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पुलिस परिवार के आंदोलन से हिला छत्तीसगढ़,अजीत जोगी ने दिया समर्थन,आंदोलन के सूत्रधार को पहुँचाया जेल

रायपुर/छत्तीसगढ़……..


छत्तीसगढ़ में सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे पुलिस परिवारों पर सरकार के साथ-साथ खुद पुलिस की भी हालत खराब है। ऐसे में पुलिस परिवारों को अन्य पार्टियों का समर्थन मिलने से सरकार की हालत और भी खस्ता होती जा रही है। बता दें पुलिस परिवार द्वारा आंदोलन के समर्थन का ऐलान कांग्रेस पहले ही कर चुकी है। अब इसी कड़ी में अजीत जोगी ने भी पुलिस परिवार के आंदोलन को समर्थन देने का मन बना लिया है। अजीत जोगी ने एक पत्र के माध्यम से पुलिस परिवार द्वारा आंदोलन को राज्य की बर्बादी की चरम सीमा करार दिया है। अजीत जोगी का कहना है कि "जिस राज्य में प्रशासन ही शासन से तंग आकर आंदोलन छेड़ दे तो यह समझ लेना चाहिए कि वो राज्य अपनी बर्बादी की चरम सीमा पर पहुंच चुका है"


क्या है मामला……..


छत्तीसगढ़ में पुलिस परिवारों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 25 जून से आंदोलन का ऐलान किया था। जिसके चलते आज से पुलिस परिवारों ने आंदोलन की शुरुआत कर भी दी है। ऐसे में सरकार और पुलिस दोनों ही इस आंदोलन को रोकने की कोशिश में लगे थे, लेकिन पुलिस परिवारों ने आंदोलन के निर्णय से पीछे हटने से इंकार कर दिया। जिसके चलते अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी काफी गर्माहट आ गई है। पहले कांग्रेस ने इस आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया था तो वहीं अब अजीत जोगी भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए हैं।


क्या लिखा अजीत जोगी ने………


1. जब किसी राज्य में प्रशासन ही शासन से तंग आकर आंदोलन छेड़ दे तो यह समझ लेना चाहिए कि वह राज्य अपनी बर्बादी की चरम पर पहुंच चुका है और उस राज्य में कुछ भी ठीक नही हो रहा है। छत्तीसगढ़ के पुलिस कर्मियों द्वारा सरकार के विरुद्ध किया जा रहा आंदोलन इसका जीवंत उदहारण है। छत्तीसगढ़ में उत्पन्न इस भयावह स्थिति के लिए मैं पूरी तरह से राज्य सरकार को दोषी मानता हूं। पब्लिक के साथ साथ अब पुलिस भी सरकार से त्रस्त हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रति भाजपा सरकार की नीति और नियत दोनों गम्भीर नही है। एक तरफ खूंखार नक्सलियों को आत्मसमर्पण के नाम पर बुला-बुला कर तोहफे दिए जा रहे हैं, बड़े आयोजन कर सम्मान किया जा रहा है, उन्हें नौकरियां दी जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस कर्मियों के परिजनों को राजविद्रोही कहा जा रहा है। यह किस तरह का शासन है ?


2. जो समस्या बातों से सुलझ सकती थी उसे दबाव और प्रताड़ना के बल पर सुलझाने का असफल प्रयास किया जा रहा है। राज्य में फैली इस अराजकता के लिए मुख्यमंत्री सीधे तौर पर दोषी हैं। मुख्यमंत्री ने अब तक केवल अपने स्वार्थ के लिए पुलिस कर्मियों का दुरुपयोग किया है। न तो पुलिस रिफॉर्म्स पर ध्यान दिया और न ही पुलिस और पब्लिक में विश्वास और सामन्जस्य बनाने के लिए कोई कार्य किया।


3. मैं छत्तीसगढ़ के पुलिस कर्मियों और जनता से यह वादा करता हूँ कि मेरी सरकार बनते ही आम जनता के हित में 'खुश और चुस्त पुलिस', 'खुश और सुरक्षित जनता ' मॉडल लागू किया जाएगा। मैं स्वयं एक आईपीएस अधिकारी रहा हूं छत्तीसगढ़ के पुलिस कर्मियों की पीड़ा से भली भांति परिचित हूं।


4. इस समय दिल्ली में स्वास्थ लाभ लेने के कारण पुलिस कर्मियों के आंदोलन में उपस्थित होने में असमर्थ हूं किन्तु मेरे दल, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का प्रत्येक कार्यकर्ता पुलिस परिजनों के साथ इस आंदोलन से जुड़ा है। हमने जनता के हित के लिए पुलिस की लाठीयां खाई है और अब पुलिस हित के लिए सरकार की लाठी भी खाने को तैयार हैं हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ में खुशहाली और उन्नति का है।


आंदोलन के सूत्रधार ने जेल में शुरू की भूख हड़ताल…….


छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ पुलिस जवानों के परिवारवालों के आंदोलन मामले में नया मोड़ आ गया है आंदोलन के कथित सूत्रधार राकेश यादव ने सेन्ट्रल जेल बिलासपुर में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार सुबह से ही राकेश यादव ने खाना खाने से इनकार कर दिया है। बता दें कि राकेश यादव पुलिस विभाग के बर्खास्त आरक्षक हैं। पुलिस जवानों की सुविधाओं को लेकर राकेश ने पुलिस विभाग व सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। व्यवस्था में सुधार को लेकर हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है। इन्हीं मांगों को लेकर पुलिस जवान के परिवार वालों ने 25 जून को राजधानी रायपुर में आंदोलन का ऐलान किया है।




पुलिस का आरोप है कि रा​केश यादव व कुछ अन्य बर्खास्त पुलिस जवान ही आंदोलन के सूत्रधार हैं। पुलिस ने राकेश यादव के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया है। बीते शनिवार को राकेश यादव को सूरजपुर के एक फार्म हाउस से गिरफ्तार कर ​जेल दाखिल कर दिया गया।


धरनास्थल पर पहुँची पुलिसकर्मियों की पत्नियां……….


छत्तीसगढ़ में पुलिस आंदोलन का असर सोमवार को रायपुर में शुरुआत में तो देखने को नहीं मिला, लेकिन दोपहर में काफी तादाद में पुलिसकर्मियों की पत्नियां धरनास्थल पर पहुंची। पुलिस की काफी सख्ती के बाद भी कई महिलाएं पहुंचना शुरू हो गई है। ऐसे में अब पुलिस ने महिलाओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है। पुलिस के द्वारा सदर बाजार रोड, कालीबाड़ी, मारवाड़ी श्मशान घाट रोड, पुरानी बस्ती समेत चारो तरफ बेरिकेड्स लगाकर आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया है।





पुलिस परिवारों के आंदोलन से सशंकित सरकार ने सोमवार को चप्पे-चप्पे पर पहरा बिठा दिया है। आंदोलन को कुचलने के लिए बर्खास्तगी, नोटिस, और धमकी के बाद पुलिस जवान भी सहमे हुए हैं लेकिन उनकी पत्नियां आंदोलन के लिए आमादा हैं।


पुलिसकर्मियों के परिजनों की माँगे…….


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