बता दें कि शहर के यातायात थाना प्रभारी दिलीप तिवारी लोकायुक्त के हत्थे चढ़ गए। रिश्वतखोर थाना प्रभारी को रंगे हाथों की टीम ने गिरफ्तार किया। यातायात के नियमों को लेकर और व्यवस्था बनाने के नाम पर थानेदार अवैध वसूली किया करते थे। रीवा की लोकायुक्त पुलिस ने बीती शाम बड़ी कार्रवाई करते हुए यातायात थाने के प्रभारी सूबेदार दिलीप तिवारी और सहयोगी आरक्षक अमित सिंह को 10500 रिश्वत की रकम लेते हुए गिरफ्तार किया।
रीवा/मध्यप्रदेश।
कहते हैं! सिंघम जैसी मूछें रख लेने से दिल में सिंघम जैसा जज्बा आ जाए यह जरूरी नहीं है।
सिंघम जैसी मूछों के साथ दिल में ईमानदारी,बहादुरी
और करुणा का होना भी आवश्यक होता है।

दरअसल,मध्य प्रदेश की रीवा लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार देर शाम को गाड़ी छोड़ने को लेकर 10 हजार 500 रुपये की रिश्वत ले रहे प्रभारी यातायात थाना प्रभारी सूबेदार दिलीप तिवारी एवं आरक्षक अमित सिंह बघेल को लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ ट्रेप किया है। लोकायुक्त संगठन द्वारा कार्रवाई पूरी हो जाने के बाद सूबेदार सहित आरक्षक को जमानत पर रिहा कर दिया गया है।

लेकिन इस घटना से पुलिस की साख पर एक बार फिर रिश्वतखोरी का दाग ऊभर आया है। बताया जा रहा है कि लोकायुक्त की कार्रवाई तो जारी रहेगी लेकिन आरोपित यातायात थाना प्रभारी और आरक्षक को जल्द ही जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा निलंबन आदेश थमाया जा सकता है। जिसके बाद आरोपित पुलिस कर्मियों की परेशानी और बढ़ जाएगी।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,लोकायुक्त एसपी गोपाल सिंह धाकड़ ने बताया कि प्रभारी यातायात थाना प्रभारी सूबेदार दिलीप तिवारी अपने हमराह अमित सिंह बघेल के साथ मिलकर गत दिनों पकड़ी गई बोलेरो जीप छोड़ने के एवज में पैसे की मांग कर रहे थे जिसकी शिकायत शिकायत कर्ता नवल किशोर रजक पुत्र गोमती प्रसाद रजक उम्र 35 वर्ष निवासी आदर्श नगर लोकायुक्त संगठन में दर्ज कराई थी। उक्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लोकायुक्त एसपी गोपाल धाकड़ द्वारा शिकायत की जांच कराई गई जांच में शिकायत सही पाई गई। मंगलवार की देर शाम आठ बजे तक रीवा यातायात थाना के समीप सूबेदार दिलीप तिवारी व आरक्षक अमित सिंह बघेल को लोकायुक्त की टीम ने पकड़ लिया। बताया गया है कि उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत कर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है।

इनका कहना
शिकायतकर्ता ने बताता की यातायात थाने के सूबेदार दिलीप तिवारी को रकम सौंपी थी। फिर सूबेदार ने अपने हाथ से रिश्वत के रुपए यातायात थाने के आरक्षक चालक अमित सिंह बघेल काे दे दिया। ऐसे में आरक्षक भी आरोपी बन गया है। ट्रेप कार्रवाई निरीक्षक जियाउल हक ने DSP प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में की है। टीम में दो पंच साक्षी सहित 12 सदस्यीय दल मौजूद था।
