बता दें कि EOW के पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने बताया कि दमोह में तीन साल पहले काले हिरण के शिकार के मामले की जांच में गड़बड़ी को लेकर भी रेंजर की कथित भूमिका सामने आई थी।
बिहारी सिंह वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के रूप में सरकारी सेवा में आए थे और वर्ष 2011 में रेंजर के तौर पर पदोन्नत हुए थे। उनकी सेवानिवृत्ति में महज 10 महीने शेष हैं
देवास/उज्जैन/मप्र।
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारियों कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। इसी तारतम्य में पुलिस के आर्थिक अपराध अनुसंधान दस्ते (EOW) ने मध्यप्रदेश के देवास जिले के कमलापुर में वन विभाग के रेंजर को एक सरपंच से 20 हज़ार रुपये की रिश्वत लेते बुधवार को रंगे हाथों पकड़ा। ईओडब्ल्यू उज्जैन ने रेंजर की संपत्तियों की जांच शुरू करते हुए उसके घर से 2.24 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की है। रिश्वतखोरी के आरोप में वन विभाग के रेंजर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत मामला दर्ज किया गया है।पुलिस अधीक्षक के मुताबिक आरोपी को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार,ईओडब्ल्यू उज्जैन के पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने बताया कि देवास जिले के डबल चौकी क्षेत्र के पास वन विभाग के रेंजर बिहारी सिंह को भील आमला गांव के सरपंच डूंगर सिंह से कथिततौर पर रिश्वत के रूप में 20 हज़ार रुपये लेते पकड़ा गया। उन्होंने बताया, रेंजर की अनुचित मांग से तंग आकर सरपंच ने ही ईओडब्ल्यू से उसकी शिकायत की थी। सरपंच को वन क्षेत्र में पट्टे की अपनी जमीन को समतल कराने और इस पर प्रदेश सरकार की कपिलधारा योजना के तहत कुआं खुदवाने के लिए वन विभाग के अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने की एवज में रेंजर ने सरपंच से कथित तौर पर 25 हज़ार रुपए रिश्वत की माँग की थी। उन्होंने बताया कि रेंजर की संपत्तियों की जांच के दौरान उसके देवास जिले स्थित सरकारी निवास से 2.24 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई है और इंदौर शहर में उसके घर की भी तलाशी ली जा रही है।
