौत से सिर्फ़ और सिर्फ़ नेक काम बचाते हैं।
-तीन घंटे की फ़िल्म असल ज़िंदगी नहीं, हर काम पूरे होश में करो।
-मौत आना तय है. जीवन की रक्षा के लिए कितने ही सुरक्षा कर्मचारी तैनात कर लें, जब मौत आएगी तो कोई कुछ नहीं कर पाएगा।
-प्रत्येक व्यक्ति 'लाभ' की कामना करता है, लेकिन उसका विपरीत शब्द अर्थात 'भला' करने से भागता है।
-सत्ता ईश्वर के हाथ में है। वह नाराज है तो दुनिया की कोई ताकत मदद नहीं कर सकती।
-गाली देने वाले की गाली स्वीकार न करो तो वह उसी के पास रह जाती हैं।
-कोई आपको कुत्ता कहे तो भौंकें नहीं मुस्कुराएं. वह स्वयं शर्मिन्दा हो जाएगा। अन्यथा तुम सचमुच कुत्ता बन जाओगे।
-मौत से सिर्फ और सिर्फ आपने नेक काम बचा सकते हैं।
हाल ही में रक्षा बंधन पर उन्होंने कहा, भाई-बहन का रिश्ता "नाखून और चमड़ी" सा होता है। जैसे नाखून को चाहकर भी चमड़ी से अलग नहीं किया जा सकता है इसी तरह भाई बहन के प्यार को अलग नहीं किया जा सकता है।
